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क्या अपराधी माल्या को सांसद बनाने वाले विधायकों की संपत्ति जब्त होगी?

पोस्टर बॉय माल्या को जेल में डालने से ज्यादा जरूरी है गबन की हुई रकम की वसूली, डूबी रकम की वसूली यदि हुई तो मोदी सरकार के कार्यकाल का बेहतरीन समापन भी हो सकेगा

Updated On: Sep 14, 2018 09:00 PM IST

Virag Gupta Virag Gupta

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क्या अपराधी माल्या को सांसद बनाने वाले विधायकों की संपत्ति जब्त होगी?
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संसद में वित्त मंत्री जेटली के साथ विजय माल्या की सिर्फ मीटिंग हुई या कोई सेटलमेंट भी हुआ? दो साल पुराना सीसीटीवी फुटेज तो शायद ही अब मिले, तो फिर इस कहानी में हमेशा ही सस्पेंस रहेगा? सर्कुलर बदलने पर सीबीआई ने अपनी गलती मानी है.

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने माल्या को अपराधी करार देते हुए, उसकी बात पर भरोसा नहीं करने की बात कही तो संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर हवाला संबंधों का आरोप लगा दिया है. जालसाजी, गबन और भ्रष्टाचार के अपराधों से घिरे माल्या को आज त्याज्य बताया जा रहा है. सवाल यह है कि इन्हीं नेताओं ने माल्या को संसद का माननीय सदस्य क्यों बनवाया था?

आम्रपाली की तर्ज पर सुप्रीम कोर्ट से माल्या के खिलाफ फैसला हो

माल्या के खिलाफ कार्यवाही में विलंब के लिए लचर न्यायिक तंत्र भी जिम्मेदार है. माल्या के खिलाफ कार्यवाही के लिए केंद्र की बीजेपी सरकार द्वारा सीबीआई को और कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा लोकायुक्त को आदेश भी शायद ही जारी हों? कांग्रेस, जेडीएस द्वारा कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आधी रात को सुनवाई की थी.

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सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली मामले में कंपनी के सभी डायरेक्टर, शेयर होल्डरों और उनके परिवारजनों की व्यक्तिगत संपत्ति से ग्राहकों को मुआवजा देने का आदेश दिया है. उसी तर्ज पर माल्या से लाभ लेने वाले फिल्मी सितारों, मॉडल्स, खिलाड़ियों, नेताओं, अफसरों, बैंकर्स और राजनीतिक दलों के खिलाफ भी संपत्ति जब्ती की कार्रवाई क्यों नहीं होती?

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माल्या को वोट देने वाले विधायकों की संपत्ति जब्त हो

इस बात से सभी सहमत हैं कि माल्या ने देश को 9,000 हजार करोड़ का चूना लगाया. बीजेपी के मंत्रियों द्वारा लगाए गए आरोपों को सही माना जाए तो तत्कालीन कांग्रेस (यूपीए) की सरकार ने माल्या को हजारों करोड़ का लोन दिया जो 2009 में एनपीए यानी बट्टे खाते में चला गया. इसके बावजूद 2010 के चुनाव में बीजेपी के 13, जेडीएस के 27 और 5 निर्दलीय विधायकों के सहयोग से माल्या राज्यसभा सदस्य बन गया.

तत्कालीन रिपोर्टों के अनुसार प्रत्येक विधायक को 25 करोड़ रुपए से अधिक की रकम मिली होगी. कंपनियों के पास बैंकों का कर्ज लौटाने के लिए पैसा नहीं था, तो फिर गबन की हुई रकम से ही माल्या ने विधायकों को खरीदा होगा. पीएमएलए और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के अनुसार 2002 और 2010 में माल्या को वोट देने वाले कांग्रेस, बीजेपी और जेडीएस के सभी विधायकों की संपत्ति भी क्यों नहीं जब्त की जानी चाहिए?

संसद में अपराधियों की उपस्थिति और हितों का विरोधाभास

हजारों दागी और अपराधी लोग विधायक और सांसद बन गए हैं जिनके मुकदमों में जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विशेष अदालतें बनाई जा रही हैं. बीजेपी द्वारा लगाए गए आरोप के अनुसार माल्या की किंगफिशर में कांग्रेसी नेताओं ने उड़ान भरी. जेटली से मिलने के बाद जेट एयरवेज की फ्लाईट से माल्या विदेश भाग गए थे.

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जेट एयरवेज के ऊपर तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल की विशेष कृपा दृष्टि रही है, जिसका खामियाजा एयर इंडिया की कंगाली के तौर पर पूरे देश को अभी भी भुगतना पड़ रहा है. सांसद होने के बाद माल्या उड्डयन मंत्रालय की समिति के स्थायी सदस्य बन गए जिसका किसी दल विरोध नहीं किया. क्या माल्या को सांसद होने के नाते विशेष राजनयिक पासपोर्ट मिला था? सीबीआई ने सर्कुलर जारी करने के साथ माल्या के पासपोर्ट को जब्त क्यों नहीं किया? पूरे विवाद में मौजू सवाल यह है कि माल्या जैसे अपराधियों को संसद में वित्त मंत्री से मिलने का विशेषाधिकार कैसे मिला?

माल्या पर कार्यवाही से एनपीए की वसूली की मिसाल बनेगी

माल्या के अनुसार उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि भारत में उन्हें बैंकिंग घोटालों का पोस्टर बॉय माना जाता है. देश में 10 लाख करोड़ का लोन इन्सॉलवेंसी के नाम पर बट्टे खाते में डाला जा रहा है. दिवालिया कानून के बेखौफ रास्ते का माल्या को यदि पूर्वाभास होता तो उसे विदेश क्यों भागना पड़ता? दिवालिया होने के बावजूद राज्यसभा सदस्यता, आईपीएल और सभी ऐश के लिए माल्या ने बैंकों का खरबों रुपए फूंक दिया परंतु कर्मचारियों की तनख्वाह और सरकार को सर्विस टैक्स नहीं दिया. सवाल यह है कि ऐसे दिवालिया को संसद की सदस्यता कैसे मिली?

Vijay Mallya

वोहरा कमेटी ने नेता, अफसर और उद्योगपतियों के गठजोड़ पर विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी और माल्या मामला जिसकी बड़ी मिसाल है. माल्या का नाम पनामा और पैराडाइज के कागजातों में भी है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार काले धन की जांच के लिए गठित विशेष समिति को मोदी सरकार की शुरुआती उपलब्धि बताया गया था. तेलगी और हर्षद मेहता जेल में सड़ गए पर घोटाले का हजारों करोड़ सरकार के पास वापस नहीं आया.

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पोस्टर बॉय माल्या को जेल में डालने से ज्यादा जरूरी है गबन की हुई रकम की वसूली. रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने संसद को दिए विशेष बयान में बैंकों की दुर्दशा के कारणों का विस्तार से विवरण किया है. माल्या को विजय श्री और माल सौंपने वाले भ्रष्ट तंत्र पर निर्णायक कार्यवाही करने से 10 लाख करोड़ की डूबी रकम की वसूली यदि हुई तो मोदी सरकार के कार्यकाल का बेहतरीन समापन भी हो सकेगा!

(लेखक सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं.)

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