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शहरी नक्सलवाद के मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ताओं का मोदी विरोध कितना असरदार होगा?

कई जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता, मानवाधिकार कर्याकर्ता और वकीलों ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

Updated On: Aug 30, 2018 11:00 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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शहरी नक्सलवाद के मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ताओं का मोदी विरोध कितना असरदार होगा?
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देश में महाराष्ट्र पुलिस द्वारा नक्सली विचारधारा से प्रभावित पांच विचारकों की गिरफ्तारी के बाद संग्राम मचा हुआ है. इस घटना के विरोध में कई जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता, मानवाधिकार कर्याकर्ताओं और वकीलों ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. दिल्ली के प्रेस क्लब में एक संवाददाता सम्मेलन में सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक अरुंधति रॉय, अरुणा रॉय, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी ने एक मंच से इन सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की निंदा की है. सभी लोगों ने एक स्वर में कहा, ‘जिन्हें गिरफ्तार किया गया है उनको उनके जुर्म के बारे में पता तक नहीं है. सभी लोगों का एफआईआर में नाम तक नहीं हैं. देश के संविधान के साथ मजाक हो रहा है. मोदी सरकार अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलना चाह रही है.’

गुरुवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन लोगों ने महाराष्ट्र पुलिस द्वारा गिरफ्तारी का खुलकर विरोध किया. सामाजिक कार्यकर्ता और जानी-मानी लेखक अरुंधति रॉय ने कहा, ‘गरीब की मदद करना अब देश में अपराध हो गया है. देश में अल्पसंख्यक होना गुनाह हो गया है. पीएम मोदी की एक सर्वे रिपोर्ट में लोकप्रियता घटने की खबर जब से आई है, उससे ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की कोशिशें देश में शुरू की जा रही हैं.’

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अरुंधति राय ने कहा, ‘पीएम मोदी ने कहा था कि बीजेपी की जीतने के बाद देश के सभी नागरिकों के बैंक खाते में 15 लाख रुपए आएंगे, लेकिन मोदी सरकार सत्ता में आने के बाद नोटबंदी के जरिए गरीबों के खाते से पैसे चुरा लिए. यह सरकार शिक्षा को शिक्षण संस्थानों को बर्बाद करने में लगी हुई है. शिक्षा का जिस तरह से निजीकरण किया जा रहा है, यह चिंताजनक है. विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे लोगों का देश से भाग जाने के बाद आम जनता की जेब कटी है. रॉय ने कहा कि मोदी सरकार अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए इन एक्टविस्टों की गिरफ्तारी कर रही है. आज के हालात आपातकाल से भी ज्यादा खतरनाक हो गए हैं.’

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के जानेमाने वकील प्रशांत भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय, जिग्नेश मेवानी जैसे लोग शामिल हुए. अरुणा रॉय मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘देश में इस समय अभिव्यक्ति की आजादी का खतरा हो गया है. सरकार उनलोगों को परेशान कर रही है, जिनको सरकार की नीतियों से असहमति है. 2019 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले देश में सरकार के द्वारा डर पैदा किया जा रहा है.’

गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, यह सब वैसे ही हो रहा है, जैसे साल 2002-03 के बाद गुजरात में हो रहा था. केंद्र में भी गुजरात मॉडल लागू किया जा रहा है. जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने भी कहा कि संविधान की आत्मा का कत्ल किया जा रहा है.

बता दें कि महाराष्ट्र पुलिस ने 28 अगस्त को देश के अलग-अलग हिस्सों से पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था. इन सभी पर आरोप थे कि ये लोग नक्सली विचारधारा को बढ़ावा देकर पीएम मोदी की हत्या की साजिश रच रहे हैं. महाराष्ट्र पुलिस ने गौतम नवलखा, वरवरा राव, अरुण फेरेरा, सुधा भारद्वाज और वरनान गोंसाल्विस को गिरफ्तार किया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी की गिरफ्तारी पर 5 सितंबर तक रोक लगा दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार से इनलोगों की गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कारण पूछा था. मामले की अगली सुनवाई तक पांचों को घर में ही नजरबंद करने का आदेश भी दिया.

बता दें कि महाराष्ट्र पुलिस का आरोप है कि गिरफ्तार सभी लोगों का इसी साल एक जनवरी को भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा में हाथ था. 28 अगस्त को महाराष्ट्र पुलिस ने देशभर में छापेमारी के बाद पांच नक्सली विचारकों को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से ही इस पर राजनीति के साथ विरोध भी शुरू हो गया था.

प्रशांत भूषण

प्रशांत भूषण

प्रशांत भूषण सहित कई लोगों ने इस गिरफ्तारी पर कहा था कि देश में फासीवादी फन अब खुल कर समाने आ गए हैं. प्रशांत भूषण, अभिषेक मनु सिंघवी, इंदिरा जय सिंह, वृंदा ग्रोवर और राजीव धवन जैसे वकीलों ने इन लोगों की गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इन लोगों के द्वारा सुप्रीमकोर्ट में अपील दाखिल करने के बाद से ही कोर्ट ने सभी पांच लोगों को अगली सुनवाई तक घर में ही नजरबंद करने का आदेश दिया था.

कुलमिलाकर महाराष्ट्र पुलिस के द्वारा पांच लोगों की गिरफ्तारी के बाद जहां देश में शहरी नक्सलवाद पर बहस छिड़ गई है वहीं कुछ लोगों को मोदी विरोध का नारा बुलंद करने का मौका भी मिल गया है. बीजेपी का साफ कहना है कि इन लोगों की गिरफ्तारी इनके पुराने रिकॉर्ड्स को देखते हुई है. यूपीए सरकार में ही इन लोगों के बारे में रिकॉर्ड तैयार किया गया था. इनमें से कुछ लोगों की पहले भी गिरफ्तारी हो चुकी है. इनकी गिरफ्तारी का विरोध करने वाले लोग पीएम मोदी के खिलाफ एजेंडा चला रहे हैं.

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