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8 लाख लोग हर साल करते हैं दुनिया में खुदकुशी जिसमें मानसिक अवसाद सबसे बड़ी वजह तो जहर आसान तरीका

खुदकुशी दुनिया के हर कोने में दस्तक दे सकती है लेकिन दुनियाभर में होने वाली आत्महत्याओं में 21 प्रतिशत भारत में होती हैं

Updated On: Sep 12, 2018 05:46 PM IST

FP Staff

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8 लाख लोग हर साल करते हैं दुनिया में खुदकुशी जिसमें मानसिक अवसाद सबसे बड़ी वजह तो जहर आसान तरीका

WHO यानी विश्व स्वास्थ संगठन के मुताबिक हर साल तकरीबन 8 लाख लोग खुदकुशी करते हैं. विश्व आत्महत्या निषेध दिवस के मौके पर WHO की रिपोर्ट कहती है कि 15 साल से 29 साल के आयु वर्ग के लोगों के बीच खुदकुशी मौत की सबसे बड़ी वजह है.

रिपोर्ट के मुताबिक चाहे अमीर हो या फिर गरीब और चाहे कोई देश हो या फिर क्षेत्र, हर जगह ही खुदकुशी की घटनाएं घटती हैं. हालांकि सबसे ज्यादा ये घटनाएं कम और मध्यम आय वाले देशों में होती है. एक अनुमान के मुताबिक तकरीबन 20 प्रतिशत लोग जहरीला या कीटनाशक पदार्थ खा कर खुदकुशी करते हैं जबकि दूसरा तरीका फांसी लगा कर या खुद को गोली मारकर खुदकुशी करने का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है.

अमीर देशों में लोग मानसिक बीमारी की वजह से  खुदकुशी का कदम उठाते हैं. डिप्रेशन और अवसाद की वजह से अधिकतर लोग खुदकुशी करते हैं. लेकिन इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि आत्महत्या की कई घटनाएं ऐसी भी हुईं जो  किसी परेशानी के वक्त अचानक हुई उग्रता या फिर व्यग्रता का शिकार बनीं. उसका किसी पुरानी बीमारी या फिर मानसिक अवसाद से कोई लेना देना नही था. खुदकुशी करने वाले कई लोग शराब और ड्रग्स के नशे की वजह से भी मेंटल डिसऑर्डर के शिकार हो जाते हैं जिसकी परिणति बाद में आत्महत्या होती है.

Suicide (2)

मानसिक बीमारी के साथ मानसिक दबाव भी इच्छाशक्ति को इस हद तक कमजोर कर देता है कि जिससे लोग खुदकुशी को ही आखिरी रास्ता मान बैठते हैं. ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अलावा समाज के कई वर्गों को भी खुदकुशी को रोकने के लिये प्रयासरत होना चाहिये. शिक्षा, श्रम, कृषि और मीडिया सेक्टर में  भारी दबाव के चलते लोग खुदकुशी करते हैं. ऐसे में आत्महत्या की मानसिकता को बदलने के लिये समाज के सभी वर्गों के सामूहिक प्रयास की जरूरत है.

अवसाद से ग्रस्त व्यक्ति के साथ ये जरूरी है कि उसके साथ परिवार के सदस्य और मित्र-सहयोगी लगातार संवाद बनाए रखें और उसे एकांत में न छोड़ें. साथ ही मनोविज्ञान चिकित्सक से इलाज भी कराएं क्योंकि ऐसे में कोई भी लापरवाही नुकसानदायक साबित हो सकती है. 80 से 90 प्रतिशत लोग मानसिक अवसाद की वजह से आत्महत्या करते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन और मेंटल हेल्थ कमीशन ऑफ कनाडा की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में हर घंटे 92 लोग खुदकुशी करते हैं. साल 2016 में हुई खुदकुशी के आंकड़ों के मुताबिक 15 से 29 साल के युवाओं ने सबसे ज्यादा खुदकुशी की. खुदकुशी करने वालों में सबसे ज्यादा लोग जहर खाकर जान देने वाले हैं. लेकिन रिपोर्ट ये भी कहती है कि अमीर देशों में ही सबसे ज्यादा मानसिक अवसाद के मामले हैं जिस वजह से लोग खुदकुशी करते हैं.

वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे के मौके पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और कनाडा के मानसिक स्वास्थ्य आयोग ने आत्महत्या रोकने के लिये समुदायों की सहायता के लिए एक टूल-किट जारी किया है.आत्महत्या के आंकड़े जारी करने के साथ ही WHO ने खुदकुशी के कारणों पर भी चर्चा की और बताया कि लोग किस तरह छोटी-मोटी परेशानियों से घबरा कर जिंदगी को अलविदा करने का मन बना लेते हैं.

खुदकुशी दुनिया के हर कोने में दस्तक दे सकती है. लेकिन दुनियाभर में होने वाली आत्महत्याओं में 21 प्रतिशत खुदकुशी केवल भारत में ही होती हैं. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के मुताबिक भारत में खुदकुशी की दर दुनिया के मुकाबले ज्यादा है.

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