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विंटेज ऐड: विज्ञापन बताता है कि औरत और जूतों की जगह एक है

कई ऐसे विज्ञापन हैं जिनको देखकर लोगों का खून खौल उठे

Aditi Sharma Updated On: Jan 30, 2018 09:23 AM IST

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विंटेज ऐड: विज्ञापन बताता है कि औरत और जूतों की जगह एक है

औरत पैरों की जूती होती है, औरत रसोई में ही शोभा देती है, औरत को हमेशा दबाकर रखना चाहिए, आज के वक्त में कोई भी ऐसी बात को दकियानूसी कहा जाता है. मीडिया में, सोशल मीडिया पर ऐसी कई बहस चलती हैं. कई बार महिलाओं के प्रति इस व्यवहार को भारतीय, मिडिल ईस्ट के देशों से जोड़ लिया जाता है. एक आम धारणा रहती है कि पश्चिम, अमेरिका जैसे देशों में महिलाओं को घर में रहने, खाना पकाने और बच्चे पालने भर को नहीं समझा जाता है.

हकीकत इससे अलग है. जब बात महिलाओं को बराबरी देने की आती है, दुनिया भर की तमाम संस्थाएं, सभ्यताएं और धर्म कटघरे में खड़े दिखते हैं. आइए नजर डालते हैं1930-1950 के बीच आए ऐसे ही कुछ पुराने विदेशी विज्ञापनों पर-

घर का काम करने से खूबसूरती आती है

vintage ad (1)

औरत जितना काम करेगी वो उतनी ही खूबसूरत होगी, ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि ऊपर दिखाए गए इस विज्ञापन में बताया गया. ये विज्ञापन पेप नाम के एक ब्रांड का है. बेशक काम करने में किसी को कोई तकलीफ नहीं होगी पर जिस तरह से इस विज्ञापन में औरत के पहनावे और उसके हाथ में डस्टर को दिखाया गया है उससे केवल एक तरह के काम की तरफ ही इशारा मिल रहा है.

उंगलियां नाजुक हैं

vintage ad (2)

क्या आप आज के समय में भी मानेंगे की औरतें कमजोर होती हैं? शायद नहीं मानेंगे लेकिन उस समय काफी सारे लोग ये मानते थे . इसी सोच पर आधारित ये विज्ञापन बना था. जिसमें एक औरत ढक्कन खोल सकती है या नहीं इस पर भी सवाल उठाया जा रहा है.

पैंट का 'खेल'

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क्या आप बता सकते हैं कि ये किस प्रोडक्ट का विज्ञापन है. ये पुरुषों की पैंट का विज्ञापन है जो इस तरह दर्शाया गया था. इस विज्ञापन में पुरुषों को कहा गया था कि अगर औरतों के साथ 'खेलना' चाहते हैं तो इन पैंट का इस्तेमाल कीजिए.

टाई, जमीन पर

vintage ad (4)

अब इस विज्ञापन को ही देख लिजिए. ये विज्ञापन टाई का है. इसमें कहा गया है कि औरतों को बताओं की ये दुनिया पुरुषों की है. मतलब अगर पुरुष टाई पहनले तो औरत जमीन पर होती है.

कसरत नहीं झाड़ू-पोंछा

vintage ad (5)

सफाई करो और अपना वजन बनाए रखो. ये विज्ञापन औरतों को अपनी वजन कम करने की सलाह देता है, वो भी घर की सफाई करने के साथ.

पति से ज़िद करो

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आज के समय में एक औरत इतनी आत्मनिर्भर तो ही गई है कि अपनी जरूरतों का सामान खुद खरीद ले. लेकिन इस विज्ञापन में समाज के उस दौर को दिखाया गया है जब औरत छोटी-छोटी चीजों के लिए अपने पति पर निर्भर रहती थी. इस विज्ञापन में कहा गया है कि अगर आपके पति इनमें से कुछ आपको लाकर नहीं देते तो थोड़ा सा रोइए और वो आपको आपकी चीजे लाकर देंगे.

डियो या सिगरेट सब एक

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वैसे ये विज्ञापन इकलौता ऐसा विज्ञापन है जिसकी झलक आज के समय में भी देखी जा सकती है. मिसाल के तौर पर डियोड्रेंट का विज्ञापन जिसमें कहा जाता है की थोड़ा डियोड्रेंट लगाइए और लड़किया आपके पीछे आएंगी. वो विज्ञापन भी इससे कुछ मिलता झुलता ही है. ये विज्ञापन सिगरेट का था जिसमें कहा गया था कि सिगरेट का धुंआ औरत के चेहरे पर छोड़िए और वह आपका हर जगह पीछा करेगी.

पांव के नीचे

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ये औरतों को घर पर बुलाने का ये विज्ञापन समाज के उस तबके की सोच को दर्शातें है जो औरतों को महज पैरों की जूती समझते है.

घरेलू हिंसा वाली कॉफी

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ये विज्ञापन किसी प्रोडक्ट के लिए कम और हिंसा का प्रचार करने के लिए ज्यादा लग रहा है. ये विज्ञापन कॉफी  के लिए बनाया गया था जिसमें कहा गया कि अगर फ्रेश कॉफी न होने से आपका पति आपको मारता है तो आप बिना किसी चिंता के ये कॉफी इस्तेमाल कर सकती हैं क्योंकि ये कॉफी फ्रेश है.

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