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क्या शिवसेना, मुस्लिम लीग को अपना नाम बदलना चाहिए?

इन पार्टियों ने ऐसा नहीं किया तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना माना जाएगा.

Updated On: Jan 04, 2017 09:23 AM IST

FP Politics

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क्या शिवसेना, मुस्लिम लीग को अपना नाम बदलना चाहिए?

राजनीति में धर्म के घालमेल पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कुछ राजनीतिक दलो को अपना नाम बदलना पड़ सकता है. हालांकि इस आदेश को कैसे लागू किया जाएगा इस पर सवाल खड़े किए जा रहे है. लेकिन पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी मानतें कि इसका असर बड़ा होगा.

गोपालस्वामी ने कहा कि धार्मिक नामों वाली पार्टियों को अपना नाम बदलना होगा. इन पार्टियों ने ऐसा नहीं किया तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना माना जाएगा. गोपालस्वामी ने न्यूज18 वेबसाइट को बताया, ‘ अकाली दल, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिम, शिवसेना और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग जैसे पार्टियों को अपना नाम बदलना पड़ सकता है.’

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पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाय कुरैशी ने भी गोपालस्वामी से सहमति जताई. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऐसा होने की पूरी संभावना है. कुरैशी ने कहा,’बीजेपी पहले से ही ऐसी पार्टियों के नामों पर सवाल ऊंगली उठाती रही है. मुझे लगता है कि इन पार्टियों को अपना नाम बदल लेना चाहिए. हालांकि कोर्ट की राय ही अंतिम मानी जाएगी.’

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शिवसेना और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने नाम बदलने के सुझावों को सिरे से खारिज कर दिया.

1995 के हिंदुत्व मामले की फिर से सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सोमवार को सुनाया है. सात जजों की इस संवैधानिक पीठ के अध्यक्ष भारत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस टीएस ठाकुर कर रहे थे. पीठ ने साफ कहा कि राजनीति से धर्म को दूर रखना चाहिए. धर्म को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करना भ्रष्टाचार माना जाएगा.

मोटी चमड़ी वाले 

गोपालस्वामी ने कहा,‘ राजनीतिक दलों के नेता अमूमन मोटी चमड़ी के होते हैं. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का हवाला देकर जब तक कोई ऐसी पार्टियों के नाम बदलवाने की अपील दायर नहीं करेगा. तब तक इन पार्टियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगेगी.’

गोपालस्वामी ने आशंका जताई कि इस फैसले को एक बार फिर कोर्ट में उलझा दिया जाएगा. और सालों बाद नतीजा कुछ और ही निकले. जिस तरह इस फैसले में संविधान पीठ के सात में से तीन जजों ने इसे केवल किताबी कानून बताया था.

शिवसेना ने नाम बदलने के सुझाव को नकार दिया. पार्टी के प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने कहा कि ऐसी किसी कोशिश के खिलाफ लड़ने के लिए पार्टी ऐड़ी-चोटी का जोर लगाएगी.

कायंदे ने न्यूज18 से कहा,’हमारी पार्टी शिवसेना का नाम छत्रपति शिवाजी से प्रेरित है. हमारी लड़ाई बराबरी की है. हम हिंदुओ के हक के लिए भी लड़ते हैं. लेकिन कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के चलते हम पर हिंदुत्व राजनीति का ठप्पा लगाती है. हमारी पार्टी का नाम बदलने की बात करना सही नहीं.’

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कायंदे ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद बीजेपी का चुनाव चिन्ह बदलने की वकालत कर डाली. उन्होंने ने न्यूज18 से कहा कि बीजेपी कमल को देवी लक्ष्मी का आसन बताती है. उनका चुनाव चिन्ह हिंदुत्व का प्रतीक है. उसे बदलने की जरुरत है.

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इंडियन  मुस्लिम लीग के नेता पीवी अब्दुल वहाब ने मामले पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से थोड़ी और स्पष्टता की जरुरत बताई.

वहाब ने कहा,’सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कुछ नया नही है. इसमें जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 को ही दोहराया गया है. ‘द हिंदू’ अखबार का मतलब यह नहीं है कि वो हिंदुओ के लिए है. मुझे नहीं लगता कि हमे अपनी पार्टी का नाम बदलने की जरुरत है.’

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