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जमीन खरीद कर भी दार्जिलिंग में आश्रम नहीं बनवा पाया राम रहीम

आरजेड एंटरप्राइजेज के नाम से दार्जिलिंग से तीन किलोमीटर दूर बोकशिझोर में चार एकड़ का प्लाट खरीदा गया और वर्ष 2009 से 2012 के बीच राम रहीम कई बार वहां गए

Updated On: Aug 28, 2017 06:03 PM IST

FP Staff

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जमीन खरीद कर भी दार्जिलिंग में आश्रम नहीं बनवा पाया राम रहीम

वर्ष 2012 में  राम रहीम ने दार्जिलिंग में जमीन का एक टुकड़ा खरीदा. उनकी योजना भव्य आश्रम बनाने की थी. लेकिन गोरखा जनमुक्ति नारी मोर्चा की महिलाएं अड़ गईं कि वो आश्रम नहीं बनने देंगी. आश्रम में जो निर्माण हुआ भी था उसे दार्जिलिंग नगरपालिका ने अवैध करार देकर ढहा दिया.

दरअसल बाबा नेपाल और सिक्किम में डेरा सच्चा सौदा का बेस बनाना चाहते थे, उसमें उन्हें सफलता नहीं मिली तो नजर दार्जिलिंग की ओर गई. उन्हें लगा दार्जिलिंग में आश्रम बन गया तो बंगाल में डेरा के बेस का काम करेगा साथ ही पूर्वी भारत के मुख्यालय के रूप में भी.

बाबा ने कई बार गए

जमीन खरीदे जाने के बाद बाबा के सहयोगियों का वहां जाना शुरू हो गया कि वहां अनुयायियों की संख्या बढाई जा सके. एआरजेड एंटरप्राइजेज के नाम से दार्जिलिंग से तीन किलोमीटर दूर बोकशिझोर में चार एकड़ का प्लाट खरीदा गया. बाबा राम रहीम वर्ष 2009 से 2012 के बीच कई बार वहां गए.

उन्हें स्लैक्स बाबा कहा जाता था

दार्जिलिंग के लोगों के बीच वह जल्दी ही चर्चा का विषय बन गए. जब भी राम रहीम वहां आते, उनके साथ गाड़ियों का काफिला होता. उनके पहनावे और साध्वियों से घिरे होने के कारण वह उत्सुकता का विषय बनने लगे. उनके स्लैक्स पहनने के कारण दार्जिलिंग के लोग उन्हें स्लैक्स बाबा कहने लगे.

भव्य आश्रम बनाने की योजना थी

जमीन लेने के बाद बाबा के लोगों ने निर्माण का काम शुरू किया. चारदीवारी बना दी गई. शानदार दो मंजिला भवन बनाने की योजना थी. एक मंजिल पर निर्माण करीब पूरा भी हो गया था. इसके बाद विरोध की आवाजें उठने लगीं.

पालिका ने निर्माण को अवैध माना

दार्जिलिंग नगर पालिका ने निर्माण को अवैध माना, क्योंकि बगैर नक्शा पास हुए काम शुरू कर दिया गया था. नगरपालिका ने छह जून 2012 तक इसे ढहाने का आदेश दिया. फिर पालिका ने इसे खुद ही ये काम किया.

महिला मोर्चा का विरोध

सात जून 2012 से गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के महिला विंग और अन्य संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया.  उनका कहना था कि बाहरी लोगों को यहां आश्रम बनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. यही नहीं उनके दार्जिलिंग आने पर भी रोक की मांग की गई. अन्यथा उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन और काले झंडे दिखाने की चेतावनी दी गई.

दार्जिलिंग में संपत्ति जब्त होगी

दार्जिलिंग के स्थानीय निवासी सूरज भूटिया कहते हैं, गुरमीत के गार्ड स्थानीय लोगों से मेलजोल नहीं रखते थे, प्रापर्टी से जुड़े मामलों पर उनकी स्थानीय लोगों से झड़प हो चुकी थी. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि अदालत के फैसले के बाद उनकी संपत्नि देश के भागों में जब्त कर ली गई है. अगर जरूरत पड़ी तो हम दार्जिलिंग में भी ऐसा करेंगे. डेरा के स्थानीय संपर्कों की जांच करेंगे. उनके फॉलोअर्स पर नजर रखेंगे. बेशक वो यहां कम हैं लेकिन हम किसी तरह का चांस नहीं लेंगे.

(साभार न्यूज 18)

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