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संगीत सोम जैसों के लिए कड़ा संदेश है योगी आदित्यनाथ का आगरा दौरा

योगी ने अपने आगरा दौरे से पार्टी के उन नेताओं को मैसेज दिया है जो अनाप-शनाप बयान देकर कंट्रोवर्सी करते रहते हैं.

Sanjay Singh Updated On: Oct 27, 2017 02:15 PM IST

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संगीत सोम जैसों के लिए कड़ा संदेश है योगी आदित्यनाथ का आगरा दौरा

आगरा में ताजमहल के परिसर के नजदीक पार्किंग एरिया में हाथों में सफाई वाले दस्ताने पहने, मुंह पर मास्क लगाए और हाथ में झाड़ू लेकर सफाई करते यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लाइव विजुअल्स देखकर मेरे एक सहयोगी ने कहा, ‘योगी अपना गेम हार गए हैं. इमेज मेकओवर की कोशिश में उन्होंने खुद को खत्म कर दिया है.’

लेकिन, कई बार तात्कालिक टिप्पणियां गुमराह करने वाली और गलत साबित होती हैं.

योगी का ताजमहल के बाहरी इलाके की सफाई करने के लिए झाड़ू उठाना स्वच्छ भारत अभियान का हिस्सा था. उनका देश के सबसे खूबसूरत मकबरे का दौरा करना, भारतीय और विदेशी सैलानियों के साथ सेफ्टी खिंचाना, शाहजहां की कब्र पर कुछ वक्त बिताना और फिर अफसरों के साथ मीटिंग कर प्रोजेक्ट्स की समीक्षा करना यूपी के सीएम के तौर पर उनका कार्य था. याद रखिए सरकार ताज और इसके आसपास के इलाकों के विकास पर 157 करोड़ रुपए खर्च कर रही है.

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लेकिन, योगी के ताजमहल के दौरे का मतलब देश के सबसे पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट की सैर करने से कहीं ज्यादा है. हकीकत यह है कि उनकी ही पार्टी के एमएलए संगीत सोम के ताज को ‘गद्दारों द्वारा बनाया गया और भारतीय संस्कृति पर धब्बा’ और ‘इतिहास को दोबारा लिखने’ का बयान देने के 10 के भीतर ही उन्होंने यहां का दौरा किया है.

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इससे साफ संकेत मिल रहा है कि योगी सभी संबंधित लोगों को यह कड़ा संदेश देना चाहते हैं कि एक मुख्यमंत्री के तौर पर वह इस तरह के तत्वों के जाहिर किए गए मत से सहमत नहीं हैं. उन्होंने यह भी दोहराया कि ताजमहल भारत का गर्व है. इसे भारतीयों ने अपने खून और पसीने से बनाया है. इससे भी बड़ा तथ्य यह है कि वह हिंदुत्व ब्रिगेड के भीतर ताज को लेकर जारी डिबेट को हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं. संगीत सोम और विनय कटियार जैसों को उनकी राय से संकेत लेना चाहिए.

देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य के मुख्यमंत्री को पता है कि वह लगातार निगरानी में हैं. वह विवादित मसलों पर जो कदम उठाते हैं या नहीं उठाते हैं, उनके बयान और राज्य में घटने वाली कोई भी घटना या हिंदुत्व के तत्वों से संबंधित लोगों के कार्यकलाप और उन पर उनकी प्रतिक्रिया पर उनके राजनीतिक प्रतिस्पर्धियों, सेकुलर-लिबरल्स, उनके खुद के सपोर्टर्स, मीडिया और पार्टी लीडरशिप की गहरी नजर है.

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यह योगी के लिए चुनौती भी है और मौका भी. यह इस चीज पर निर्भर करता है कि वह इन मसलों को कैसे हैंडल करते हैं.

योगी के लिए ताज का दौरा अपने संदेश को देने के लिए काफी नहीं था. ताज के दौरे के घंटों बाद योगी जीआईसी ग्राउंड पहुंचे और एक पब्लिक रैली को संबोधित किया. इसमें उन्होंने राज्य के उठाए जा रहे कल्याणकारी कदमों और विकासात्मक कार्यों का उल्लेख किया. उन्होंने ताज के अपने दौरे, ताज के बारे में और लोगों के बड़े तबके, किसानों और इस इलाके में रह रहे अन्य लोगों, उनके मसलों और चिंताओं के बारे में अपनी सोच भी बताई.

