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ये हैं दुनिया के 10 फालतू बचकाने अविष्कार, देखें तस्वीरें

फ़ोटो | FP Staff | Aug 11, 2017 07:40 PM IST
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दुनिया के 10 ऐसे आविष्कार जो बेहद बचकाने और हास्यास्पद थे

दुनिया के 10 ऐसे आविष्कार जो बेहद बचकाने और हास्यास्पद थे

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बिल्ली की आवाज निकालने वाली मशीन सबसे घटिया आविष्कारों में गिनी जाती है. ये मशीन 1 मिनट में 10 बार म्याऊं की आवाज निकालने के साथ ही गर बार अपनी आंख चमकाती थी,

बिल्ली की आवाज निकालने वाली मशीन सबसे घटिया आविष्कारों में गिनी जाती है. ये मशीन 1 मिनट में 10 बार म्याऊं की आवाज निकालने के साथ ही गर बार अपनी आंख चमकाती थी,

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बेबी होल्डर (1937): हॉकी खिलाड़ी जैक माइफोर्ड ने इसका आविष्कार किया, ताकि वो जब अपनी पत्नी के साथ बर्फ पर घूम रहे हों, तो उनका बच्चा भी बर्फ का मजा ले सके. है न हास्यास्पद?

बेबी होल्डर (1937): हॉकी खिलाड़ी जैक माइफोर्ड ने इसका आविष्कार किया, ताकि वो जब अपनी पत्नी के साथ बर्फ पर घूम रहे हों, तो उनका बच्चा भी बर्फ का मजा ले सके. है न हास्यास्पद?

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घुमावदार नाल वाली मशीनगन (1953): एम3 श्रेणी की इस सब-मशीन गन में घुमावदार नाल लगी थी, जो चारो तरफ गोलियां दागती थी. गजब के आविष्कारक की खोज थी ये.

घुमावदार नाल वाली मशीनगन (1953): एम3 श्रेणी की इस सब-मशीन गन में घुमावदार नाल लगी थी, जो चारो तरफ गोलियां दागती थी. गजब के आविष्कारक की खोज थी ये.

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सिगरेट पैक होल्डर (1955): एक साथ पूरे 10 सिगरेट इस मशीन में फंसाकर पी जाती थी. और इस तरह की 50 मशीनें 1955 में बनाई गई थी.

सिगरेट पैक होल्डर (1955): एक साथ पूरे 10 सिगरेट इस मशीन में फंसाकर पी जाती थी. और इस तरह की 50 मशीनें 1955 में बनाई गई थी.

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लाइट वाले टायर (1961): इसे गुडईयर टायर कंपनी ने बनाया था. ये सिंथेटिक रबर से बना था, जो रात में चमकता था. इसके रिमों में बल्ब फिट किए गए थे, बाद में इसे बेहूदी कोशिश करार दिया गया.

लाइट वाले टायर (1961): इसे गुडईयर टायर कंपनी ने बनाया था. ये सिंथेटिक रबर से बना था, जो रात में चमकता था. इसके रिमों में बल्ब फिट किए गए थे, बाद में इसे बेहूदी कोशिश करार दिया गया.

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कुत्ते को जकड़ने वाली मशीन (1940): ये उन अमीरजादों के लिए बनी थी, जो कुत्ते जैसे प्यारे जानवर पालना तो चाहते थे, पर गंदगी की वजह से छूना नहीं चाहते थे. ये वाकई काफी तकलीफदेह आविष्कार था.

कुत्ते को जकड़ने वाली मशीन (1940): ये उन अमीरजादों के लिए बनी थी, जो कुत्ते जैसे प्यारे जानवर पालना तो चाहते थे, पर गंदगी की वजह से छूना नहीं चाहते थे. ये वाकई काफी तकलीफदेह आविष्कार था.

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शॉवरहुड (1970): ये बेहूदा आविष्कार उन लोगों के लिए था, जो मेकअप के बाद भी नहाना चाहते थे. इसे पहनने की वजह से चेहरे और सिर पर पानी नहीं पड़ता था. पूरा शरीर भीगने के बाद भी.

शॉवरहुड (1970): ये बेहूदा आविष्कार उन लोगों के लिए था, जो मेकअप के बाद भी नहाना चाहते थे. इसे पहनने की वजह से चेहरे और सिर पर पानी नहीं पड़ता था. पूरा शरीर भीगने के बाद भी.

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नेत्रहीनों के लिए चश्मा (1950): 50 के दशक में इस चश्मे को बनाया गया था, जिसमें शीशे की जगह प्लास्टिक की पट्टियां लगी थी, जो आंख तक धूल, रोशनी, हवा आने देती थी, पर इसके अलावा इसका कोई प्रयोग नहीं.

नेत्रहीनों के लिए चश्मा (1950): 50 के दशक में इस चश्मे को बनाया गया था, जिसमें शीशे की जगह प्लास्टिक की पट्टियां लगी थी, जो आंख तक धूल, रोशनी, हवा आने देती थी, पर इसके अलावा इसका कोई प्रयोग नहीं.

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बच्चे का बाड़ा (1930): इसमें बच्चे को तैयार करके लोहे के पिंजरे में छोड़ दिया जाता. वो लाख कोशिश करके भी बाहर नहीं निकल सकता था. अमेरिका मे ये खोज कामकाजी जोड़ों के लिए की गई थी.

बच्चे का बाड़ा (1930): इसमें बच्चे को तैयार करके लोहे के पिंजरे में छोड़ दिया जाता. वो लाख कोशिश करके भी बाहर नहीं निकल सकता था. अमेरिका मे ये खोज कामकाजी जोड़ों के लिए की गई थी.

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