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पॉक्सो एक्ट में संशोधन के बाद PMO विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट को लेकर क्यों है सख्त?

नरेंद्र मोदी सरकार ने पॉक्सो कानून में संशोधन के साथ राज्यों में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन करने की मांग को अब गंभीरता से लिया है.

Updated On: May 22, 2018 04:04 PM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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पॉक्सो एक्ट में संशोधन के बाद PMO विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट को लेकर क्यों है सख्त?

केजरीवाल सरकार दिल्ली में 33 विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन करने पर विचार कर रही है. पिछले महीने ही पीएमओ ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन करने का निर्देश जारी किया था. पीएमओ ने राज्य सरकारों को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन करने के लिए तीन खास चीजों पर ध्यान देने को कहा था.

पहला, सभी राज्य सरकारें केस के हिसाब से फास्ट ट्रैक कोर्ट की संख्या में बढ़ोतरी करें. इसके लिए फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसल) आधुनिकतम बनाए जाएं. एफएसल किट्स आधुनिकतम होने चाहिए. अक्सर देखा जाता है कि रेप के मामलों में आरोपी का डीएनए जांच कर ही सत्यता बता दी जाती है. इससे अदालत में आरोप साबित नहीं हो पाते हैं और गुनाहगार बरी हो कर फिर से वही क्राइम कर जाता है. दूसरा, प्रोसेक्यूशन विंग को पीएमओ ने बेहतर करने को कहा है. तीसरा, हर स्टेट को अब मिशन डायरेक्टर नियुक्त करना अनिवार्य होगा.

इस निर्दश के बाद दिल्ली सरकार 33 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने पर विचार कर रही है. पिछले सप्ताह ही दिल्ली सरकार के आलाधिकारियों ने इस विषय पर गृह मंत्रालय में हुई बैठक में भाग लिया था.

बता दें कि पीएमओ को सभी राज्यों से इनपुट मिलने भी शुरू हो गए हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि बहुत जल्द ही पीएमओ कैबिनेट नोट बना कर इसको अंतिम रूप देने जा रही है.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi speaks during the inauguration of Delhi End TB summit at Vigyan Bhawan in New Delhi on Tuesday.PTI Photo by Shahbaz Khan (PTI3_13_2018_000058B)

पिछले महीने ही पीएमओ ने देश के सभी राज्य सरकारों को निर्देश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि दुष्कर्म मामले के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएं. खासतौर पर पीएमओ ने सभी राज्य सरकारों को विशेष फोरेंसिक लैब बनाने और स्पेशल फोरेंसिक किट्स की व्यवस्था करने को कहा था. पीएमओ ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह भी रिपोर्ट मांगी थी कि उनके यहां फोरेंसिक लैब कितने आधुनिक हैं.

पीएमओ ने खासतौर पर रेप के केस के रिसर्च के लिए फोरेंसिक लैब में नए प्रयोग के लिए आवश्यकता के लिए सूची तैयार करने को कहा था. केंद्र सरकार ने इसके साथ ही देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिशन डायरेक्टर नियुक्त करने को भी कहा है.

बता दें कि दुष्कर्म मामले में अनुसंधान फोरेंसिक लैब से टेस्ट और कोर्ट की प्रक्रिया को मिलाकर कई एजेंसियों का काम है. इसलिए इस काम के लिए एक मिशन डायरेक्टर नियुक्त करना अब अनिवार्य हो गया है. मिशन डायरेक्टर का काम होगा कि वह सभी विभागों से समन्वय स्थापित करे.

दूसरी तरफ पीएमओ ने सभी राज्य सरकारों को लंबित बलात्कार मामलों का एक डाटाबेस भी तैयार करने को कहा है. दिल्ली में यह काम नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो(एनसीआरबी) को दिया गया है.

बता दें पिछले महीने ही रेप कानून को मजबूत बनाने की दिशा में देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (पॉक्सो एक्ट) में बदलाव लाने वाले अध्यादेश पर दस्तखत किया था. इस नए अध्यादेश के अनुसार, 12 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के दोषियों को मौत की सजा दी जाएगी. जबकि, 16 साल से कम उम्र की लड़की से रेप करने वाले को दी जानेवाली सजा को 10 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दिया गया है. दोषी को उम्रकैद भी हो सकती है.

आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश 2018 के अनुसार ऐसे मामलों से निपटने के लिए नई त्वरित अदालतें (फास्ट ट्रैक कोर्ट) गठित की जाएंगी. साथ ही सभी पुलिस थानों और अस्पतालों को बलात्कार मामलों की जांच के लिए विशेष फॉरेंसिक किट उपलब्ध कराई जाएगी.

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अध्यादेश का हवाला देते हुए अधिकारियों ने बताया कि इसमें विशेषकर 16 और 12 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार के मामलों में दोषियों के लिए सख्त सजा की अनुमति है.

पिछले दिनों में उन्नाव और कठुआ रेप की घटनाओं को लेकर देश भर में गुस्से का माहौल था. इन दोनों मामलों में राज्य सरकारों पर गंभीरता से नहीं लेने के आरोप लगे थे. समाज के हर वर्ग से बलात्कारियों को कठोर सजा देने की उठती मांग को देखते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने पॉक्सो कानून में संशोधन के साथ राज्यों में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन करने की मांग को अब गंभीरता से लिया है.

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