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अलविदा 2018: ये रेजोल्यूशन करते तो सब हैं लेकिन निभाता कोई नहीं

आज हम कुछ ऐसे ही रेजोल्यूशन के बारे में बता रहे हैं..जो करते तो सब हैं लेकिन निभाता कोई नहीं...

Updated On: Dec 27, 2018 07:59 PM IST

Aditi Sharma

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अलविदा 2018: ये रेजोल्यूशन करते तो सब हैं लेकिन निभाता कोई नहीं

नया साल शुरू होने वाला है. हर साल की तरह इस बार भी आप कोई ना कोई रेजॉल्यूशन लेने की सोच रहे होंगे. आप जब अपने पुराने रेजॉल्यूशन को याद करेंगे तो पता चलेगा कि हर साल हम रेजोल्यूशन करते तो हैं लेकिन उसे पूरा नहीं कर पाते हैं. आज हम कुछ ऐसे ही रेजोल्यूशन के बारे में बता रहे हैं..जो करते तो सब हैं लेकिन निभाता कोई नहीं...

फिट रहने का वादा

अच्छी और फिट बॉडी किसे अच्छी नहीं लगती. लेकिन फिट रहना उतना आसान नहीं है. चाट-पकौड़ी का स्वाद तो खूब भाता है लेकिन बात जब फैट घटाने की हो तो वो वादा ही रह जाता है. हर साल न जाने कितने लोग जिम जाने, फिट रहने का वादा करते हैं लेकिन अगले साल तोड़ने के लिए.

 

सुबह-सबेरे का इरादा

नया साल. नया वादा और इरादा. ऐसा ही एक रेजोल्यूशन होता सुबह जागने का. वक्त पर सोना, वक्त पर जागना...लेकिन हाय राम! ये साल की शुरुआत जनवरी से क्यों होती है जब सर्दियां पड़ती हैं. यह रेजॉल्यूशन को महीना भर भी नहीं टिक पाता. ऊपर से ये वेब सिरीज जो रात भर सोने नहीं देते. अब भला सुबह जागने का वादा कैसे पूरा हो.

फिजूलखर्ची...तौबा-तौबा!

नौकरी पाना सपना होता है. और जैसे ही नौकरी मिलती रोज-रोज ऑफिस जाने का सिलसिला शुरू होता है. नई नौकरी, भरी जेब..दोस्त यारों पर जमकर खर्च करने का ये सबसे सही दौर होता है. महीने की शुरुआत तो अच्छी बीतती है लेकिन अंत ठन-ठन गोपाल होता है. ऐसे में हर साल कई लोग रेजॉल्यूशन लेते हैं कि इस साल बचत करेंगे. एक महीना..दो महीना...जैसे-जैसे वक्त बीतता है खर्च करने की आदत फिर पुरानी पटरी पर आ जाती है.

लेट नहीं होना है

ऐसे न जाने कितने लोग होंगे जो यह हर साल बॉस की डांट खाने के बाद खुद से यह वादा करते होंगे कि अब ऑफिस टाइम पर जाऊंगा. कोशिश भी वो खूब करते हैं लेकिन यह आदत है कि जाती नहीं. जनवरी के 10-15 दिन तो टाइम पर पहुंच जाते हैं लोग लेकिन आगे की डगर मुश्किल हो जाती है.

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