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वर्ल्ड डायबिटीज डे 2018: जीवनशैली में बदलाव ही इस बीमारी का एकमात्र इलाज है

भारत और विश्व में डायबिटीज सबसे तेजी से फैलती बीमारी है. देश में इसके लगभग 7.2 करोड़ रोगी हैं, जिनके अनुमानित तौर पर 2025 तक 13.4 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है

Updated On: Nov 14, 2018 03:28 PM IST

FP Staff

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वर्ल्ड डायबिटीज डे 2018: जीवनशैली में बदलाव ही इस बीमारी का एकमात्र इलाज है

आज यानी 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस है. जैसा कि मधुमेह नाम से  आभास हो जाता है कि यह चीनी या मिठास आधारित है. मधुमेह या डायबिटीज आज भारत और विश्व में सबसे तेजी से फैलती बीमारी है. देश में इसके लगभग 7.2 करोड़ रोगी हैं, जिनके अनुमानित तौर पर 2025 तक 13.4 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है.

अंतरराष्‍ट्रीय मधुमेह संघ और विश्‍व स्वास्‍थ्‍य संगठन (डब्लूएचओ) की ओर से वर्ष 1991 में वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाने की शुरुआत की गई थी. हर वर्ष डायबिटीज डे का अलग लक्ष्‍य होता है. यदि किसी को डायबिटीज की समस्‍या हो जाती है, तो इसे पूरी तरह से ठीक कर पाना नामुमकिन है, मगर जीवनशैली में आवश्यक बदलाव कर इससे होने वाले खतरों (डिसऑर्डर) से बचा जा सकता है.

डायबिटीज के लक्षण

डायबिटीज में लंबे समय तक ब्लड में शुगर लेवल हाई होता है. इस रोग के लक्षण हैं- अक्सर यूरिन (पेशाब) आना, प्यास बढ़ जाना, खाने के बाद भी भूख लगना, थकान और शरीर शिथिल पड़ना, जोड़ों में दर्द होना. यह सब कुछ लक्ष्ण हैं जो इसके खतरे की चेतावनी देते हैं.

डायबिटीज कई बार प्राकृतिक या आनुवांशिक कारणों से होती है.

कितने तरह का होता है डायबिटीज

डायबिटीज दो तरह के होते हैं- पहला, टाइप 1 डायबिटीज. दूसरा, टाइप 2 डायबिटीज. टाइप 2 डायबिटीज ज्यादा कॉमन है. पीड़ित 90 प्रतिशत लोग इसके ही शिकार होते हैं जबकि टाइप वन 1 रेयर होता है. यह जन्म से होता है.

टाइप 1 डायबिटीज- इसमें इंसान के शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है या इंसुलिन का प्रभाव कम हो जाता है. दोनों ही हालात में शरीर में ग्लूसकोज की मात्रा बढ़ जाती है. टाइप 1 डायबिटीज जन्मजात होती है. इस प्रकार के डायबिटीज के मरीजों को अपने खान-पान का विशेष ध्‍यान रखना चाहिए.

टाइप 2 डायबिटीज- यह ज्यादा आम है. टाइप 2 में शरीर में इंसुलिन कम मात्रा में बनता है या पेन्क्रियाज़ सही से काम नहीं कर पाता है. 90 प्रतिशत डायबिटीज मरीज इसी कैटेगरी में आते हैं. जैसे-जैसे रोग की प्रगति होती है, इंसुलिन की कमी भी विकसित हो सकती है. इसका सबसे आम कारण शरीर का भारी वजन (मोटापा) होना और पर्याप्त व्यायाम न करना है. कई बार यह आनुवांशिक (हेरेडिट्री) कारणों से भी होता है. जबकि कई मामलों में खराब जीवनशैली और दिनचर्चा इसके लिए जिम्मेदार है.

टाइप 2 डायबिटीज को नियमित व्यायाम, कसरत, बैलेंस्‍ड डाइट और दवाइयों के प्रभाव से कंट्रोल में रखा जा सकता है.

विश्व भर में डायबिटिज के सबसे ज्यादा मरीज भारत में हैं

विश्व भर में डायबिटीज के सबसे ज्यादा मरीज भारत में हैं

डायबिटीज का असर और खतरा

डायबिटीज का असर इंसान के शरीर पर इसके होने के कुछ वर्षों बाद शुरू हो जाता है. इसे नियंत्रित रखने के लिए ब्‍लड शुगर और ब्‍लड प्रेशर दोनों को नॉमर्ल रखना चाहिए. ब्‍लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखकर आंखों की रोशनी और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है.

