S M L

2019 चुनाव में अखिलेश के लिए आसान नहीं होगी कन्नौज से गुजरने वाली राह

समाजवादी पार्टी का गढ़ कहे जानेवाली कन्नौज संसदीय सीट से अपनी सियासी पारी की शुरुआत करने वाले अखिलेश यादव एक बार फिर 2019 में इस सीट से मैदान में उतर सकते हैं, लेकिन इस बार उनके सामने चुनौती बड़ी होगी

FP Staff Updated On: Jan 25, 2018 04:33 PM IST

0
2019 चुनाव में अखिलेश के लिए आसान नहीं होगी कन्नौज से गुजरने वाली राह

मिशन 2019 की तैयारियों में जुटे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कन्नौज से आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है. यह वही सीट हैं जहां से उन्होंने अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत 2000 से की थी और लगातार तीन बार चुनाव जीते. मौजूदा समय में पत्नी डिंपल यादव कन्नौज से सांसद हैं. लेकिन पिछले तीन चुनावों (लोकसभा, विधानसभा और नगर निगम) में समाजवादी पार्टी को मिली करारी शिकस्त ने इस सीट पर पार्टी के समीकरण को बिगाड़ दिया है. जानकार और आंकड़ों के मुताबिक 2019 में अखिलेश के लिए यह सीट आसान नहीं होगी.

छत्तीसगढ़ में डिंपल के चुनाव न लड़ने की कही थी बात

छत्तीसगढ़ के दौरे पर गए अखिलेश यादव ने परिवारवाद पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा था, 'अगर सपा में ही परिवारवाद है तो डिंपल यादव कन्नौज से चुनाव नहीं लड़ेंगी.' इस बयान के बाद से ही कयास लगाए जाने लगे थे कि अखिलेश यह सीट अपने लिए चुन सकते हैं. पिछले दिनों छोटे लोहिया यानी जनेश्वर मिश्र के पुण्य तिथि के मौके पर अखिलेश ने कहा, 'नेताजी मैनपुरी से चुनाव लड़ेंगे और मैं कन्नौज से चुनाव लड़ना चाहता हूं.'

अखिलेश के इस ऐलान के पीछे एक सोची समझी रणनीति है. इसके अलावा यह समाजवादी पार्टी की परम्परागत सीट भी रही है. लेकिन 2009 में सपा छोड़ कांग्रेस के टिकट से राजबब्बर ने उपचुनाव में डिंपल यादव को हराकर इस सीट पर कब्ज़ा जमाया था. इसके बाद 2012 में अखिलेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद डिंपल ने इस सीट पर चुनाव जीता था. यही वजह है कि सपा के परम्परागत सीटों में से एक कन्नौज की सीट अखिलेश अपने पास ही रखना चाहते हैं.

पिछले चार सालों में बीजेपी ने की सेंधमारी

कभी समाजवादी पार्टी का गढ़ रही इस सीट पर बीजेपी ने सेंधमारी की है. 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी सत्ता में होने के बावजूद डिंपल यादव को महज 19 हजार से जीत मिली. यहीं नहीं 2017 के विधान सभा चुनाव में पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा, कन्नौज की पांच विधानसभा सीटों में से बीजेपी को चार सीट पर जीत मिली जबकि सपा एक सीट ही जीत सकी, वो भी महज 2400 वोटों के अंतर से. हाल ही में संपन्न नगर निकाय चुनाव में भी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा.

1998 के बाद से 6 बार रहा सपा का कब्ज़ा

गौरतलब है कि 1998 के लोक सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने यह सीट बीजेपी के एमपी चन्द्रभूषण सिंह से छीनी थी. उसके बाद से लगातार हुए 6 चुनाव में सपा यहां जीती. अब इस सीट को 2019 में बचाए रखना अखिलेश के लिए एक बड़ी चुनौती होगी.

मुस्लिम विदके तो होगी मुश्किल

कन्नौज सीट पर यादव और मुस्लिम मतदाताओं का प्रतिशत क्रमशः 16 और 36 फ़ीसदी है. ऐसे में दोनों ही निर्णायक भूमिका में होते हैं. लेकिन विधानसभा चुनाव की तरह अगर लोकसभा चुनाव में भी मुस्लिम मतदाता अगर सपा से विदके तो अखिलेश की राह मुश्किल हो जाएगी. इतना ही नहीं इस सीट पर ब्राह्मण मतदाता की संख्या भी 15 फीसदी के ऊपर हैं. करीब 10 फीसदी राजपूत हैं, ओबीसी मतदाताओं में लोधी, कुशवाहा, पटेल बघेल का वोट प्रतिशत भी काफी मायने रखता है.

(न्यूज18 के लिए अमित तिवारी की रिपोर्ट)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Test Ride: Royal Enfield की दमदार Thunderbird 500X

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi