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तो इस वजह से श्रीहरिकोटा से ही लॉन्च किए जाते हैं सेटेलाइट

अंतरिक्ष में जाती हुई किसी भी वस्तु से कुछ भी गिर सकता है. ऐसे में पूर्व दिशा में दूर तक बंगाल की खाड़ी और बहुत कम आबादी होने के कारण इस जगह को सुरक्षित माना जाता है

FP Staff Updated On: Jan 12, 2018 03:54 PM IST

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तो इस वजह से श्रीहरिकोटा से ही लॉन्च किए जाते हैं सेटेलाइट

श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर भारत में उपग्रह प्रक्षेपण करने की इसरो की सबसे पसंदीदा लोकेशन है. इस जगह से साल 1971 में पहली बार रोहिणी 125 साउंड रॉकेट प्रक्षेपित किया गया था, जिसके बाद जनवरी 2018 में इस स्थान से 100वां प्रक्षेपण किया गया. आइए जानते हैं आखिर क्यों श्रीहरिकोटा उपग्रह प्रक्षेपण के लिए इतना खास है...

भूमध्य रेखा के पास स्थित श्रीहरिकोटा भू-स्थिर उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए सबसे आदर्श स्थान माना जाता है. पृथ्वी के भ्रमण करने के कारण, इसकी लोकेशन इसे प्रक्षेपण के समय अतिरिक्त 0.4 किमी प्रति सेकेंड की वेलॉसिटी प्रदान करती है.

पूर्व दिशा की ओर प्रक्षेपण करने के लिए सबसे आदर्श स्थान

अंतरिक्ष में जाती हुई किसी भी वस्तु से कुछ भी गिर सकता है. ऐसे में पूर्व दिशा में दूर तक बंगाल की खाड़ी और बहुत कम आबादी होने के कारण इस जगह को सुरक्षित माना जाता है. ज्यादातर उपग्रह पूर्व दिशा की ओर ही प्रक्षेपित किए जाते हैं. ऐसे में श्रीहरिकोटा का यह गुण उसे और भी खास बना देता है.

'एक्सीडेंट प्रोन एरिया' से है काफी दूर

उपग्रह प्रक्षेपण करने वाले स्थान पर कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है ऐसे में ज्यादा आबादी वाली जगह से श्रीहरिकोटा बहुत दूर है. तट पर स्थित श्रीहरिकोटा से नजदीकी रेलवे स्टेशन भी 20 किलोमीटर दूर है.

हालांकि इसरो के बनाए जाने वाले उपग्रहों में भारी भरकम उपकरण इस्तेमाल किए जाते हैं. ऐसे में चेन्नई के पास स्थित यह जगह ट्रांसपोर्ट के आधार से भी काफी सहूलियत प्रदान करती है. इस जगह हवा, पानी और सड़क तीनों ही माध्यम से पहुंचा जा सकता है.

साथ ही मौसम के लिहाज से भी यह जगह काफी सुलभ है. यहां साल में दो महीने ही बारिश होती है, और बाकी के दिनों में मौसम सामान्य बना रहता है जो इसरो को साल में 10 महीने काम करने का माहौल भी देता है.

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