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क्या किशोर कुमार को 31 बरस बाद कोई सम्मान मिलने वाला है?

बीते मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के हरदिल अज़ीज़ गायक ‘किशोर कुमार’ का ज़िक्र अपने एक भाषण में क्या कर दिया कि किशोर कुमार के चाहने वालों को लगा जैसे उन्हें भारत-रत्न मिल गया हो.

Updated On: Jun 27, 2018 07:00 PM IST

Nazim Naqvi

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क्या किशोर कुमार को 31 बरस बाद कोई सम्मान मिलने वाला है?
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बीते मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के हरदिल अज़ीज़ गायक ‘किशोर कुमार’ का ज़िक्र अपने एक भाषण में क्या कर दिया कि किशोर कुमार के चाहने वालों को लगा जैसे उन्हें भारत-रत्न मिल गया हो. हालांकि सच्चाई यह है कि भारत रत्न तो छोड़िये उन्हें कभी पद्म-श्री भी नहीं मिल सका.

मंगलवार को मुंबई के एक समारोह में इमरजेंसी के काले दिन याद करते हुए मोदी किशोर कुमार का ज़िक्र कर बैठे. मोदी ने इंदिरा गांधी के फौलादी क़ानूनों को याद करते हुए वह किस्सा छेड़ दिया जब उन दिनों के हिट सिंगर किशोर कुमार ने कांग्रेस सरकार की फरमाइश पूरी करने से इंकार कर दिया था जिसके जवाब में इस लोकप्रिय पार्श्व गायक को सबक सिखाते हुए रेडियो-टीवी पर उनके गानों पर बैन लगा दिया गया था.

समारोह में कुछ इस तरह किस्सा बयां किया मोदी ने, 'कोई मुझे बताए कि किशोर कुमार का क्या गुनाह था.' फिर उन्होंने सामने बैठे दर्शकों से अपने दिलचस्प अंदाज़ में पूछा, 'जानते हो किशोर कुमार कौन है'. 'आपको मालूम है उनके साथ क्या हुआ था'. फिर उन्होंने किशोर कुमार का किस्सा बताना शुरू किया. 'किशोर कुमार जो कि मशहूर पार्श्व गायक थे, उस समय कांग्रेस ने कहा कि हमारे यहां गाने-बजाने के लिए आ जाओ. उन्हें लगा कि ये भी गाने-बजाने में जुड़ जाएंगे. लेकिन उन्होंने कहा कि हम ये काम नहीं कर पाएंगे. बस, उनका इतना ही गुनाह था. देश के रेडियो पर से, उस समय टीवी नया-नया शुरू हुआ था, सब जगह पर से किशोर कुमार (फिर हाथ से काटे का निशान बनाते हुए) की छुट्टी. एंट्री नहीं मिली. इतना आक्रोश कल्पना कर सकते हैं आप.'

Narendra Modi in Mumbai

किशोर कुमार को इस दुनिया से अलविदा लिए हुए 31 बरस हो चुके हैं. और इन वर्षों में किशोर कुमार को चाहने वाले इंतजार ही करते रह गए कि हर साल देश की विलक्षण निधियों को, प्रतिभाओं को सम्मानित करने वाली सरकार कभी तो उनके चहेते की भी सुध लेगी. जहां लता मंगेशकर को भारत रत्न मिला वहां किशोर जैसे फिल्म इंडस्ट्री के महान गायक और अभिनेता को पद्म-भूषण तो छोड़िये, पद्म श्री भी नहीं दिया गया.

कई बार ऐसा भी हुआ कि कई प्रतिभाओं पर सरकार की निगाह समय रहते नहीं पड़ पाई तो उन्हें उनके मरणोपरांत पद्म सम्मान से नवाज़ा गया. इनमें असम के गायक भूपेन दा जैसी अनेक शख्सियतों के नाम गिनाये जा सकते हैं. इसलिए जब मोदी ने किशोर का ज़िक्र किया तो किशोर के चाहने वाले ‘एक उम्मीद’ में खुश हो गए.

चुनावी वर्ष है. सारे नेता, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों, अब अपने विरोधी को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे. और मुंबई में मोदी ने यही किया. कांग्रेस के पास इस पर खामोश रहने के सिवा कोई और रास्ता नहीं है. ये सच है कि उस समय (1975 ) किशोर कुमार को हुकूमत के गुस्से का शिकार होना पड़ा था. मोदी ने उसी पुराने जख्म को फिर से कुरेदा है. उस समय किशोर दा के गानों पर तीन साल के लिए बैन लगा दिया गया था. यह वह समय था जब रेडियो आम-जनता के मनोरंजन का सबसे सशक्त साधन था. देश में टेलीविजन का आगमन 1982 के बाद हुआ, लेकिन इस नए माध्यम पर भी किशोर कुमार की एंट्री नहीं हुई.

