S M L

भारत की कामकाजी महिलाओं में 80 फीसदी ग्रामीण

दिलचस्प बात यह है कि ग्रामीण इलाकों में काम करने वाली करीब 56 फीसदी महिलाएं अशिक्षित हैं

Updated On: Jun 25, 2018 09:02 PM IST

FP Staff

0
भारत की कामकाजी महिलाओं में 80 फीसदी ग्रामीण

शहरी महिलाओं के मुकाबले ग्रामीण महिलाएं ज्यादा काम करती हैं. आप शायद इस बात पर यकीन ना करें लेकिन यह सच है. साल 2011 की जनगणना और हाल के नेशनल सैंपल सर्वे के अनुसार, देश के कुल कामकाजी महिलाओं में 81.29 फीसदी हिस्सेदारी ग्रामीण महिलाओं का है. इसमें सीमांत और मुख्य दोनों तरह की महिला कामगार शामिल हैं.

जनगणना के मुताबिक, मुख्य मजदूर वह है जिसके पास साल के ज्यादातर समय काम रहता है. इनमें से अधिकतर महिलाएं खेतिहर मजदूर हैं जो मजदूरी के बदले किसी और की जमीन पर काम करती हैं. दिलचस्प बात यह है कि ग्रामीण इलाकों में काम करने वाली करीब 56 फीसदी महिलाएं अशिक्षित हैं. वहीं शहरी इलाकों में काम करने वाली कुल महिलाओं में 28 फीसदी अशिक्षित हैं.

भारत ने महिला कामगारों में भारी गिरावट देखी है. साल 2004-2005 और साल 2011-2012 के बीच 2 करोड़ महिलाओं ने काम छोड़ दिया. जबकि इस दौरान 2.4 करोड़ महिलाओं ने काम करना शुरू किया.

श्रम शक्ति में महिलाएं हों शामिल 

लुइस ए एंड्रेस, बसब दासगुप्त, जॉर्ज जोसेफ, विनोज अब्राहम और मारिया द्वारा लिखे गए विश्व बैंक की एक स्टडी में कहा गया है, 'यह चिंता का महत्वपूर्ण विषय है. भारत आर्थिक विकास को बढ़ाने और विकास को बढ़ावा देने के लिए खुद को तैयार करने की बात करता है इसलिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इसकी श्रम शक्ति में महिलाओं का समावेश हो.'

अधिकतर लोगों कि राय है कि हो सकता है ग्रामीण इलाकों में शादी की वजह से महिलाएं काम छोड़ती हैं. आंकड़ों के अनुसार, विवाह ने गांवों में महिलाओं के बीच कार्यबल भागीदारी को प्रभावित नहीं किया. अविवाहित महिलाओं की तुलना में अधिक विवाहित महिलाएं इन क्षेत्रों में काम करती हैं.

पढ़ाई को तरजीह

वर्ल्ड बैंक के रिसर्च पेपर में दावा किया गया है कि 15-24 साल की ग्रामीण लड़कियों और महिलाओं के बीच भागीदारी घटने की वजह तेजी से बदलते सामाजिक मानक जिम्मेदार हैं. रिसर्च पेपर में कहा गया है कि अधिकतर युवा महिलाएं काम करने की जगह अपनी पढ़ाई को प्राथमिकता दे रही हैं.

इसे ग्रामीण इलाकों में पढ़ने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या से समझा जा सकता है. हालांकि, काम करने की जगह पढ़ाई चुनना इस बात को सुनिश्चित नहीं करता कि महिलाएं इसके बाद काम करेंगी ही. नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च पेपर में शोध करने वालों ने कहा है कि हाई स्कूल के स्तर की पढ़ाई करने वाली महिलाओं को काम करने के लिए बढ़ावा नहीं मिला. जैसा कि पहले बताया गया है कि अधिकतर महिलाएं जो ग्रामीण इलाकों में काम करती हैं वह अशिक्षित होती हैं.

एनएसएस के आंकड़ों से यह पता चलता है कि घरेलू मजदूरी में वृद्धि होने के चलते महिलाओं ने काम छोड़ा. मतलब, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए काम करने के लिए धन की आवश्यकता ही एकमात्र वजह है. भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मुख्यमंत्रियों को एक पत्र में लिखा था ,'मैं इस बात से पूरी तह आश्वस्त हूं कि देश की प्रगति महिलाओं की स्थिति से जुड़ी हुई है.'

(न्यूज18 के लिए रौनक कुमार गुंजन की रिपोर्ट)

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Ganesh Chaturthi 2018: आपके कष्टों को मिटाने आ रहे हैं विघ्नहर्ता
Firstpost Hindi