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स्वराज अभियान किसानों के लिए पेश करेगा बजट

सरकार पर प्रेशर बनाने के लिए बजट से दो दिन पहले योगेंद्र यादव पेश करेंगे किसान बजट

Updated On: Jan 25, 2017 06:51 PM IST

Debobrat Ghose Debobrat Ghose
चीफ रिपोर्टर, फ़र्स्टपोस्ट

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स्वराज अभियान किसानों के लिए पेश करेगा बजट

देश में किसानों की हालत पर सरकार का ध्यान खींचने और कृषि सेक्टर में सुधार लाने के लिए योगेंद्र यादव और उनका जय किसान आंदोलन 30 जनवरी को एक वैकल्पिक बजट पेश करेंगे.

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इस बजट का नाम किसान बजट होगा. जय किसान आंदोलन स्वराज अभियान का एक हिस्सा है.

योगेंद्र यादव का यह किसान बजट केंद्र सरकार के 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले आम बजट से दो दिन पहले आएगा.

सरकार पर प्रेशर बढ़ाने की कोशिश  

अपनी तरह के पहले इस किसान बजट या एग्रीकल्चर बजट का ऐलान किसान संसद में किया जाएगा.

किसान संसद एक पब्लिक प्लेटफॉर्म है जिसमें कई राज्यों के किसान शामिल होंगे. इस बजट के जरिए कृषि नीति, किसानों की आमदनी, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और नोटबंदी के असर को कम करने के उपायों का ऐलान किया जाएगा.

इस तरह से सरकार पर प्रेशर बनाने की भी कोशिश की जाएगी.

आम बजट के दिन वित्त मंत्री अरुण जेटली संसद में अपनी बजट स्पीच पढ़ेंगे.

इस दिन योगेंद्र यादव का ग्रुप जेटली के बजट में किए जाने वाले ऐलानों का विश्लेषण करेगा.

यह समूह देखेगा कि जेटली कृषि सेक्टर और इससे जुड़े हुए क्षेत्रों के लिए क्या कदम उठाते हैं.

जंतरमंतर पर होगी समीक्षा

यह समूह नई दिल्ली के जंतरमंतर पर बैठकर इस पूरे बजट की गहराई से समीक्षा करेगा.

अपने विश्लेषण के आधार पर यह समूह एक कॉन्सेप्ट नोट सरकार को सौंपेगा.

नई बनी राजनीतिक पार्टी स्वराज इंडिया के प्रेसिडेंट योगेंद्र यादव ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया, ‘अगर सीआईआई जैसे औद्योगिक संगठन वित्त मंत्री बजट पेश किए जाते वक्त इस पर चर्चा कर सकते हैं और इसका विश्लेषण कर सकते हैं तो किसान क्यों साथ बैठकर इस पर चर्चा नहीं कर सकते?

उन्होंने कहा, 'आम बजट के दिन कृषि विशेषज्ञों और किसानों के साथ बैठकर ऐसा करने जा रहे हैं. हम बजट के पेश किए जाने के दौरान इस पर प्रतिक्रिया भी देंगे.’

किसान बजट को पहली बार 2016 में एक पायल प्रोजेक्ट के तौर पर जय किसान आंदोलन ने उठाया था.

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जय किसान आंदोलन इस बार किसानों के लिए न्यूनतम आमदनी गारंटी, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को तर्कसंगत स्तर पर लाए जाने, प्राकृतिक आपदाओं में किसानों को मुआवजा देने और इसके अलावा नोटबंदी से किसानों को हुए नुकसान को कम करने के उपायों पर जोर देगा.

जय किसान आंदोलन के सह-संयोजक अविक साहा ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया, ‘सरकारी सर्वे बताते हैं कि एक किसान की औसत आमदनी 2,400 रुपये प्रतिमाह है, जो कि बेहद निराशाजनक है.'

उन्होंने कहा, 'परिवार कैसे इतनी कम आमदनी में अपने परिवार का पेट पाल सकता है. सरकार को कम से कम न्यूनतम कमाई गारंटी देनी चाहिए. यह 18,000 रुपये प्रतिमाह होनी चाहिए.’

यह भी पढ़ें बजट 2017: तंबाकू पर भारी टैक्स, किसानों के लिए 'हानिकारक' 

क्या है जय किसान आंदोलन

जय किसान आंदोलन एक पब्लिक मूवमेंट है जो कि भारत में किसानों के हक के लिए काम कर रहा है.

इसकी अगुवाई योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण की अगुवाई वाला स्वराज अभियान कर रहा है.

इसका मकसद किसानों की दुर्दशा को सामने लाना है. कृषि सेक्टर से जुड़ी हुई नीतियों की खामियों के चलते यह सेक्टर गंभीर संकट से गुजर रहा है.

साहा जो कि स्वराज अभियान के वाइस प्रेसिडेंट भी हैं, उन्होंने बताया, ‘हम कर्ज माफी की वकालत नहीं करते. लेकिन हम चाहते हैं कि सरकार एमएसपी पर पर्याप्त जोर दे, ताकि किसानों को फायदा हो सके.'

उन्होंने कहा, 'किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से भी जूझना पड़ता है. सरकार को एक कसी हुई प्राकृतिक आपदा नीति लागू करनी चाहिए ताकि किसान बुरे हालात का सामना कर सकें और उससे सफलतापूर्वक बाहर आ सकें.’

निश्चित तौर पर नोटबंदी इस पूरे आम बजट में सबसे प्रभावी होगा. इकनॉमी का कोई सेक्टर ऐसा नहीं है जो कि नोटबंदी के बुरे असर से अछूता रहा हो.

नोटबंदी का मुद्दा भी रहेगा अहम 

किसान बजट में भी सबसे अहम मुद्दा नोटबंदी का किसानों पर असर रहेगा.

यादव ने कहा, ‘हम पूरे मन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उठाए गए नोटबंदी के कदम के साथ हैं. लेकिन इसका असर बेहद खराब रहा है. किसानों और सब्जियां, फल और दूसरे सामान बेचने वालों पर इसकी गहरी चोट हुई है.'

उनहोंने कहा, 'दो साल बाद किसानों को बढ़िया फसल मिली थी, लेकिन नकदी की कमी के चलते उन्हें इसका कोई फायदा नहीं मिल सका. किसान बजट में इन्हीं मसलों पर विचार-विमर्श किया जाएगा.’

योगेंद्र यादव एक मशहूर दर्शनशास्त्री, राजनीतिक विश्लेषक और जय किसान आंदोलन के संयोजक हैं.

अपने वैकल्पिक बजट के जरिए यादव और उनकी टीम आम जनता में राय तैयार करना चाहती है और किसानों की चिंताओं के बारे में एक प्रेशर सरकार पर बनाना चाहती है.

स्वराज अभियान के एक सदस्य ने कहा, ‘बजट एक प्रस्ताव होता है, जिस पर पास होने से पहले संसद में बहस होती है. हम अपनी समीक्षा को सरकार को सौंपेंगे, ताकि वे बजट के बाद इसमें जरूरी बदलाव कर सकें.’

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