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योगी के भड़काऊ भाषण की सुनवाई मामले में रिपोर्टिंग पर HC की रोक

एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कहा कि कई बार बिना तथ्यों के रिपोर्टिंग की जाती है. मुख्यमंत्री योगी मुख्य आरोपी हैं, अगर ऐसा हुआ तो राज्य की छवि को नुकसान पहुंच सकता है

Updated On: Nov 25, 2017 11:40 AM IST

FP Staff

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योगी के भड़काऊ भाषण की सुनवाई मामले में रिपोर्टिंग पर HC की रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भड़काऊ भाषण मामले की सुनवाई चल रही है. कोर्ट ने इसकी मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगा दी है. यह मामला वर्ष 2008 में गोरखपुर में दिए भड़काऊ भाषण का है.

हाईकोर्ट का कहना है कि गलत रिपोर्टिंग से प्रदेश की छवि खराब हो सकती है. इस संबंध में 7 नवंबर को हाईकोर्ट के दो जजों जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस अखिलेश चंद्र के बेंच ने इसपर फैसला सुनाया था.

राज्य सरकार के अनुरोध के बाद कोर्ट ने दिया फैसला 

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने कहा कि कई बार गलत रिपोर्टिंग की जाती है. बिना तथ्यों के खबरें की जाती है. चूंकी मुख्यमंत्री योगी मुख्य आरोपी हैं, अगर ऐसा हुआ तो राज्य की छवि को नुकसान पहुंच सकता है.

मनीष गोयल में पूर्व में छपी तथ्यहीन खबरों की तरफ अदालत का ध्यान दिलाया. इसके बाद कोर्ट का कहना था कि पूरे मामले में जब तक फैसला नहीं आ जाता, मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगी रहेगी.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इलाहाबाद के स्थानीय अखबारों और राष्ट्रीय अखबार इस मामले में तथ्यहीन रिपोर्टिंग करते रहे हैं. यही वजह है कि कोर्ट का ध्यान इस ओर दिलाया गया है.

गोरखरपुर दंगों के खिलाफ यह याचिका गोरखपुर निवासी परवेज परवाज और असद हयात की ओर से दायर की गई है. परवाज इस दंगे के बाद गोरखपुर में दर्ज कराई गई एफआईआर में शिकायतकर्ता हैं, जबकि हयात गवाहों में से एक हैं.

इसी साल मार्च में प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से पांच बार सांसद रहे हैं. एफआईआर में उन्हें गोरखपुर की तत्कालीन मेयर रहीं अंजू चौधरी और स्थानीय विधायक रहे राधा मोहनदास अग्रवाल के साथ नामजद किया गया है.

क्या है यह मामला? 

जनवरी, 2007 में गोरखपुर में दो समुदायों के बीच दंगा भड़क उठा था. जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे. पुलिस के मुताबिक यह विवाद मुहर्रम पर ताजिए के जुलूस के रास्ते को लेकर शुरु हुआ था.

इस मामले में तत्कालीन बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ, स्थानीय विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल और उस समय शहर की मेयर रही अंजू चौधरी पर आरोप है कि इन लोगों ने पुलिस के मना करने के बावजूद रेलवे स्टेशन के पास भड़काऊ भाषण दिया था जिसके बाद यह दंगा भड़क उठा था.

दंगे के बाद योगी आदित्यनाथ के ऊपर कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था. और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था.

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