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जन्मदिन विशेष: इश्क ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया

फ़ोटो | FP Staff | Dec 27, 2017 08:24 AM IST
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तेरे वादे पर जिये हम, तो यह जान, झूठ जाना, कि ख़ुशी से मर न जाते, अगर एतबार होता.

तेरे वादे पर जिये हम, तो यह जान, झूठ जाना, कि ख़ुशी से मर न जाते, अगर एतबार होता.

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रेख़्ते के तुम्हीं उस्ताद नहीं हो 'ग़ालिब' कहते हैं अगले ज़माने में कोई 'मीर' भी था.

रेख़्ते के तुम्हीं उस्ताद नहीं हो 'ग़ालिब' कहते हैं अगले ज़माने में कोई 'मीर' भी था.

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उन के देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक़ वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है.

उन के देखे से जो आ जाती है मुंह पर रौनक़ वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है.

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मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी 4

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी 4

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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है.

हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है.

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'ग़ालिब'-ए-ख़स्ता के बग़ैर कौन-से काम बन्द हैं रोइए ज़ार-ज़ार क्या, कीजिए हाय-हाय क्यों.

'ग़ालिब'-ए-ख़स्ता के बग़ैर कौन-से काम बन्द हैं रोइए ज़ार-ज़ार क्या, कीजिए हाय-हाय क्यों.

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जाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठकर या वो जगह बता जहां खुदा न हो.

जाहिद शराब पीने दे मस्जिद में बैठकर या वो जगह बता जहां खुदा न हो.

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बस-कि दुश्वार है हर काम का आसां होना आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसां होना

बस-कि दुश्वार है हर काम का आसां होना आदमी को भी मयस्सर नहीं इंसां होना

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इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया वर्ना हम भी आदमी थे काम के

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