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तो क्या अप्रैल से मोबाइल की तरह रिचार्ज होगा बिजली का बिल!

30 दिनों के लिए अनिवार्य भुगतान के बजाय, अब उपभोक्ता उन दिनों या घंटों के लिए भुगतान कर सकते हैं जिनका वे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार खपत करना चाहते हैं'

Updated On: Dec 24, 2018 05:08 PM IST

FP Staff

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तो क्या अप्रैल से मोबाइल की तरह रिचार्ज होगा बिजली का बिल!

बढ़े हुए बिजली के बिलों की बढ़ती शिकायतों का हल निकालने के प्रयास में, ऊर्जा मंत्रालय 1 अप्रैल, 2019 से सभी राज्यों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य करने की योजना बना रहा है. केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री आर के सिंह ने कहा है कि इस कदम से बिजली चोरी रुकेगी और गरीबों को राहत भी मिलेगी.

सिंह ने कहा, 'हम नेट मीटरिंग पर जोर दे रहे हैं. अधिकांश DISCOM (बिजली वितरण कंपनियां) को इसे आउटसोर्स करना पड़ा है. लेकिन उपभोक्ताओं ने बढ़े हुए बिजली के बिल के बारे में शिकायतें की हैं. इस वजह से, हम 1 अप्रैल, 2019 से सभी राज्यों को स्मार्ट प्रीपेड मीटर में शिफ्ट करना अनिवार्य कर देंगे.' यह कदम मोबाइल फोन की तरह प्रीपेड बिजली रिचार्ज कार्ड पेश करेगा.

इसके उपयोग से होगी बचत

स्मार्ट मीटर एडवांस मीटरिंग के बुनियादी ढांचे के समाधान का एक हिस्सा हैं. जो दिन के अलग-अलग समय पर बिजली के उपयोग को मापता है और इस जानकारी को एनर्जी सप्लायर को भेजता है. यह उपभोक्ताओं को बेहतर सूचना प्रदान करता है और उन्हें अपने घरों में बिजली के उपयोग पर अधिक निर्णय लेने की अनुमति देता है. जिससे बिजली की बर्बादी कम होती है, और दीर्घकालिक कार्बन और वित्तीय बचत होती है.

इस प्रक्रिया में समस्याओं के बारे में बात करते हुए मंत्री ने कहा, 'लेकिन यहां टेकनोलॉजी की समस्या है. मीटर ही उपलब्ध नहीं हैं. हालांकि, हम इसे आगे बढ़ा रहे हैं. हमने 2.26 करोड़ नए उपभोक्ता जोड़े हैं. यह एक रिकॉर्ड है. यह तथ्य है कि हमने बहुत सारे उपभोक्ताओं को जोड़ा है, इसी के चलते बिलिंग और कलेक्शन मुश्किल हो गया है.' स्मार्ट मीटर इंस्टाल किए जाने के बाद पूरी बिलिंग और कलेक्शन की प्रक्रिया स्वचालित हो जाएगी.

बिलकुल एक मोबाइल के लिए प्रीपेड सिम कनेक्शन की तरह

उन्होंने कहा, 'DISCOM को फायदा होगा क्योंकि उन्हें एडवांस में भुगतान मिलेगा. यह बिलकुल एक मोबाइल के लिए प्रीपेड सिम कनेक्शन की तरह है, जिसे रिचार्ज किया जा सकता है और दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. उसी तरह बिजली का उपयोग किया जाएगा. इससे गरीब उपभोक्ताओं को मदद मिलेगी. 30 दिनों के लिए अनिवार्य भुगतान के बजाय, वे अब उन दिनों या घंटों के लिए भुगतान कर सकते हैं जिनका वे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार खपत करना चाहते हैं.'

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