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भारत को इस वक्त बुलेट ट्रेन की जरूरत क्यों नहीं है?

हकीकत डरावनी है. हाल ये है कि इन दिनों में हमने इतनी ट्रेन दुर्घटनाओं के बारे में सुन रखा है कि बुलेट ट्रेन के नाम से ही डर लगने लगता है

Vivek Anand Vivek Anand Updated On: Sep 14, 2017 08:07 PM IST

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भारत को इस वक्त बुलेट ट्रेन की जरूरत क्यों नहीं है?

2022 तक देश को बुलेट ट्रेन मिलने वाला है. देश को नई रफ्तार मिलने के दावे हो रहे हैं. लेकिन 2017 की हकीकत ये है कि जिस दिन बुलेट ट्रेन का भारीभरकम शिलान्यास वाला जलसा होता है, उसी दिन देश की राजधानी दिल्ली में राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेन डिरेल हो जाती है. बुलेट ट्रेन का ख्वाब बड़ा अच्छा लगता है लेकिन इस ख्वाब से हकीकत का मिलान करने पर निराशा हाथ लगती है.

कहने को कहा जा सकता है कि विकास के हर बड़े फैसले के खिलाफ पहले पहल ऐसी ही आलोचनात्मक आवाज उठती है. कंप्यूटर क्रांति से लेकर मोबाइल के दौर आने से पहले तक इसके खिलाफ आवाजें उठीं. लेकिन सिर्फ इस बिना पर बुलेट ट्रेन की बात छेड़कर भारतीय रेलवे की वर्तमान हकीकत से मुंह मोड़ लेना ठीक है?

क्या हम इस बात से इनकार कर सकते हैं कि बुलेट ट्रेन के जिस सपने को चीन जापान ने वर्षों पहले साकार कर लिया उसके लिए हमारे पास अब तक जरूरी संसाधन तक नहीं हैं. जापान की मदद से हम कुछ सौ किलोमीटर का सफर तो पूरा कर लेंगे लेकिन देश में बिछे सैकड़ों किलोमीटर तक फैले रेल के जाल को बिना मजबूत किए, सिर्फ बुलेट ट्रेन के नाम का जाप करना तूफान को देखकर भी शुतुरमुर्ग की तरह मुंह छिपाना नहीं है?

अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे के साथ बुलेट ट्रेन पर काम शुरू करने की आधारशिला रख रहे थे. उस वक्त पूरा माहौल रोमांच से भर गया.

अहमदाबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे के साथ बुलेट ट्रेन पर काम शुरू करने की आधारशिला रख रहे थे. उस वक्त पूरा माहौल रोमांच से भर गया.

बुलेट ट्रेन के जरिए हम देश की परिवहन व्यवस्था को रफ्तार देना चाहते हैं और ट्रेनों की असलियत ये है कि एक के बाद एक ट्रेनें पटरियों से उतर रही हैं. गुरुवार को सुबह-सुबह दिल्ली रेलवे स्टेशन के नजदीक जम्मू तवी-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस की एक बोगी पटरी से उतर गयी. हालांकि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ. लेकिन इसकी गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि ऐसे हादसों के बाद बरती जा रही सख्ती के बाद भी ट्रेनों का पटरियों से उतरना जारी है. राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेन देश की राजधानी दिल्ली में आकर पटरी से उतर जाती है.

इसके पहले 7 सितंबर को भी दिल्ली रेलवे स्टेशन के नजदीक मिंटो ब्रिज के पास रांची दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस का इंजन और पावर कार पटरी से उतर गए थे. हादसे में एक व्यक्ति घायल हो गया था. इसी दिन सुबह साढ़े छह बजे यूपी के सोनभद्र जिले के ओबरा डैम स्टेशन पर शक्तिपुंज एक्सप्रेस के सात डिब्बे पटरी से उतर गए थे. इतना ही नहीं सात सितंबर को ही महाराष्ट्र के खंडाला में एक मालगाड़ी के दो डिब्बे पटरी से उतर गए थे. यानी सिर्फ एक दिन में तीन ट्रेनें पटरियों से उतरकर हादसे का शिकार हुई. उसके पहले लगातार ट्रेन डिरेलमेंट की कड़ी में कैफियत एक्सप्रेस दुर्घटना का शिकार हुई थी.

