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भगोड़े विजय माल्या को ब्रिटेन से भारत लाना कठिन क्यों है?

पिछले 15 साल में प्रत्यर्पण मामले में भारत की कामयाबी दर केवल 36 फीसदी है. भारत प्रत्येक 3 में से केवल 1 का ही प्रत्यर्पण कर पाने में कामयाब रहा है

Updated On: Oct 03, 2017 10:47 PM IST

FP Staff

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भगोड़े विजय माल्या को ब्रिटेन से भारत लाना कठिन क्यों है?

शराब कारोबारी विजय माल्या को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मंगलवार को ब्रिटेन में दूसरी बार गिरफ्तार किया गया. मगर जैसा अप्रैल में हुआ था, गिरफ्तारी के कुछ देर बाद उन्हें फिर से जमानत मिल गई.

दिसंबर में माल्या के प्रत्यर्पण की संभावना को देखते हुए सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय उम्मीद जता रहे हैं कि उन्हें माल्या से पूछताछ करने की इजाजत मिलेगी. हालांकि, ये काफी चुनौतीपूर्ण लगता है क्योंकि डाटा जर्नलिज्म पोर्टल Factly.in पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 15 साल में प्रत्यर्पण मामले में भारत की कामयाबी दर केवल 36 फीसदी है.

इसका मतलब यह कि भारत प्रत्येक तीन में से केवल एक का ही प्रत्यर्पण कर पाने में कामयाब रहा.

पोर्टल ने अपने रिपोर्ट में कहा कि 6 दिसंबर, 2016 के दिन लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में बताया गया कि साल 2002 से लेकर 2016 तक केवल 62 भगोड़ों का ही विदेशों से भारत प्रत्यर्पण किया जा सका है. 110 भगोड़ों को अब भी भारत लाया जाना बाकी है. इसके बारे में भारत सरकार ने पहले से आधिकारिक तौर पर आवेदन दे रखा है.

लोकसभा में दिए गए जवाब के अनुसार, जुलाई 2016 तक ब्रिटेन के पास प्रत्यर्पण के लिए 16 आवेदन पेंडिंग पड़े हैं. इनमें से केवल एक, समीरभाई वीनूभाई पटेल नाम के भारतीय नागरिक का ही प्रत्यर्पण हो सका है. पटेल पर हत्या का आरोप है.

भारत का यूएई के साथ सबसे ज्यादा 18 प्रत्यर्पण हुआ है. अमेरिका के साथ 9 मामलों में प्रत्यर्पण हुआ है. जबकि कनाडा और थाइलैंड से 4-4 प्रत्यर्पण संभव हो सका है. जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका से 3 प्रत्यर्पण हुए हैं.

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