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कौन है मोइन कुरैशी? जिसके चलते चार CBI अधिकारियों पर आई है आंच

मोइन कुरैशी पर कई जांच चल रहे हैं. उसका नाम टैक्स चोरी, मनी लॉन्डरिंग और भ्रष्टाचार जैसे मामलों में आ चुका है

Updated On: Oct 25, 2018 05:22 PM IST

FP Staff

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कौन है मोइन कुरैशी? जिसके चलते चार CBI अधिकारियों पर आई है आंच
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इसके पहले दो सीबीआई चीफ ए पी सिंह और रंजीत सिन्हा के पतन के पीछे जिस शख्स का हाथ रहा था, अब उसी के चलते सीबीआई के दो और बड़े अधिाकारियों को छुट्टी पर जाना पड़ा है.

सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया गया है. और इस विवाद के पीछे हाथ है करोड़पति मीट कारोबारी मोइन कुरैशी का.

मोइन कुरैशी पर कई जांच चल रहे हैं. उसका नाम टैक्स चोरी, मनी लॉन्डरिंग और भ्रष्टाचार जैसे मामलों में आ चुका है. उस पर लाखों का पैसा हवाला ट्रांजैक्शन में लगाने और सरकारी कर्मचारियों से लेकर सीबीआई अधिकारियों और नेताओं तक फंसाने का केस है.

कुरैशी कभी एक एक छोटा कसाईखाना चलाता था. उसने 1993 में उत्तर प्रदेश के रामपुर में एक छोटा कसाईखाना खोला और वो भारत का सबसे बड़ा मीट निर्यातक बन गया. उसने पिछले 25 सालों में कन्सट्रक्शन से लेकर फैशन इंडस्ट्री तक कई सेक्टरों में 25 कंपनियां खोली थीं.

कुरैशी का नाम सबसे पहले 2014 में तब चर्चा में आया, जब ये सामने आया कि उसने 15 महीनों के भीतर तत्कालीन सीबीआई चीफ रंजीत सिन्हा के आवास पर 70 बार मिलने गया था. आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के मामले में जो एक और नाम है- वो हैदराबाद के बिजनेसमैन सतीश बाबू साना का. उसने पिछले साल प्रवर्तन निदेशालय को बताया था कि उसने ही कुरैशी को रंजीत सिन्हा से मिलकर सीबीआई केस में फंसे एक दोस्त को जमानत दिलाने के लिए एक करोड़ रुपए दिए थे.

सुप्रीम कोर्ट सिन्हा के ऐसे संदिग्धों से मुलाकात करने को लेकर काफी नाराज हुआ और सिन्हा पर सीबीआई की नजर चढ़ गई. सिन्हा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को नकार दिया.

लेकिन इसके बाद उसी साल ये सामने आया कि कुरैशी ने एक पूर्व सीबीआई चीफ एपी सिंह को भी इस मामले के लिए अप्रोच किया था और उनके साथ कुछ संदेश का आदान-प्रदान किया था. एपी सिंह 2010 से लेकर 2012 तक सीबीआई के चीफ थे.

ईडी और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इन मामलों को लेकर पिछले साल और जांच की. सीबीआई ने भी सिंह के कुरैशी से संबंधों को लेकर एक केस रजिस्टर कर लिया. हालांकि, ये आरोप लगने के बाद सिंह को यूपीएससी की अपनी सदस्यता से हाथ धोना पड़ा. उन्होंने भी खुद पर लगे आरोपों को खारिज किया.

और अब आलोक वर्मा को भी छुट्टी पर जाना पड़ा है. इस केस में जहां आलोक वर्मा राकेश अस्थाना पर इस आरोप की बिना पर एफआईआर दर्ज करवाया है कि उन्होंने सतीश साना से तीन करोड़ घूस लिया था. वहीं अस्थाना ने भी आलोक वर्मा पर साना से दो करोड़ रुपए रिश्वत लेने का आरोप लगाया है.

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