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अलविदा 2017: साल के 5 बड़े विवाद जो इतिहास में दर्ज हो गए

2017 का साल वैसे तो राजनीतिक और सामाजिक हलचलों से खूब भरा रहा. कई बेहद खुशगवार खबरें आईं तो कुछ गमगीन कर देने वाली भी लेकिन कुछ विवाद ऐसे हुए जिन्हें सालों तक याद रख जाएगा

Updated On: Dec 27, 2017 08:23 AM IST

FP Staff

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अलविदा 2017: साल के 5 बड़े विवाद जो इतिहास में दर्ज हो गए

2017 का साल वैसे तो राजनीतिक और सामाजिक हलचलों से खूब भरा रहा. कई बेहतरीन खबरें आईं तो कुछ गमगीन कर देने वाली भी लेकिन कुछ विवाद ऐसे हुए जिन्हें सालों तक याद रख जाएगा. ऐसे ही कुछ विवादों के बारे में पढ़िए...

1-गुरमीत रामरहीम सिंह

डेरा सच्चा प्रमुख गुरमीत सौदा गुरमीत राम-रहीम सिंह को रेप केस में सीबीआई कोर्ट से सजा मिलने के बाद से चंडीगढ़ में हिंसा शुरू हो गई. तकरीबन पखवाड़े भर तक चले इस विवाद में 38 लोगों की जान चली गई है और सौ से ऊपर घायल हुए थे. हिंसा भड़कने के तुरंत बाद पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा कि जितना भी नुकसान हुआ है उसकी भरपाई राम रहीम की संपत्ति बेचकर की जाएगी.

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मामले में मीडियाकर्मियों पर हमले के बाद स्थिति और भी गंभीर हो गई थी. स्थिति ये बनी कि तकरीबन पंद्रह दिनों तक पूरे देश में यह मामला छाया रहा. जो गुरमीत राम रहीम सिंह डेरा सच्चा सौदा के लिए लोगों के बीच जाने जाते थे उनकी छवि लंबे समय के लोगों के दिमाग में नकारात्मक रूप में अंकित हो गई.

2- मंदसौर किसान आंदोलन

मध्यप्रदेश राज्य के मंदसौर में किसानों के प्रदर्शन के बाद पुलिस की गोली से किसानों के मारे जाने की खबर फैलते ही ये आंदोलन अपने उग्र रूप में फैल गया. विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने इसे राज्यभर में मुद्दा बनाया. इस विवाद की आग दिल्ली भी पहुंची.

दिल्ली के जंतर-मंतर भी इसके विरोध में प्रदर्शन हुए. तकरीबन दशक भर से राज्य के सीएम पद की कुर्सी पर बैठे शिवराज सिंह चौहान को भी मीडिया को जवाब देते भारी पड़ रहा था. उन्होंने कई मीडिया साक्षात्कारों के दौरान खुद को सबसे बड़ा किसान हितैषी बताकर पूरे विवाद के पीछे कांग्रेस को जिम्मेदार ठहाराया था.

3- ट्रिपल तलाक असंवैधानिक

तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद कई मुस्लिम संगठनों और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने विरोध दर्ज कराया. लेकिन महिला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने इसका स्वागत किया था. भारतीय मुस्लिम समाज के एक बड़े तबके की ओर से इसे इस्लामिक पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप के तौर पर देखा गया. केंद्र में सत्तारूढ़ दल बीजेपी की तरफ से इस फैसले का स्वागत किया गया था और इसे देश में करोड़ों की आबादी में मौजूद मुस्लिम महिलाओं की हक की लड़ाई में जीत बताया था. कई प्रगतिशील संगठनों ने इसे मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी के लिए क्रांतिकारी फैसला बताया था. 4- पैराडाइज पेपर्स

पिछले साल हुए पनामा पेपर लीक के बाद इस साल एक बार फिर पैराडाइज पेपर्स के खुलासे ने देश में कई नामी हस्तियों पर उंगलियां उठा दी थीं. देशभर के कई बड़े नाम होने के वजह के इस खुलासे को लेकर काफी ज्यादा मीडिया की सुर्खियां मिली थीं. भारत में इन दस्तावेजों का खुलासा अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने किया था.

5- पद्मावती विवाद

मशहूर फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म में एक सीन को लेकर उठा विवाद इतना बढ़ा कि फिल्म की रिलीज डेट ही टालनी पड़ी. बढ़ते विरोध के बीच राजस्थान के नाहरगढ़ किले में मिली युवकी की लाश ने मामले को और भी पेचीदा बना दिया था. कई राज्यों में फिल्म के जबरदस्त विरोध के बीच राजनीतिक बयानबाजियों ने भी विवाद को तूल देने में बड़ी भूमिका अदा की है.

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विरोध के बढ़ते स्वरों को देखते हुए फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली ने एक वीडियो भी जारी किया था जिसमें उन्होंने साफ किया था कि फिल्म में रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच कोई ड्रीम सीक्वेंस नहीं फिलमाया गया है.

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