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खुदरा बाजार में एक किलो टमाटर 20 रुपए और किसानों को मिल रहे सिर्फ 3 रुपए

भारत में लगभग 40 प्रतिशत ताजा सब्जियां ग्राहकों तक पहुंचने के पहले ही खराब हो जाती हैं. इसके कई कारण होते हैं. जैसे कि बंपर फसल होना, कोल्ड स्टोरेज की कमी और जल्दी खराब हो जाने वाली फसलें

Updated On: Dec 04, 2018 03:56 PM IST

FP Staff

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खुदरा बाजार में एक किलो टमाटर 20 रुपए और किसानों को मिल रहे सिर्फ 3 रुपए

थोक बाजारों में किसानों को अपनी सब्जियों की कीमत 1 रुपए प्रति किलो या उससे भी कम मिल रही है. लेकिन वही सब्जियां जब लोग खरीदने जाते हैं तो उसके उन्हें 20-30 रुपए प्रति किलो की कीमत चुकानी होती है.

बैंगन @ 20 पैसा: महाराष्ट्र के एक किसान को उसके बैंगन की कीमत मात्र 20 पैसे प्रति किलो की मिल रही थी. इससे गुस्साए किसान ने अपनी सारी फसल को बर्बाद कर दिया ताकि उसे और घाटा न हो.

प्याज @ 1 रुपया: महाराष्ट्र के एक प्याज उत्पादक किसान को उसकी फसल की कीमत एक रुपए प्रति किलो मिली. किसान ने अपनी कमाई पीएम मोदी को भेज कर अपना विरोध दर्ज कराया. किसान ने कहा- मैंने 750 किलो प्याज उगाया था. लेकिन मुझे 1 रुपए प्रति किलो की कीमत मिल रही थी. जब मैंने थोड़ा मोलभाव किया तो 1.40 पैसे की दर से मैंने अपनी फसल बेची. 750 किलो के लिए मुझे 1,064 रुपए मिले.

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धनिया @ 2.5 रुपया: हरियाणा के करनाल स्थित थोक बाजार में पालक, गाजर और धनिया जैसी चीजें 2 रुपए से लेकर 7 रुपए प्रति किलो की दर पर मिल रही हैं. क्योंकि राज्य सरकार की फसल एमएसपी स्कीम आलू और टमाटर पर केंद्रित हैं तो इन किसानों के पास इतनी कम कीमत पर अपनी फसल बेचने के अलावा और कोई चारा भी नहीं है.

टमाटर @ 3रुपए : पुणे की खुदरा बाजार में भले टमाटर 20 रुपए किलो बिक रहा है. लेकिन इस साल टमाटर की बंपर फसल ने किसानों की हालत खराब कर दी है. थोक बाजार में किसानों को अपनी फसल 3-6 रुपए किलो के हिसाब से बेचनी पड़ रही है.

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आखिर यह स्थित क्यों है?

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक भारत में लगभग 40 प्रतिशत ताजा सब्जियां ग्राहकों तक पहुंचने के पहले ही खराब हो जाती हैं. इसके कई कारण होते हैं. जैसे कि बंपर फसल होना, कोल्ड स्टोरेज की कमी और जल्दी खराब हो जाने वाली फसलें. इसका मतलब है कि किसानों के पास अपनी फसल को जल्दी से जल्दी निकालने के अलावा कोई चारा नहीं बचता.

सब्जियों और फलों की शेल्फ लाइफ को काफी बढ़ा देने वाली फूड प्रोसेसिंग तक लोगों की पहुंच बहुती ही सीमित है. भारत में उपज के सिर्फ 2 प्रतिशत फलों की ही प्रोसेसिंग की जाती है. वहीं 35 प्रतिशत दूध प्रोसेस्ड होते हैं. इसकी तुलना में अमेरिका में 60%. यहां तक कि मोरक्को (35%) जैसे छोटे देश भी भारत की तुलना में फल और सब्ज़ियों की प्रोसेसिंग करते हैं. सरकारों के लिए ताजा सब्जियों और फसलों के लिए एक व्यव्सथा बनाने के बजाए उनका ज्यादातर ध्यान आलू, टमाटर और प्याज जैसी फसलों पर केंद्रित रहता है.

इसे उपजाता कौन है:

फल और सब्जियां अधिकतर मामूली और छोटे किसानों (2 हेक्टेयर से कम भूमि वाले) द्वारा उगाई जाती है. और कीमतों में गिरावट उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित करती है. हालांकि देश के कुल फसल वाले क्षेत्र के सिर्फ 10% से भी कम भाग में ही फल और सब्जियां उगाई जाती हैं.

इस बीच, प्रधान मंत्री मोदी ने राजस्थान में अपनी चुनावी रैली के दौरान किसानों को याद किया. साथ ही साथ जवाहरलाल नेहरू को भी नहीं भूले. मोदी ने पहले प्रधान मंत्री का नाम लिए बिना कहा था, 'वह (नेहरू) अपने कोट में गुलाब पहनते थे और बगीचों के बारे जानकारी रखते थे. लेकिन उन्हें किसानों या खेती के बारे कोई जानकारी नहीं थी. इसी कारण से किसानों को कठिनाई का सामना करना पड़ा था.'

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