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कौन था मुन्ना बजरंगी...उसकी हत्या के बाद क्या पूर्वांचल में फिर छिड़ेगा खूनी गैंगवार?

मुन्ना बजरंगी की बागपत में हुई हत्या के बाद इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि आने वाले समय में बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी के बीच पुराना गैंगवार फिर दिखाई दे

Updated On: Jul 09, 2018 04:08 PM IST

FP Staff

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कौन था मुन्ना बजरंगी...उसकी हत्या के बाद क्या पूर्वांचल में फिर छिड़ेगा खूनी गैंगवार?
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जिस बागपत जिले में कुख्यात अपराधी मुन्ना बजरंगी की हत्या हुई है शायद वहां के लोग उसके नाम से उतने परिचित न हों जितने पूर्वांचल और अवध इलाके के लोग होंगे. सात लाख रुपए का ईनामी मुन्ना बजरंगी करीब तीस-पैंतीस सालों से पूर्वांचल, अवध और यूपी से लगे बिहार के इलाकों में अपराध की दुनिया में सक्रिय था. मुन्ना-बजरंगी की छवि लोगों के बीच एक डॉन से ज्यादा एक शार्प शूटर की थी. साल 2005 में गाजीपुर से बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या में मुख्तार अंसारी के अलावा मुन्ना बजरंगी का नाम भी सामने आया था.

जौनपुर का प्रेम प्रकाश जरायम की दुनिया में बना 'मुन्ना-बजरंगी'

1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में जन्मे मुन्ना बजरंगी को उसके पिता पारसनाथ सिंह एक पढ़ा-लिखा आदमी बनाना चाहते थे. पिता के अरमान अलग थे और मुन्ना बजरंगी के अलग. पिता चाहते थे वो अच्छा इंसान बने लेकिन मुन्ना बजरंगी के अरमान जरायम की दुनिया में नाम कमाने के थे. मुन्ना ने सिर्फ पांच तक पढ़ाई की और उसके बाद 20 साल तक की उम्र आते-आते उसके भीतर अपराधी मानसिकता पनप चुकी थी.

और इस तरह की पहली हत्या

साल था 1984. मुन्ना के खिलाफ लूट के एक मामले में एक व्यापारी को मौत के घाट उतार दिया था. 1996 में मुन्ना पर ही बीजेपी नेता रामचंद्र सिंह की हत्या के आरोप लगे.

कृष्णानंद राय की हत्या में सबसे ज्यादा चर्चा में आया था

बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या में भी मुन्ना बजरंगी पर आरोप लगे थे. कृष्णानंद राय की उनके गांव से नजदीक ही सैंकड़ों गोलियां चलाकर हत्या कर दी थी. आरोप लगे कि इस घटन को मुन्ना बजरंगी ने मुख्तार अंसारी के इशारे पर अंजाम दिया था. कृष्णानंद राय के सिर पर माफिया डॉन बृजेश सिंह का हाथ था. पूर्वांचल में मुख्तार और बृजेश सिंह गैंग में अदावत की कहानी पुरानी है. कई लोगों की हत्या इन दोनों की दुश्मनी में हो चुकी है.

मुख्तार से बिगड़ गए थे संबंध

बताया जाता है कि कृष्णानंद राय की हत्या के बाद मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी के बीच अनबन हो गई थी जो आज तक ठीक नहीं हो पाई. कहा जाता है कि कृष्णानंद राय की हत्या के पीछे मुन्ना बजरंगी के पास व्यक्तिगत कारण भी थे. साल 2005 में वाराणसी जेल में बंद अपराधी अन्नू त्रिपाठी की हत्या कर दी गई थी और इसी का बदला लेने के लिए मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय की हत्या की थी.

गिरफ्तारी या नाटक!

कृष्णानंद राय की हत्या के बाद भाग-भाग कर थक चुके मुन्ना बजरंगी को मुंबई के मलाड इलाके से 2009 गिरफ्तार किया गया था. ऐसा भी माना जाता है कि अपनी गिरफ्तारी खुद ही मुन्ना बजरंगी ने करवाई थी.

क्या फिर छिड़ सकता है गैंगवार

मुन्ना बजरंगी की बागपत में हुई हत्या के बाद इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि आने वाले समय में बृजेश सिंह और मुख्तार अंसारी के बीच पुराना गैंगवार फिर दिखाई दे. बहुत संभव है कि इस हत्या के पीछे भी इन्हीं दोनों में से किसी एक गैंग का हाथ हो. खैर पुलिसिया तफ्तीश में जल्दी ही इस हत्या की असली तस्वीर साफ हो जाएगी.

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