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NRI के बूते 2019 की राह आसान करना चाहती है बीजेपी-आरएसएस

2019 में होने वाले अगले लोकसभा चुनावों पर नजरें गड़ाते हुए आरएसएस ने पहले ही 23 देशों के पीआईओ (भारतीय मूल के लोगों) के भारत दौरे का मौका हथिया लिया है

Debobrat Ghose Debobrat Ghose Updated On: Jan 11, 2018 02:31 PM IST

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NRI के बूते 2019 की राह आसान करना चाहती है बीजेपी-आरएसएस

प्रवासी भारतीयों (एनआरआई) को वोटिंग राइट्स देने (परोक्ष रूप से) का बिल जल्द ही संसद में पेश होना है. राहुल गांधी भी देर से ही सही मगर विदेश में रहने वाले भारतीयों को लुभाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राह पर चल पड़े हैं. ऐसे में लग रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने भारतीयों की इस अहम अंतरराष्ट्रीय बिरादरी पर पकड़ बनाने की प्रधानमंत्री की कोशिशों को समर्थन देने का फैसला कर लिया है.

2019 में होने वाले अगले लोकसभा चुनावों पर नजरें गड़ाते हुए आरएसएस ने पहले ही 23 देशों के पीआईओ (भारतीय मूल के लोगों) के भारत दौरे का मौका हथिया लिया है. ये लोग 9 जनवरी को नई दिल्ली में हुई पीआईओ पार्लियामेंटेरियन कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने आए थे.

2019 के पहले प्रवासी भारतीयों को मिल सकता है वोटिंग राइट्स

पीआईओ सांसदों और मेयरों की आरएसएस के साथ राजधानी में बुधवार को चर्चा हुई ताकि भारत और उनके संबंधित देशों के साथ रिश्तों से जुड़े हुए तमाम मसलों पर चर्चा की जा सके और इन रिश्तों को मजबूत किया जा सके. इस कदम को प्रधानमंत्री मोदी के विदेश में रह रहे भारतीयों को अपने साथ जोड़ने की मुहिम के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है. मोदी पीएम बनने के बाद से लगातार विदेश में भारतीयों के साथ मिलजुल रहे हैं और उन्हें संबोधित कर रहे हैं. ये मेलजोल निश्चित तौर पर विदेश में रहने वाले 2.5 करोड़ भारतीयों की राय को बदलने में बड़ा फैक्टर साबित हो सकता है. उम्मीद की जा रही है कि इन एनआरआई को 2019 के आम चुनावों से पहले वोटिंग राइट्स मिल जाएंगे.

हालांकि, आरएसएस ने आधिकारिक तौर पर ज्यादा खुलासा नहीं किया है, लेकिन यह गतिविधि इस तरह के मकसद की ओर इशारा जरूर करती है. आरएसएस के सिद्धांतों पर चलने वाली एक नॉन-प्रॉफिट, नॉन-गवर्नमेंटल संस्था अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद (एआरएसपी) ने बुधवार के इवेंट का आयोजन किया था. इस कॉन्फ्रेंस में कई सत्रों के दौरान पीआईओ के साथ चर्चा हुई.

नाम न छापने की शर्त पर आरएसएस के सूत्र ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया, ‘विदेश में रह रहे भारतीय मूल के सांसदों और मेयरों के साथ चर्चा के दौरान हमने इस बात पर फोकस किया कि भारत के लिए क्या किया जा सकता है और हमारा देश उनसे क्या उम्मीद करता है. चर्चा की दूसरी मुख्य चीजों में अंतरराष्ट्रीय संबंध और राजनीति थी. हमने इस बात पर भी विचार किया कि किस तरह से भारत यूएन में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है.’

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RSS का संगठन 34 देशों में है सक्रिय

देश के बाहर रह रहे हिंदुओं को एकजुट करने और उन्हें सपोर्ट करने वाला आरएसएस का संगठन हिंदू स्वयंसेवक संघ (एचएसएस) 34 देशों में सक्रिय है और वह इन एनआरआई को साथ जोड़ने में एक अहम भूमिका निभा रहा है. बिल के संसद में पास होने के बाद करीब 1.45 करोड़ एनआरआई संभावित वोटर हो सकते हैं. अभी तक एनआरआई आम चुनावों और असेंबली चुनावों में एक अहम भूमिका निभाते रहे हैं. ये अपने संबंधित राज्यों में जाकर और राजनीतिक पार्टियों के लिए लॉबिंग करके स्थानीय वोटरों को प्रभावित करने का काम करते रहे हैं. गुजरात के हालिया असेंबली इलेक्शंस के दौरान बड़ी तादाद में एनआरआई राज्य में आए और वोटरों को प्रभावित करने का काम किया. इसी तरह का ट्रेंड पंजाब इलेक्शंस के दौरान भी देखा गया.

एआरएसपी के महासचिव श्याम परांडे ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है, ‘भारत को विदेश में रहने वाले भारतीयों पर अपने देश के साथ जुड़े रहने और साथ ही अपने निवास वाले देश के विकास में योगदान देने के लिए गर्व है. मौजूदा वक्त में कई देशों में करीब 280 सांसद हैं. इन्हें 9 जनवरी 2018 एक कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आमंत्रित किया गया. अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद 10 जनवरी को इनकी मेजबानी कर रही है.’ एआरएसपी एक इंटरनेशनल ग्रुप भी बनाने पर विचार कर रही है जो कि विदेशी भारतीयों के साथ कनेक्ट करेगा और अपने संदेश को उन तक पहुंचाने में मदद करेगा.

राहुल गांधी-नरेंद्र मोदी

राहुल गांधी-नरेंद्र मोदी

मोदी और राहुल, दोनों नेताओं में है होड़

एआरएसपी मीट में हिस्सा लेने वाले एक शख्स ने बताया, ‘अगर 2019 से पहले एनआरआई को वोटिंग राइट्स मिल गए तो यह सत्ताधारी बीजेपी के लिए विदेशी भारतीयों का मजबूत सपोर्ट हासिल करने में मददगार साबित होगा. पीएम मोदी विदेश में एक पॉपुलर चेहरा हैं और भारतीय मूल के विदेशी सांसदों के अलावा लाखों ऐसे एनआरआई हैं जो कि उन्हें सपोर्ट देना चाहते हैं. ये सांसद और एनआरआई भारत के अपने संबंधित राज्यों में खासा प्रभाव रखते हैं. इसके अलावा प्रॉक्सी वोटिंग से ये स्थानीय वोटरों को एकजुट करने में भी सफल हो पाएंगे.’

कांग्रेस प्रेसिडेंट राहुल गांधी ने 8 जनवरी को बहरीन में 'ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन ऑफ पीपुल ऑफ इंडियन ऑरिजन इन बहरीन' से मुलाकात की. यहां उन्होंने भारत के सामने मौजूद दो खतरों का जिक्र किया- पहला, बेरोजगारी और दूसरा भारत सरकार का देश को जाति और धर्म के आधार पर विभाजित करना. उनके बयान की बीजेपी ने कड़ी निंदा की. इससे पहले राहुल यूएस में बर्कले भी जा चुके हैं और वहां भारतीय समुदाय को संबोधित कर चुके हैं.

एक पार्टिसिपेंट ने कहा, ‘चर्चा का एक अहम भाग यह था कि किस तरह से भारत की विदेश में मजबूत इमेज दिखाई जाए. कैसे देश को बुरे नजरिये से दिखाने की बजाय दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था के तौर पर दिखाया जाए.’

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