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जानिए क्रूड ऑयल के दाम गिरने के बाद भी क्यों नहीं कम होती पेट्रोल-डीजल की कीमतें

एक अक्टूबर से क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 24 फीसदी कमी आई है. पेट्रोल की कीमतें इस बीच 8.8 फीसद कम हुई हैं

Updated On: Nov 23, 2018 01:31 PM IST

FP Staff

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जानिए क्रूड ऑयल के दाम गिरने के बाद भी क्यों नहीं कम होती पेट्रोल-डीजल की कीमतें

पिछले करीब डेढ़ महीने से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में गिरावट आ रही है. इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम गिरने की वजह से ऐसा हो रहा है. इस वजह से रुपए में भी मजबूती आई है. लेकिन सवाल ये है कि क्या इंटरनेशनल मार्केट में जितने दाम गिरे हैं, भारतीय ग्राहकों को उसका पूरा फायदा मिल रहा है?

शुक्रवार को भी पेट्रोल और डीजल के दाम कम हुए हैं. इस समय दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 75.57 रुपए और डीजल की 70.56 रुपए प्रति लीटर है. मुंबई में दाम 40 पैसे कम होकर पेट्रोल के 81.10 रुपए और डीजल के 73.91 रुपए हुए हैं. चेन्नई में पेट्रोल के रेट 78 रुपए 46 पैसे और कोलकाता में 77 रुपए 53 पैसे हैं. उत्तर प्रदेश के नोएडा में पेट्रोल शुक्रवार को 74 रुपए 30 पैसे और डीजल 69 रुपए दो पैसे है. नवंबर में पेट्रोल की कीमत करीब चार रुपए और डीजल की तीन रुपए दस पैसे कम हुई है.

अब असली सवाल. एक अक्टूबर से क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 24 फीसदी कमी आई है. पेट्रोल की कीमतें इस बीच 8.8 फीसद कम हुई हैं. ऐसा क्यों हुआ है? इसके तकनीकी पहलुओं पर तमाम विशेषज्ञ अपनी बातें रख सकते हैं. अंग्रेजी अखबार द हिंदू के अनुसार एक विशेषज्ञ ने कहा है कि भारत में यह उम्मीद नहीं कर सकते कि जिस अनुपात में इंटरनेशनल मार्केट में दाम गिरेंगे, ग्राहकों को उसी अनुपात में फायदा हो. लेकिन इतने लंबे समय तक इतना बड़ा गैप नहीं होना चाहिए.

द हिंदू को दिए अपने बयान में ऑयल एंड गैस इंडस्ट्री प्रैक्टिस, PwC इंडिया के पार्टनर और लीडर दीपक माहुरकर ने कहा है, ‘पेट्रोल के दाम तय होना जटिल प्रक्रिया है. जो लोग सीधे जुड़े नहीं हैं, उनके लिए इसे समझना बहुत मुश्किल है. कीमतों में इंटरनेशनल प्रॉडक्ट की कीमतों के अलावा इन-लैंड कीमतों का भी फर्क पड़ता है.’ इसके साथ डीलर के कमीशन का हिस्सा भी फर्क डालता है.

उदाहरण के लिए मान लेते हैं कि ग्लोबल प्राइस पर बैरेल 65 डॉलर है. उसके बाद ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा, क्रॉस सब्सिडी घाटा, हैंडलिंग का घाटा, एक्सपोर्ट पैरिटी यानी निर्यात समता कीमत, डीलर कमीशन और फिर अलग-अलग जगहों के टैक्स.. ये सब जोड़ने के बाद कीमत आती है.

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