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महिलाओं का सम्मान जरूरी, जीवन में समझें समान भागीदारः पूर्व CJI दीपक मिश्रा

दीपक मिश्रा ने कहा भारत के निवासी होने के कारण किसी को ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि संविधान उनके लिए एक अज्ञात व्यक्ति की तरह है या फिर वह इस संविधान का हिस्सा नहीं है

Updated On: Oct 05, 2018 05:21 PM IST

FP Staff

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महिलाओं का सम्मान जरूरी, जीवन में समझें समान भागीदारः पूर्व CJI दीपक मिश्रा

भारत के पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने 16वीं हिंदुस्तान लीडरशिप समिट में कई बातों को सामने रखा. उन्होंने कहा- 'मैं यहां पर संवैधानिक नैतिकता के विचार पर बात करने के लिए आया हूं.' उन्होंने कहा- 'मैं यहां मौजूद सभी लोगों से आग्रह करता हूं कि असुरक्षित आशावादी बनें. आपकी उम्मीद की भावना दृंढ़ होनी चाहिए. आपकी उम्मीद वास्तविकता के साथ जुड़ी होनी चाहिए और उसी वजह से कोर्ट इन उम्मीदों को महसूस करने के लिए प्रयास करती है.'

दीपक मिश्रा ने आगे कहा- 'भारत के निवासी होने के कारण किसी को ऐसा महसूस नहीं होना चाहिए कि संविधान उनके लिए एक अज्ञात व्यक्ति की तरह है या फिर वह इस संविधान का हिस्सा नहीं है. राज्य की हर शाखा द्वारा संवैधानिक व्यवहार को समझना जरूरी है चाहे वह वैधानिक हो, कार्यकारी हो या फिर न्यायिक हो. आप क्रिमिनलों को संचालित करने की अनुमति नहीं दे सकते हैं.

दीपक मिश्रा ने कहा- इतिहास में चाणक्य को निष्ठुर व्यक्ति बताया गया है लेकिन मैं ऐसा नहीं सोचता. मेरा मानना है कि वह राजा चंद्रगुप्त मोर्य के एक उचित सलाहकार थे. हमारे पास एक मजबूत स्वतंत्र न्यायपालिका है और कानून के शासन द्वारा शासित है. वहीं सबरीमाला मंदिर पर महिलाओं के प्रवेश को लेकर दिए गए फैसले पर उन्होंने कहा- 'किसी विशेष धर्म में आप महिलाओं को मंदिर से बाहर नहीं रख सकते. महिलाओं का सम्मान करना जरूरी है. जीवन में महिलाएं समान पार्टनर होती हैं.'

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