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गुजरात चुनाव के पहले अयोध्या मुद्दे को चुनावी रंग दे रही बीजेपी-कांग्रेस

मनोज त्यागी, रणदीप सुरजेवाला, मणि शंकर अय्यर और कपिल सिब्बल को धन्यवाद कहना चाहिए कि बीजेपी राहुल गांधी और कांग्रेस को वापस उसी पिच पर लौटती देख रही है जहां खेलना उसे सबसे ज्यादा उपयुक्त लगता है

Sanjay Singh Updated On: Dec 07, 2017 10:23 AM IST

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गुजरात चुनाव के पहले अयोध्या मुद्दे को चुनावी रंग दे रही बीजेपी-कांग्रेस

जब पूरे उत्साह के साथ ‘पंडित राहुल गांधी’ के पोस्टर सामने लाए गए, तो निश्चित रूप से यह कांग्रेस के मीडिया विभाग प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला के उस दावे से मिली प्रेरणा का नतीजा होगा कि कांग्रेस के भावी अध्यक्ष 'न केवल हिन्दू हैं बल्कि जनेऊ धारी हिन्दू हैं.' यह भी महज संयोग ही है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश होते हुए कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की सुनवाई 2019 चुनावों के बाद की जानी चाहिए क्योंकि इसके फैसले के जबरदस्त राजनीतिक परिणाम होंगे.

अयोध्या में कथित बाबरी मस्जिद के विध्वंस के 25 साल हो चुके हैं और रामलला मंदिर (भगवान राम के बचपन की छवि) से भी एक तथ्य सामने आ रहा है. अयोध्या में 1990 के राम मंदिर आंदोलन के महारथी लालकृष्ण आडवाणी, जो बीजेपी के संस्थापक नेता हैं, अपनी ही बनाई पार्टी में परिदृश्य के पीछे चले गए हैं. एक बार फिर वे विध्वंस की साजिश के आरोपों का सामना कर रहे हैं. वे उस राज्य में और उस निर्वाचन क्षेत्र में भी, जहां से वे प्रतिनिधित्व करते हैं, पार्टी के लिए चुनाव अभियान नहीं चला रहे हैं.

लेकिन यह भी सच है कि बाबरी मस्जिद या बीजेपी के अनुसार ‘विवादास्पद ढांचा’ के तोड़े जाने के 25 साल बाद राम मंदिर मुद्दा बीते कुछ वर्षों की तरह एक बार फिर उभरकर सबसे ऊपर आ गया है. केन्द्र और उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की बीजेपी सरकार आधिकारिक रूप से राम मंदिर मुद्दे को आगे नहीं बढ़ा रही है. लेकिन इनका इरादा भी बहुत साफ है कि वे अयोध्या से जुड़े मुद्दों के गिर्द और श्री राम से जुड़े प्रतीकों को चुनकर मसले को गरम रखे हुए है. वास्तव में वे अयोध्या मंदिर कई बार गए हैं और हर बार बीजेपी व राम मंदिर समर्थकों की उम्मीदों को जिन्दा रखने की हरसम्भव कोशिश की है जिनके बीच ये बात आम हो गयी है कि 'केन्द्र में मोदी और यूपी में योगी. मंदिर अब नहीं बनेगा तो कब बनेगा.'

Deepotsav celebrations in Ayodhya

राम मंदिर पर बीजेपी और कांग्रेस का अपना-अपना रुख बरकरार

अयोध्या में विध्वंस के 25वें वर्ष में जो बदलाव आया है वह यह कि वर्षों से 6 दिसम्बर को विपक्ष आक्रामक रहा है, संसद नहीं चलने दी है और इस मामले को विश्वास का मामला बताते हुए बीजेपी खुद का बचाव करती रही है. लेकिन इस बार इस मौके पर बीजेपी ही आक्रामक है, जो कांग्रेस और विपक्षी दलों से एक-एक सवाल का जवाब मांग रही है.

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बीजेपी को इस भावनात्मक मुद्दे को हवा देने और इस पूरी राजनीतिक बहस शुरू करने के लिए जिस मौके का इंतजार था, वह अवसर कपिल सिब्बल के सुप्रीम कोर्ट में तर्क ने उपलब्ध करा दिया है. उन्होंने हर तरह से आग्रह करने की कोशिश कि सबसे अधिक राजनीतिक रूप से विवादास्पद इस मामले को अनन्त काल के लिए लटका दिया जाए और 2019 चुनावों से पहले नतीजा तो छोड़ दीजिए, इसकी सुनवाई तक नहीं हो. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने राहुल गांधी और कांग्रेस को अलग-थलग करने के लिए इस मुद्दे को उठा लिया. यह संयोग हो सकता है कि 6 दिसम्बर जब ‘धर्मनिरपेक्ष’ दल पिछले ढाई दशक से बरसी मनाती रही है, इसके ठीक एक दिन पहले 5 दिसम्बर को सुनवाई करने का सुप्रीम कोर्ट ने फैसला किया.

