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12 वर्षीय बच्ची की गुमशुदगी से क्यों मुश्किल में है खट्टर सरकार

16 अक्टूबर को जाटलैंड (बावल-84 यानी 84 गांवों की खाप महापंचायत) ने मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर की रैली में काले झंडे दिखाने का फैसला किया है.

Updated On: Oct 08, 2018 02:45 PM IST

Jyoti Yadav Jyoti Yadav
स्वतंत्र पत्रकार

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12 वर्षीय बच्ची की गुमशुदगी से क्यों मुश्किल में है खट्टर सरकार

रेवाड़ी जिले के मोहनपुर गांव से 27 जून 2018 को एक दलित परिवार की बेटी गायब हो गई. तमाम धरनों और नारेबाजी के बाद भी पुलिस उसे तीन महीने से खोज नहीं पाई है. अब इस मामले को गुड़गांव की क्राइम ब्रांच को दे दिया गया है. पर अब ये घटना राजनीतिक रूप ले चुकी है. राज्य की बीजेपी सरकार के खिलाफ लोगों में गुस्सा भरा हुआ है. 16 अक्टूबर को जाटलैंड (बावल-84 यानी 84 गांवों की खाप महापंचायत) ने मुख्यमंत्री मनोहर खट्टर की रैली में काले झंडे दिखाने का फैसला किया है.

क्या थी घटना?

हनपुर गांव के सोनू मजदूरी करते हैं. उनके बड़े भाई परचून की दुकान चलाते हैं. 27 जून को जब सोनू काम करने बाहर गए तो शाम के 4-5 बजे उनकी 12 साल की बेटी शिवानी गायब हो गई. शिवानी गांव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ती है. इस बार उसने नौवीं कक्षा में दाखिला लिया था.

सोनू का कहना है कि 28 तारीख को बावल पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करा दी गई थी. पुलिस ने शक के आधार पर पड़ोसियों से पूछताछ की और फिर केस में आगे कुछ नहीं बताया. शिवानी सोनू के पड़ोसियों के घर अक्सर खेलने जाया करती थी. शिवानी के गायब होने के बाद उनकी पड़ोसियों से कोई बातचीत नहीं है.

400 घरों वाले इस गांव की सरपंच एक महिला कविता हैं. लेकिन उनका सारा काम उनके जेठ रणवीर देखते हैं. रणवीर ने बताया कि उन्होंने पीड़ित परिवार के साथ जाकर एफआईआर दर्ज करा दी. लेकिन अब तक पुलिस इस मामले की ठीक से तहकीकात नहीं कर रही है. उनके गांव में ऐसी ये पहली घटना है. हालांकि बावल-84 महापंचायत के अध्यक्ष सुमेर सिंह जेलदार ने कहा कि जिले में ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं. इसके अलावा भी कई तरह के क्राइम बढ़ गये हैं.

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बावल पुलिस के SHO नरेंद्र हैं. उनसे इस मामले की पूछताछ करने पर पता चला इस लड़की का केस क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है.

नेताओं के बयान और महापंचायत के बाद लोगों का गुस्सा बढ़ा

4 अक्टूबर बावल-84 की महापंचायत ने छह घंटे बैठक की. क्राइम ब्रांच को मामला सौंपने के बाद भी लड़की की बरामदगी नहीं होने पर तय हुआ कि जनस्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉक्टर बनवारी लाल के घर के सामने अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा. पर लोगों का कहना है कि धरना देने पर डॉक्टर बनवारी लाल ने रोष जताया कि उनको मीटिंग में आने का न्योता नहीं मिला. लोगों में काफी रोष है कि ये कोई शादी-विवाह का मौका नहीं था कि न्योता दिया जाएगा. इससे पहले एक महीने तक चले धरने के बाद उद्योग मंत्री विपुल गोयल के आश्वासन पर धरना समाप्त किया गया था. सुमेर सिंह ने बताया कि विपुल गोयल ने कहा था कि लड़की सेफ है. ये उन्होंने कैसे कहा, किसी को नहीं पता. लोगों का ये भी कहना है कि पुलिस आरोपी को बचा रही है.

महापंचायत ने लड़की की बरामदगी के लिए 51 सदस्यों की समिति बनाई है. 10 अक्टूबर को बावल बंद रखा जाएगा और 16 अक्टूबर को बावल में मुख्यमंत्री की होनेवाली रैली के बहिष्कार की संभावना है.

क्या चल रहा है हरियाणा की राजनीति में

राव इंदरजीत सिंह ( तस्वीर फेसबुक से साभार )

राव इंदरजीत सिंह ( तस्वीर फेसबुक से साभार )

गुड़गांव से 73 वर्षीय बीजेपी सांसद राव इंदरजीत सिंह ने हाल-फिलहाल में हरियाणा की खट्टर सरकार के खिलाफ बयान दिए थे कि वो सांसदों का उचित सम्मान नहीं कर रहे हैं. इंदरजीत सिंह ने कई बार ये कहा है कि 2014 में हरियाणा विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जीत के बाद वो मुख्यमंत्री बनना चाहते थे. पर बीजेपी ने मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बना दिया. राव इंदरजीत के पिता राव बिरेंदर सिंह 1967 में हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे. राव बिरेंदर हरियाणा के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी राव तुलाराम के वंशज हैं. राव तुलाराम को बहादुरशाह जफर ने 1857 में राजा घोषित किया था.

अहीरवाल क्षेत्र से ही इनकी राजनीति चमकी. राव इंदरजीत हाल-फिलहाल में कई रैलियां कर रहे हैं. हालांकि वो कहते रहे हैं कि 2019 को लेकर उनका कोई प्लान नहीं है. पर राजनीति को करीब से देखनेवाले कह रहे हैं कि उनकी नजर मुख्यमंत्री पद पर है.

ऐसा कहा जा रहा है कि खट्टर सरकार के खिलाफ जनता का रोष राव इंदरजीत के पक्ष में जाएगा. गौरतलब है कि इससे पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा की सरकार पर दलितों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में कुछ न करने के आरोप लगे थे. इसी वजह से उनकी सरकार की प्रसिद्धि में गिरावट आई थी. खट्टर सरकार ने दलितों और औरतों की सुरक्षा के नाम पर वोट बटोरे थे. वो सारे दावे जुमले साबित हो रहे हैं. हाल-फिलहाल में हरियाणा से दलितों और औरतों के खिलाफ प्रताड़ना के कई मामले आए हैं.

2015 में बावल में हुई धन्यवाद रैली में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रेवाड़ी के मनेठी में एम्स खोलने का वादा किया था. जनता में काफी खुशी थी कि पूरे अहीरवाल और राजस्थान के लोगों को भी इससे फायदा होगा. पर तीन साल बाद मनोहर लाल खट्टर अपने इस वादे से पीछे होते नजर आ रहे हैं. एम्स बनना तो दूर, उसके नाम पर सांस भी नहीं लिया जा रहा. इस क्षेत्र के लोग ये मान रहे हैं कि जाट सरकार अहीरवाल के विकास पर ध्यान नहीं दे रही.

हालांकि राव इंदरजीत सिंह ने लड़की की गुमशुदगी मामले को लेकर कुछ खास नहीं किया है, पर पूरे प्रदर्शन को उनके साथ जोड़कर देखा जा रहा है.

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