1975 से लेकर 1987 तक, यानी वह 12 वर्ष जिनमें किशोर दा जीवित रहे, अपने गीतों के प्रसारण पर लगे सरकारी प्रतिबंध को झेलते रहे. एक कलाकार के लिए इससे बड़ा ज़ुल्म और क्या हो सकता है कि उसकी आवाज और उसके प्रशंसकों के बीच एक खामोश दीवार खड़ी कर दी जाए. ये बात और है कि उस हंसमुख कलाकार ने अपने ऊपर हो रही इस बर्बरता पर भी सब्र किया और अपने प्रशंसकों को कई यादगार गाने दिए.

'ओ मांझी रे... नदिया की धारा... (फिल्म खशबू), 'आपके अनुरोध पर... (फिल्म- अनुरोध), 'ओ साथी रे... तेरे बिना भी क्या जीना (फिल्म- मुक़द्दर का सिकंदर), 'सागर किनारे... (फिल्म- सागर), 'खइके पान बनारस वाला (फिल्म- डॉन ), 'मंज़िलें अपनी जगह है... (फिल्म- शराबी). 1971, 72, 73 और 75 में बेस्ट मेल प्ले-बैक सिंगर का खिताब जीतने वाले किशोर कुमार को 75 के बाद कोई सम्मान नहीं मिला लेकिन उन्होंने अपने चाहने वालों को फिर भी यादगार गीत दिए. इनमें फिल्म 'अमानुष' (1976 ) का वह यादगार गाना भी शामिल है जिसके शब्द खुद उनके जीवन की व्यथा से मेल खा रहे थे, 'दिल ऐसा किसी ने मेरा तोडा... अमानुष बनाकर छोड़ा.

संजय गांधी और राजीव गांधी के साथ इंदिरा गांधी

संजय गांधी और राजीव गांधी के साथ इंदिरा गांधी

चलिए मान लेते हैं कि इंदिरा गांधी और उनके (इमरजेंसी के नायक) बेटे संजय गांधी को किशोर कुमार के 'उस इंकार' से नाराज़गी थी लेकिन उसके बाद देश की सत्ता पर ऐसे लोग भी आए जो गैर-कांग्रेसी थे. मिसाल के तौर पर विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, अटल बिहारी बाजपेई, देवे गौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल वो नाम हैं जो 1989 से लेकर 2004 के बीच देश के प्रधानमंत्री हुए लेकिन किशोर कुमार को सम्मानित करने की सुध किसी को भी नहीं आई.

इसका अर्थ है कि किशोर कुमार को लेकर हुकूमत की उदासीनता में कांग्रेस और गैर-कांग्रेस, सब बराबर के शरीक हैं. आज अगर किशोर कुमार के प्रशंसक यह सवाल उठाते हैं कि वह तीन साल का बैन कैसे 43 साल का बैन बन गया तो शायद ही इसका जवाब होगा किसी के पास.

चलिए देर आये, दुरुस्त आये वाली कहावत पर यकीन करते हैं और देखते हैं कि क्या वर्तमान सरकार उन्हें सम्मानित करती है या नहीं. मंगलवार को मुंबई के समारोह में जो कुछ मोदी ने कहा उसे बाद में अपने अधिकारिक ट्वीट पर भी डाला. उन्होंने ट्वीट किया, 'किशोर कुमार के गाने हों या आंधी जैसी फिल्म, आपातकाल में हर प्रकार की अभिव्यक्ति पर पाबंदी लगा दी गई थी.' इमरजेंसी के उस काले सच को याद करते हुए किशोर कुमार के साथ हुए अन्याय को 31 वर्ष बाद फिर से याद करना प्रशंसकों के लिए सुखद है.

बहरहाल अब जबकि मोदी ने किशोर दा के हुनर की प्रशंसा की है, उनके साथ हुए अन्याय पर रोशनी डाली है तो क्या किशोर के चाहने वाले ये उम्मीद करें कि अपने इस कार्यकाल के अंतिम वर्ष में मोदी देश के इस हरदिल अज़ीज़ पाशर्व गायक और अभिनेता को भारत रत्न न सही कम से कम पद्म भूषण सम्मान से नवाजेंगे.

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