कपिल सिब्बल का तर्क राजनीतिक रूप से इसलिए इतना ज्यादा विवादास्पद हो गया है क्योंकि गुजरात में चुनाव अभियान शबाब पर है जहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है. दूसरी बात ये है कि सोमनाथ मंदिर प्रकरण में राहुल गांधी को गैर हिन्दू बताने की कोशिश के बाद कांग्रेस ने अपने भावी अध्यक्ष को हिन्दू पंडित के तौर पर पेश कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह हिन्दू विरोधी और मुस्लिम परस्त नहीं है. गुजरात में जिस सबसे बड़े मुद्दे पर चर्चा हो रही है कि क्या कांग्रेस राज्य में तीन दशक के बाद जातिगत आधार पर सत्ता में वापसी कर सकेगी (राहुल ने अपने हिन्दू होने का प्रमाण रखा है) या कि बीजेपी का हिन्दुत्व का मुद्दा पहले की तरह हिन्दू मतदाताओं के दिमाग में हावी रहेगा?

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कांग्रेस खड़ी कर रही राहुल के लिए मुश्किलें

राज्य के ज्यादातर हिस्सों में समुद्री तूफान की स्थिति और खराब मौसम के कारण अमित शाह की रैलियां मंगलवार को रद्द हो गयी. इसलिए वे अहमदाबाद में विमान से उतरे और सीजी रोड पर बने बीजेपी के नये मीडिया ऑफिस में हड़बड़ी में मीडिया को ‘बाइट’ देने के लिए बुलाया. इसमें उन्होंने राहुल गांधी से मांग की कि वे राम मंदिर पर अपने नेता और वकील कपिल सिब्बल के बयान पर अपना रुख साफ करें.

बाद में ट्वीट्स की झड़ी लगाते हुए शाह ने कहा, 'जबकि राहुल गांधी गुजरात में एक के बाद एक मंदिर जाते हैं, उनकी ही पार्टी के कपिल सिब्बल राम मंदिर के निर्माण में देरी हो, इसके लिए युक्तियां भिड़ा रहे हैं.' एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, 'मैं कांग्रेस पार्टी से मांग करता हूं कि वह जनता के सामने अपना दोहरा रुख साफ करे और बताएं कि राम मंदिर का 2019 के चुनावों से क्या लेना-देना है. उन्हें यह भी बताना चाहिए कि क्या वे जल्द से जल्द राम मंदिर बनाना चाहते हैं या नहीं.'

शाह पार्टी दफ्तर में देर रात तक टिके रहे और चुनाव अभियान को लेकर पार्टी नेताओं के साथ आगे की रणनीति बनाते रहे. बीजेपी को अच्छा लगता अगर राहुल गांधी उसी तरह से सेकुलर-कम्युनल पैटर्न पर चल रहे होते जैसा कि गोधरा दंगे के बाद न्याय या सोहराबुद्दीन शेख-कौसर बी का कथित मुठभेड़ में मारे जाने का इस्तेमाल 2002, 2007 और 2012 के चुनावों में हुआ था. इसके बदले वे अपने माथे पर अपना तिलक लहरा रहे हैं. मनोज त्यागी, रणदीप सुरजेवाला, मणि शंकर अय्यर और कपिल सिब्बल को धन्यवाद कहना चाहिए कि बीजेपी राहुल गांधी और कांग्रेस को वापस उसी पिच पर लौटती देख रही है जहां खेलना उसे सबसे ज्यादा उपयुक्त लगता है.

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सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से कपिल सिब्बल का राम मंदिर निर्माण का विरोध करने को गुजरात के मतदाता झेल सकते हैं. किसी को ये नहीं भूलना चाहिए कि 15 साल पहले 27 फरवरी 2012 को साबरमती एक्सप्रेस के कोचों में जिन 59 लोगों को जिन्दा जला दिया गया था, वे लोग राम मंदिर निर्माण के लिए प्रस्तावित ‘शिलादान’ के लिए पूजा करके लौट रहे थे.

Gujarat Election Results 2017

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