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UPSC विवाद में RSS को क्यों घसीट रहे हैं राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर एक और बड़ा हमला बोला है. राहुल गांधी ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में चुने गए उम्मीदवारों को कैडर देने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव का विरोध किया है

Updated On: May 22, 2018 11:53 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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UPSC विवाद में RSS को क्यों घसीट रहे हैं राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर एक और बड़ा हमला बोला है. राहुल गांधी ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में चुने गए उम्मीदवारों को कैडर देने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव का विरोध किया है. बता दें कि केंद्र सरकार सिविल सेवा परीक्षा में चुने गए उम्मीदवारों को कैडर देने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है. पीएमओ ने इस बारे में एक नोटिस जारी किया है, जिसमें फाउंडेशन कोर्स पूरा होने के बाद कैडर बंटवारा किए जाने की बात कही गई है.

मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक ट्वीट करते हुए कहा, ‘छात्रों जाग जाओ. आपका भविष्य खतरे में है. नीचे एक पत्र है, जो आरएसएस के प्लान को उजागर करता है. आरएसएस चाहता है कि सिविल सर्विसेज में अपनी पसंद के अफसरों की तैनाती हो.’

बता दें कि भारतीय प्रशासनिक सेवा(आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा(आईपीएस) और भारतीय वन सेवा(आईएफएस) में ही चुने हुए उम्मीदवारों का कैडर बंटवारा होता है.

इन सभी सेवाओं के अधिकारियों के लिए तीन महीने का फाउंडेशन कोर्स होता आता रहा है. संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में चुने हुए उम्मीदवारों को फाउंडेशन कोर्स शुरू होने से पहले कैडर बांटा जाता है. पीएमओ इस बारे में अब जानना चाहता है कि क्या परीक्षा के आधार पर चुने गए प्रोबेशनर को फाउंडेशन कोर्स के बाद कैडर या सेवा दे सकते हैं?

पीएमओ के इस कदम की जानकारी भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी वीके सिंह के उस पत्र से होता है, जिसमें उन्होंने 17 मई को मिनिस्ट्री ऑफ कम्युनिकेशन एंड इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी के एक अधिकारी अभय कुमार सिंह को भेज कर राय मांगी है. डीओपीटी के ज्वाइंट सेक्रेटरी विजय कुमार सिंह के द्वारा भेजे गए पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि पीएमओ चाहता है कि भेजे गए प्रस्ताव पर कार्रवाई पूरी करते हुए इसी साल इसे लागू कर दिया जाए.

डीओपीटी इस पत्र के माध्यम से जानना चाहता है कि परीक्षा के आधार पर चुने गए प्रोबेशनर को क्या फाउंडेशन कोर्स के बाद कैडर या सेवा दे सकते हैं? पत्र में फाउंडेशन कोर्स में कामकाज को तरजीह और फाउंडेशन कोर्स के मार्क्स को जोड़कर कैडर देने की संभावना पर जोर दिया गया है.

अब सवाल यह उठता है कि केंद्र का नए सिरे से कैडर निर्धारित करने का यह विचार कितना तर्कसंगत और कितना लाभदायक है. अगर पीएमओ की तरफ से डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग(डीओपीटी) को भेजे प्रस्ताव पर अमल किया गया तो सिविल सेवा परीक्षा के साथ फाउंडेशन कोर्स में जुटाए गए मार्क्स के आधार पर ही तय होगा कि कौन आईएस और कौन आईपीएस के लिए चुना जाएगा.

बता दें कि फिलहाल यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में चुने गए उम्मीदवारों को कैडर आवंटन फाउंडेशन कोर्स से पहले किया जाता है, लेकिन पीएमओ अब इस कैडर का आवंटन कोर्स के बाद करना चाहता है. इस सिस्टम के लागू होने के बाद कम रैंक वाले उम्मीदवार भी आईएएस और आईपीएस बन सकते हैं.

क्या होता है फाउंडेशन कोर्स?

आपको बता दें कि फाउंडेशन कोर्स सिविल सेवा पास करने वाले उम्मीदवारों को प्रशासन के कामकाज से जुड़ी ट्रेनिंग का एक हिस्सा है. चुने हुए उम्मीदवार गांव-शहर जाकर वहां के लोगों से मिलकर जानकारी हासिल करते हैं. उम्मीदवारों को इस कोर्स के जरिए इकोनॉमिक्स, हिस्ट्री, सिविल एंड क्रिमिनल कोर्ट लॉ, सीआरपीसी, कल्चर और मानवाधिकार सहित कई विषयों की जानकारी दी जाती है. फाउंडेशन कोर्स इस समय 400 नंबर के होते हैं.

