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भड़काउ भाषण मामले में बालियान, प्राची के खिलाफ केस वापस लेगी योगी सरकार

साल 2013 में मुजफ्फरनगर और इसके आस-पास के जिलों में दंगों के दौरान कम से कम 60 लोगों की मौत हुई थी

FP Staff Updated On: Apr 26, 2018 01:48 PM IST

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भड़काउ भाषण मामले में बालियान, प्राची के खिलाफ केस वापस लेगी योगी सरकार

यूपी की योगी सरकार ने भड़काउ बयान देने के मामले में साध्वी प्राची और संजीव बालियान के खिलाफ केस वापस लेने का फैसला किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट बताती है कि मुजफ्फरनगर दंगे के 131 मामले (जिनमें 13 हत्या के मामले हैं) वापस लेने के बाद यूपी सरकार साध्वी प्राची और बीजेपी सांसद संजीव बालियान पर चल रहे केस वापस लेने का फैसला किया है. ये मामले भड़काउ बयान देने से जुड़े हैं.

इन बयानों में 2 मामले मुजफ्फरनगर की महापंचायत से जुड़े हुए हैं. इसके ठीक बाद 2014 में हिंसा भड़क उठी थी. साध्वी प्राची, बीजेपी के विधायक उमेश मलिक, संगीत सोम और सुरेश राणा पर भी महापंचायतों से जुड़ने के आरोप हैं. इन नेताओं में सुरेश राणा यूपी सरकार के मंत्री रहे हैं. साथ ही मालिक मुजफ्फरनगर के बुधाना से विधायक थे, वहीं राणा शामली की थाना भवन सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे और सोम मेरठ की सरधान सीट का.

दूसरी ओर, अभी हाल में मुजफ्फरनगर की एक अदालत ने 2013 के मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक दंगों से जुड़े एक मामले में संजीव बालियान और अन्य के खिलाफ आरोप तय करने के लिए 29 मई की तारीख तय की क्योंकि सभी आरोपी कोर्ट में हाजिर नहीं थे.

बालियान और सहआरोपी बीजेपी विधायक उमेश मलिक अदालत में मौजूद थे लेकिन साध्वी प्राची पेश नहीं हुईं जिसके बाद अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रितु नागर ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए 29 मई की तारीख तय की.

आरोपियों पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने और गलत तरीके से रोकने सहित भारतीय दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं के तहत आरोप हैं. आरोप यह है कि आरोपियों ने अगस्त 2013 के अंतिम हफ्ते में एक महापंचायत में भाग लिया और अपने भाषणों के जरिये हिंसा को उकसाया.

साल 2013 में मुजफ्फरनगर और इसके आस-पास के जिलों में दंगों के दौरान कम से कम 60 लोगों की मौत हुई थी जबकि 40 हजार से अधिक लोग बेघर हुए थे.

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