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शराब कारोबारी विजय माल्या को ब्रिटेन से लाना क्यों आसान नहीं है?

विजय माल्या के प्रत्यर्पण की राह में भारत के सामने कई रोड़े हैं जो उसे पार करने ही होंगे

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Dec 04, 2017 09:25 PM IST

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शराब कारोबारी विजय माल्या को ब्रिटेन से लाना क्यों आसान नहीं है?

शराब कारोबारी विजय माल्या को लेकर भारत सरकार के राजनयिक प्रयास का असर अब दिखने लगा है. विजय माल्या को भारत भेजने संबंधी मामले की सुनवाई लंदन की एक अदालत में आज से शुरू हो गई है. मामले की सुनवाई 14 दिसंबर तक चलेगी जिसमें 6 और 8 दिसंबर अवकाश का दिन रहेगा.

पूर्व राज्यसभा सांसद और किंगफिशर एयरलाइंस के मालिक विजय माल्या मार्च 2016 में भारत से भागकर ब्रिटेन में शरण ले रखी है. भारतीय बैंकों के कर्ज नहीं चुका पाने के मामले में विजय माल्या को भगोड़ा घोषित किया गया है. फिलहाल, भारत में धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना कर रहे माल्या इस समय लंदन की एक अदालत से जमानत पर बाहर है.

विजय माल्या पर भारत के विभिन्न बैंकों का 9 हजार करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है. हालांकि माल्या अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों का खंडन करते हुए कह चुका है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है.

गौरतलब है कि सीबीआई और ईडी के कई अधिकारी पिछले कई महीनों से लंदन में डेरा डाले हुए हैं. भारतीय जांच एजेंसियां खासकर विजय माल्या और ललित मोदी के प्रत्यर्पण को लेकर कई स्तर पर काम रही है. एक तरफ जहां जांच एजेंसियां पूरी मुस्तैदी के साथ ब्रिटेन की अदालत में अपना पक्ष रख रही है. वहीं डिप्लोमेटिक स्तर पर भी प्रयास तेज किए गए हैं.

विजय माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर कुछ महीने पहले ही पूर्व केंद्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि ने लगभग 10 दिनों तक ब्रिटेन का दौरा किया था. राजीव महर्षि ने ब्रिटेन के गृह सचिव पेस्टी विल्किंसन से इस मुद्दे पर कई बार मुलाकात कर भारत की इच्छा के बारे में अवगत कराया था.

Theresa May

(फोटो: रॉयटर्स)

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे की पिछले साल भारत यात्रा के दौरान भी भारत ने ब्रिटेन को 57 भगोड़ों की लिस्ट सौंपी थी. ब्रिटेन ने भी ऐसे 17 भगोड़ों की लिस्ट भारत को दी थी, जो ब्रिटेन की अदालत में दोषी हैं.

हाल ही में संपन्न हुई जी-20 की बैठक में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा से हुई मुलाकात में भी विजय माल्या समेत दूसरे अपराधियों के प्रत्यर्पण पर चर्चा हुई थी.

हम आपको बता दें कि दोनों मुल्कों के बीच प्रत्यर्पण की संधि 1992 में हो गई थी, पर समझौते के इतने दिनों बाद भी ब्रिटेन ने आज तक किसी भी भगोड़े को भारत को नहीं सौंपा है. इसके उलट भारत अब तक दो लोगों को ब्रिटेन को सौंप चुका है. साल 2008 में भारत हाना फॉस्टर की हत्या के मामले में एक भारतीय मनिंदर पाल सिंह कोहली को ब्रिटेन को प्रत्यर्पित कर चुका है.

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एक और मामला था, जिसमें भारतीय मूल के एस. देववानी को ब्रिटेन को सौंपा गया था. देववानी पर आरोप था कि ब्रिटेन मूल की रहने वाली अपने पत्नी की उसने हनीमून के दौरान दक्षिण अफ्रीका में हत्या कर दी थी. जिसके बाद वह भारत भाग आया था.

भारत ने ब्रिटेन को जो लिस्ट सौंपी है, उसमें शराब कारोबारी विजय माल्या और पूर्व आईपीएल कमिश्नर ललित मोदी के साथ-साथ गुजरात ब्लास्ट, पंजाब सिख दंगा, डिफेंस डील, हत्या और यौन उत्पीड़न से जुड़े आरोपी हैं.

लंदन की एक कोर्ट में हो रही ताजा सुनवाई में शराब कारोबारी विजय माल्या की बचाव टीम की अगुवाई बैरिस्टर क्लेयर मोंटगोमरी कर रही हैं, जिन्हें आपराधिक और धोखाधड़ी के मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है.

rakesh asthana

वहीं भारतीय पक्ष को मजबूती से रखने के लिए भारतीय जांच एजेंसियों की पूरी टीम तैनात है. सीबीआई टीम का नेतृत्व स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना कर रहे हैं. 1984 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना ही विजय माल्या केस की जांच कर रहे हैं. अगर विजय माल्या के प्रत्यर्पण के पक्ष में फैसला आता है तो ब्रिटिश सरकार दो महीने के भीतर माल्या के प्रत्यार्पण का आदेश जारी कर सकती है.

कुछ महीने पहले ही भारत की मांग पर सुनवाई करते हुए लंदन प्रशासन ने माल्या को रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर गिरफ्तार भी किया था, पर कुछ ही देर में वहां की एक अदालत ने माल्या को जमानत दे दी थी.

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गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही लंदन की वेस्टमिनस्टर मजिस्ट्रेट अदालत के जजों ने ब्रिटेन के कथित सट्टेबाज संजीव कुमार चावला के पक्ष में फैसला सुनाया था. साथ ही भारतीय मूल के दंपति जतिंदर और आशा रानी अनगुराला के खिलाफ भी धोखाधड़ी के मामले को कुछ दिन पहले ही खारिज किया जा चुका है.

इन सभी लोगों के प्रत्यार्पण के लिए भारतीय जांच एजेंसियां काफी सालों से प्रयासरत थीं लेकिन, भारतीय जांच एजेंसियों को इन फैसलों से काफी झटका लगा है. यह फैसला विजय माल्या के प्रत्यर्पण पर सुनवाई से कुछ हफ्ते पहले आया था.

सट्टेबाज संजीव चावला के खिलाफ मुकदमों को दिल्ली के तिहाड़ जेल की खराब स्थिति को देखते हुए मानवाधिकार का हवाला देते हुए खारिज कर दिया गया था. प्रत्यर्पण के बाद उसे तिहाड़ जेल में ही रखा जाना था. विजय माल्या भी इसी को आधार बना कर प्रत्यर्पण को चुनौती दे रहा है. ऐसे में कहा जा सकता है कि विजय माल्या का प्रत्यर्पण इतना आसान नहीं होगा.

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