1982 बैच के बिहार कैडर के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘देखिए हमारे देश में तीन तरह की ऑल इंडिया सर्विसेज हैं. आईएस, आईपीएस और आईएफएस. यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा के बाद जब रिजल्ट आता है तो उम्मीदवार अनुमान लगा लेता है कि मेरा कैडर कौन सा होगा. कई उम्मीदवारों को संभावना रहती है कि उनका होम स्टेट मिल जाएगा और वो ज्वाइन भी कर लेते हैं, लेकिन हाल में बहुत केस ऐसे भी आए हैं कि सफल उम्मीदवार होम कैडर या होम स्टेट नहीं मिलने पर ज्वाइन नहीं करते और दोबारा से परीक्षा देते हैं.’

अधिकारी आगे कहते हैं, ‘फाउंडेशन कोर्स में मार्क्स देने के बाद रैंक बदलने का पहला नुकसान यह होगा कि उम्मीदवारों में अनिश्चितता बनी रहेगी. आईएएस में तो मोटा-मोटी रैंक तय रहता है, लेकिन खासतौर पर आईपीएस रैंक वालों में अनिश्चितता बनी रहती है. इसका सकारात्मक पहलू यह है कि फाउंडेशन कोर्स में कुछ लोग बढ़िया करते हैं. मान लीजिए कि कोई छात्र साइंस बैकग्राउंड से गया हुआ है और फाउंडेशन कोर्स में लॉ, इकोनॉमिक्स, ट्रांसमिशन पढ़ाया जाता है. स्वाभाविक सी बात है कि साइंस बैकग्राउंड के छात्रों को दिक्कत आएगी. इस स्थिति में फाउंडेशन कोर्स के मार्क्स को जोड़ने या घटाने पर उनको फायदा होगा जिनका मेरिट लिस्ट में नाम नीचे है. लेकिन, जिनका मेरिट लिस्ट में रैंक ऊंची है और साइंस बैकग्राउंड के हैं तो उनको फाउंडेशन कोर्स के बाद परेशानी हो सकती है.’

अधिकारी आगे कहते हैं, ‘देखिए इसका नफा-नुकसान दोनों हैं. नफा यह है कि आपने फाउंडेशन कोर्स में मेहनत की तो आप रैंक अच्छी कर सकते हैं और अगर आपने फाउंडेशन कोर्स में उतना ध्यान नहीं दिया तो आपकी रैंक नीचे आ सकती है. अगर सेलेक्शन के बाद फाउंडेशन कोर्स में कंप्टीशन होता है तो इसमें किसी को क्यों परहेज करना चाहिए? फाउंडेशन कोर्स के बाद ही ऑल इंडिया मैरिट लिस्ट तय होती है. लेकिन जब स्टेट मिल जाता है तो उसमें कोई बदलाव नहीं होता है. जब आप स्टेट में रहते हैं तो आपका प्रोमोशन वगैरह स्टेट में ही होता है. सेंटर में जो अधिकारी जाते हैं तो उसे इम्पैनलमेंट कहते हैं. इम्पैनलमेंट का संबंध आपके मेरिट से नहीं होता है उसका संबंध आपके सर्विस रिकॉर्ड(एसीआर) कैसा लिखा जा रहा है, उससे होता है. आप बहुत दबंग और निर्भीक अफसर हैं, लकिन आपका एसीआर अच्छा नहीं है तो आपको इंम्पैनलमैंट में कठिनाई होती है. दूसरा एज फैक्टर भी काफी महत्वूपर्ण है.’

फर्स्टपोस्ट हिंदी ने कई आईएएस अधिकारियों से बात की. सभी अधिकारियों ने केंद्र के इस कदम को सही दिशा में उठाया गया कदम करार दिया. साल 1989 में देश के जानेमाने इतिहासकार सतीश चंद्रा ने भी सरकार को सुझाव दिया था कि सिविल सर्विसेज परीक्षा में जिस तरह से प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा के अंक जोड़े जाते हैं उसी तरह से फाउंडेशन कोर्स के अंक भी जोड़े जाएं.

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