सिर्फ 2017 की कुछ बड़ी ट्रेन दुर्घटनाओं पर नजर डालें तो-

- 22 जनवरी, 2017- जगदलपुर-भुवनेश्वर हीराखंड एक्सप्रेस आंध्र प्रदेश के विजयानगरम जिले में दुर्घटनाग्रस्‍त हो गई. दुर्घटना में 27 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 36 घायल हो गए थे.

- 20 फरवरी, 2017- दिल्ली जा रही कालिंदी एक्सप्रेस उत्‍तर प्रदेश के टुंडला जंक्शन पर हादसे का शिकार हो गए. दो ट्रेनों (एक सवारी और एक मालगाड़ी) की टक्कर में तीन डिब्बे और इंजन पटरी से उतर गए थे.

- 3 मार्च, 2017- भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में बम विस्‍फोट हुआ. घटना के पीछे आतंकियों का हाथ बताया गया.

- 17 मार्च, 2017- बेंगलुरु के चित्रादुर्गा जिले में एक एंबुलेंस और ट्रेन की टक्‍कर में चार महिलाओं की मौत हो गई. दुर्घटना एंबुलेंस के मानवरहित क्रॉसिंग को पार करने के दौरान हुई.

- 30 मार्च, 2017- उत्‍तर प्रदेश के कुलपहाड़ स्टेशन के करीब लाडपुर और सूपा के बीच महाकौशल एक्सप्रेस पटरी से उतर गई. दुर्घटना में करीब पांच दर्जन यात्री घायल हो गए.

- 9 अप्रैल, 2017- पश्चिम बंगाल के हावड़ा-खड़गपुर खंड पर मालगाड़ी का इंजन पटरी से उतर गया.

- 15 अप्रैल, 2017- उत्‍तर प्रदेश के मेरठ से लखनऊ जा रही राज्यरानी इंटरसिटी एक्सप्रेस के आठ डिब्बे पटरी से उतर गए. दुर्घटना में 60 से अधिक यात्री घायल हो गए.

- 23 अप्रैल, 2017- बिहार में सहरसा-पटना राज्यरानी एक्सप्रेस की दो बोगियां पटरी से उतर गई.

- 21 मई, 2017- उन्नाव रेलवे स्टेशन पर लोकमान्य तिलक सुपरफास्ट एक्सप्रेस के आठ डिब्बे पटरी से उतर गए.

- 19 अगस्‍त, 2017- उत्‍तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के खतौली में पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस की छह बोगियां पटरी से उतर गईं. हादसे में 23 की मौत हो गई, जबकि करीब सौ घायल हो गए.

- 23 अगस्‍त, 2017- कानपुर और इटावा के बीच औरैया जिले में आजमगढ़ से दिल्ली जा रही 12225 (अप) कैफियत एक्सप्रेस औरैया के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई. ट्रेन मानवरहित फाटक पर देर रात ट्रेन एक डंपर से टकरा गई.

- 29 अगस्‍त, 2017- नागपुर-मुंबई दूरंतो एक्सप्रेस का ईंजन और नौ डिब्बे भूस्खलन के चलते महाराष्ट्र के वासिंद और आसनगांव स्टेशनों के बीच पटरी से उतर गए.

हकीकत डरावनी है. हाल ये है कि इन दिनों में हमने इतनी ट्रेन दुर्घटनाओं के बारे में सुन रखा है कि बुलेट ट्रेन के नाम से ही डर लगने लगता है. सोचने वाली बात है कि अगर 80-100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों के इतने भयानक हादसे हो सकते हैं तो 350 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली बुलेट ट्रेन अगर दुर्भाग्यवश किसी हादसे का शिकार होती है तो सोचा जा सकता है कि कैसा खौफनाक मंजर हो सकता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

बुलेट ट्रेन की बात करके पिछले कुछ दिनों में हुए बड़े ट्रेन हादसों की चर्चा को थोड़ी देर के लिए पीछे छोड़ा जा सकता है लेकिन बदहाल रेलवे व्यवस्था से मुंह नहीं चुराया जा सकता. लगातार ट्रेन हादसों की वजह से मोदी सरकार की किरकिरी हुई है. रेलवे के ऊपर से लेकर नीचे तक के अधिकारी बदले गए हैं. सुरेश प्रभु को हटाकर पीयूष गोयल को रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. लेकिन भारतीय रेल के ऊपर जो दबाव है, जिसकी वजह से लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं, उस दिशा में कोई बदलाव नहीं दिखता.