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वह भगवा कपड़े पहनते हैं, गोरखनाथ के महंत हैं, लेकिन वह चीफ मिनिस्टर भी हैं और आगरा में उनका दिया गया संदेश यह था कि उन्हें किसी भी सूरत में सांप्रदायिक नहीं माना जाना चाहिए. उनके आंख और कान खुले हुए हैं और वह एक प्रशासक के नजरिए से मसलों को देखते हैं, न कि हिंदू युवा वाहिनी के नेता के तौर पर. मुख्यमंत्री बनने से पहले वह हिंदू युवा वाहिनी के मुखिया थे.

वह चाहते हैं कि सभी यह समझ जाएं कि वह अपने दिमाग की बोलने में डरते नहीं हैं. पिछले हफ्ते, दिवाली पर वह अयोध्या और चित्रकूट थे. अयोध्या का उनका दौरा और प्रोग्राम यह बताने के लिए था कि दुनिया इस जगह के बारे में अच्छा महसूस करे. उन्होंने पूरे शहर और घाटों को जगमग किया, राम के साथ अपने जुड़ाव का जिक्र किया और इस जगह की भव्यता को लौटाने की जरूरत बताई और अयोध्या को देश के टूरिज्म के नक्शे पर आगे लाने की बात की.

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वह जानते हैं कि रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है और निकट भविष्य में एक भव्य राम मंदिर बनने की कोई उम्मीद भी नहीं है. अपने तरीके से उन्होंने राम मंदिर मसले को लेकर गंभीरता जाहिर करने की कोशिश की (हालांकि, उन्होंने इस बारे में एक शब्द भी नहीं कहा), उन्होंने अयोध्या का और एक वैकल्पिक स्ट्रक्चर बनाने और कार्यक्रमों की बात की, जिसका साफ मतलब था कि अयोध्या केंद्र और राज्य में बीजेपी सरकारों की प्राथमिकता में है.

अयोध्या में सरयू नदी के तट पर लोगों ने दिए जलाए. (पीटीआई)

आगरा में उन्होंने अपने आलोचकों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘जब मैं अयोध्या जाता हूं तो उन्हें दिक्कत है, अब जब मैं आगरा आया हूं तो उन्हें तकलीफ हो रही है.’ अपनी स्पीच में उन्होंने इस बात का दो बार जिक्र करते हुए पूछा कि किसी को भी उनके अयोध्या, मथुरा, चित्रकूट और आगरा के दौरों से कोई दिक्कत क्यों होनी चाहिए. उनका तर्क था कि ये स्थान राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े हुए हैं और इस तरह के सभी स्थलों को विकसित किया जाना चाहिए.

आश्चर्यजनक तौर पर योगी बीजेपी के ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने पद पर रहते हुए ताजमहल का दौरा किया है. योगी सरकार ने 2018 के कैलेंडर तीन महीने पहले ही छपवा लिए हैं. यह नहीं कहा जा सकता है कि क्या सरकार वास्तव में इस मामले में सबसे आगे रहना चाहिए या यह इस जरिए से कोई संदेश देना चाहती है. लेकिन, इसकी टाइमिंग, मुख्यमंत्री के अयोध्या और आगरा के दौरे, राज्य टूरिज्म डिपार्टमेंट के ताज को अपनी बुकलेट से बाहर करने और संगीत सोम के बयान से पैदा हुए विवाद को देखते हुए यह तय है कि यह कैलेंडर निश्चित तौर पर दिए जाने वाले संदेशों से भरा है.

अगर फरवरी के पन्ने पर अयोध्या है, जून के पन्ने पर वाराणसी का सारनाथ स्तूप है, तो जुलाई के पन्ने पर आगरा है. इसके बाद इसमें ललितपुर का जैन मंदिर, पीलीभीत का गुरुद्वारा नानकमत्ता और अन्य चीजें हैं.

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