डायबिटीज के मरीजों के एक उम्र तक पहुंचने के बाद हृदय संबंधित समस्‍याएं शुरू हो जाती हैं. इससे बचने के लिए बहुत जरूरी है कि शुगर लेवल काबू में रहे. साथ ही ब्‍लड प्रेशर, कोलेस्‍ट्रॉल और तनाव पर भी नियंत्रण रखना जरूरी है. डायबिटीज से हार्ट अटैक, स्‍ट्रोक, लकवा, इंफेक्‍शन और किडनी फेल्योर का भी खतरा बना रहता है.

कैसे बचा जा सकता है डायबिटीज से

डायबिटीज से पूरी तक मुक्ति मुमकिन नहीं है मगर कुछ जरूरी काम कर इससे बचा जा सकता है.

डायबिटीज मरीजों को जरूरी रूप से जो काम सबसे पहले करना चाहिए वो यह कि उन्हें अपनी लाइफ की डेली रूटीन बनानी चाहिए. इसमें सुबह जल्दी उठना, नियमित व्यायाम करना शामिल है. इसके अलावा उन्हें अपने जीवन से शिथिलता का त्याग कर स्वस्थ्य और सक्रिय जीवनशैली अपनाना चाहिए.

डॉक्टर इसके मरीजों को हर दिन 45 मिनट तक आवश्य रूप से एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं. डायबिटीज और हार्ट की दवाएं कभी बंद नहीं होती हैं इसलिए मरीजों को चाहिए कि वो इसे न छोड़ें.

40 साल की उम्र के बाद इंसान को अपने शरीर में शुगर लेवल की जांच, लिपिड प्रोफाइल की जांच, किडनी फंक्शन टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट, टीएमटी जांच, रेटिना की जांच जरूर करानी चाहिए.

डायबिटीज रोगियों के लिए रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) के आवश्यक लेवल को बनाए रखने के लिए नियमित अंतराल पर कुछ खाते रहना जरूरी है.

डायबिटीज में खान-पान

डायबिटीज प्रभावित लोगों को थोड़ा और आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए. वो सभी मौसमी और रस वाले फल खा सकते हैं. साथ ही अखरोट, बादाम, चिया सीड्स, अंजीर जैसे ड्राई फ्रूट्स भी खा सकते हैं.

खानपान में गुनगुना पानी, छाछ, जौ का दलिया और मल्टीग्रेन आटा (मिला-जुला अनाज) शामिल करें. डायबिटीज के रोगी को नॉन वेज खाने विशेष कर रेड मीट (मटन), शराब और सिगरेट आदि का सेवन नहीं करना चाहिए. हालांकि डॉक्टर उन्हें मछली खाने की सलाह देते हैं.

डायबिटीज रोगियों को अधिक से अधिक मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए. यदि वो नींबू पानी लेते हैं तो यह उनकी सेहत के लिए अच्छा रहेगा.

भोजन में हरी सब्जियों को ज्यादा से ज्यादा शामिल कर डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है

भोजन में हरी सब्जियों को ज्यादा से ज्यादा शामिल कर डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है

डायबिटीज रोगी को काफी भूख लगती है. उसे बार-बार कुछ न कुछ खाने का मन करता है. ऐसे में इक्टठा कुछ भी खाने के बजाय भूख से थोड़ा कम खाना चाहिए और हल्का भोजन लेते हुए हरा सलाद अधिक मात्रा में खाना चाहिए.

उन्हें अपनी आंखों की रोशनी को बरकरार रखने के लिए गाजर-पालक का रस मिलाकर पीना चाहिए. इससे आंखों की कमजोरी दूर होती है. साथ ही उन्हें अपने भोजन में हरी सब्जियों का भरपूर सेवन करना चाहिए. शलगम का सेवन डायबिटीज रोगियों में ब्लड शुगर लेवल को कम रखने में मददगार है. इसलिए शलगम को सलाद के अलावा सब्जी, पराठे आदि चीजों के रूप में भी शामिल किया जा सकता है.

भारत में सबसे तेजी से फैल रहा डायबिटीज

विश्व के बाकी देशों की तुलना में भारत में डायबिटीज सबसे तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है. जहां अधिकतर देशों में डायबिटीज पीड़ित 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं, भारत में 30 से 50 वर्ष के लोग इस बीमारी की चपेट में सबसे ज्यादा हैं. 25 साल से कम उम्र के हर 4 में से एक युवा डायबिटीज पीड़ित है.

साल 2012 के आंकड़ों के मुताबिक डायबिटीज से दुनिया भर में 15 लाख लोगों की मौत हुई थी. वर्तमान में दुनिया भर में होने वाली कुल मौतों में डायबिटीज सातवीं सबसे बड़ी वजह है.

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