बुलेट ट्रेन कोई आज का सपना नहीं है. जापान और चीन को देखकर हम वर्षों से बुलेट ट्रेन का सपना संजोए हुए हैं. लेकिन इसके पहले रेलवे की हालत देखकर इतना हौसला नहीं होता था कि इसे साकार करने के बारे में सोच सके. जिस वक्त लालू प्रसाद यादव भारत के रेल मंत्री थे, उन्होंन अपनी जापान यात्रा के दौरान देश में बुलेट ट्रेन लाने की चर्चा छेड़ी थी. लेकिन चर्चा हवा हवाई हो गई.

इसमें कोई शक नहीं कि भारत में बुलेट ट्रेन की शुरुआत एक बड़ी कामयाबी होगी. इस वक्त विश्व के जिन देशों में तेज रफ्तार वाली ट्रेनें चलाई जा रही है, उनमें चीन, जापान, फ्रांस, जर्मनी, रूस, इटली, पोलैंड, दक्षिण कोरिया, ताईवान, तुर्की, अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, पुर्तगाल, उजबेकिस्तान, स्वीडन, आस्ट्रिया और बेल्जियम जैसे देश शामिल हैं. चीन ने अपने यहां बुलेट ट्रेन की शुरुआत की और विश्व में सबसे अधिक दूरी तक की बुलेट ट्रेन रेल लाइन बिछाने वाले देशों में भी शामिल हो गया. चीन ने अब तक करीब 20 हजार किलोमीटर तक की रेल लाइन बिछाने में सफलता हासिल की है. इस स्तर तक पहुंचने में हमें अभी भी लंबा इंतजार करना होगा.

पीएम मोदी बोले कि बंधे हुए सपनों के साथ आगे बढ़ना मुश्किल है, रेलवे के बाद ही अमेरिका का भी विस्तार हुआ है. बुलेट ट्रेन ने ही जापान को बदला है.

पीएम मोदी बोले कि बंधे हुए सपनों के साथ आगे बढ़ना मुश्किल है, रेलवे के बाद ही अमेरिका का भी विस्तार हुआ है. बुलेट ट्रेन ने ही जापान को बदला है.

बुलेट ट्रेन चलाने में अभी भी कुछ बड़ी मुश्किलें भी सामने आने वाली हैं. जिसके बारे में गंभीरता से विचार करने की जरूरत है. इसके लिए रेल लाइन से लेकर रेलवे स्टेशन, नियंत्रण कक्ष, स्टाफ और इससे संबंधित सभी तकनीकी व्यवस्थाएं अलग से करनी पड़ती हैं. बुलेट ट्रेन की नई रेल लाइन बिछाने के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाएगा. इसके अलावा स्टेशन, स्टॉफ से लेकर नियंत्रण केंद्र तक का पूरा ढांचा नए सिरे से तैयार किया जाएगा. इन्हीं सब की वजह से एक लाख करोड़ रुपए जैसी भारीभरकम रकम खर्च होगी. इसलिए इसका किराया भी तकरीबन हवाई जहाज के किराए के बराबर होगा.

उम्मीद की जा रही है कि अहमदाबाद और मुंबई के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन के टिकट की कीमत 2700 से 3000 रुपए के आसपास होगी. इस दूरी के लिए हवाई टिकटों की कीमत 3,500 से 4,000 रुपए के आसपास हैं. अगर टिकट की कीमतें आसपास रहती हैं तो फिर कोई बुलेट ट्रेन से यात्रा क्यों करना चाहेगा?

विशेषज्ञ शुरुआत से ही बुलेट ट्रेन की परियोजना के भारीभरकम लागत को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं. सवाल है कि अट्टासी हजार करोड़ की रकम जापान से उधार लेकर देश में तेज रफ्तार वाली ट्रेन चलाया जाना ज्यादा जरूरी है या देश की वर्तमान रेल व्यवस्था और उसके मौजूदा रेल ढांचे में सुधार जरूरी है?

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