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केपीएस गिल: जिसने खत्म कर दिया पंजाब से आतंकवाद

केपीएस गिल ने 1958 में ‘इंडियन पुलिस सर्विस’ ज्वाइन की थी

Puneet Saini Puneet Saini Updated On: May 26, 2017 06:12 PM IST

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केपीएस गिल: जिसने खत्म कर दिया पंजाब से आतंकवाद

किडनी फेल होने से कंवर पाल सिंह गिल का 82 साल की उम्र में निधन हो गया. गिल पंजाब के दो बार डीजीपी रह चुके हैं. 80 के दशक में आतंक की आग में जल रहे पंजाब से गिल ने आतंक का नामो-निशान मिटा दिया था. आइए जानते हैं पंजाब से आतंकवाद का नामो-निशान खत्म करने वाले केपीएस गिल के बारे में.

गिल ने 1958 में ‘इंडियन पुलिस सर्विस’ ज्वाइन की थी. आईपीएस बनने के बाद गिल की पहली पोस्टिंग नॉर्थ-ईस्ट के असम राज्य में हुई थी. असम में सेवा के दौरान उनपर कई तरह के आरोप भी लगे. गिल पर आरोप था कि असम में डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस रहते हुए उन्होंने एक आंदोलनकारी को जान से मार दिया था.

केपीएस गिल

केपीएस गिल

30 साल असम में सेवा देने के बाद गिल को स्पेशल टास्क के लिए पंजाब लाया गया. वो दौर था 1988 का, आतंकवाद की आग में जल रहे पंजाब में एक अलग राज्य (खालिस्तान) की मांग हो रही थी. ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद पंजाब पूरी तरह आतंकवाद की आग में सुलग रहा था. पंजाब से आतंकवाद को खदेड़ने का काम केपीएस गिल को सौंपा गया.

1988 में ऑपरेशन ब्लैक थंडर से साफ किए आतंकी

पंजाब के डीजीपी के रूप में गिल ने मई 1988 में 'ऑपरेशन ब्लैक थंडर' का नेतृत्व किया. इस ऑपरेशन की तुलना ब्लू स्टार से की गई. इसमें करीब 67 सिखों ने सरेंडर किया और 43 लोगों की मौत हो गई थी. हालांकि गिल के इस ऑपरेशन के बाद उनपर कई सवाल भी उठे.

पंजाब में 1991 में आतंक अपने चरम पर था, 90 के शुरुआती साल में करीब 5,000 लोगों के मारे जाने की खबर थी. 1992 में भारत सरकार ने पंजाब को आतंकवाद से मुक्त करवाने की ठानी जिसका निर्देष पंजाब के पुलिस चीफ केपीएस गिल को दिया गया.

केपीएस गिल (फोटो: फेसबुक)

केपीएस गिल (फोटो: फेसबुक)

गिल ने पूरे पंजाब में आतंकवाद को खत्म करने की ठानी और आतंकवाद पर कड़ी कार्रवाई की. जिसका नतीजा 1993 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में हिंसा की घटना में भारी गिरावट आई और 1992-93 में सिर्फ 500 लोग ही मारे गए. इस ऑपरेशन के बाद

दो बार पंजाब पुलिस की कमान संभालने के बाद गिल ने पंजाब से आतंकवाद का नामो निशान मिटा दिया. वह 1995 में आईपीएस रहते हुए रिटायर हुए थे. पुलिस की नौकरी छोड़ने के बाद वह इंडियन हॉकी फेडरेशन (आईएएफ) के प्रेसिडेंट भी रहे हैं.

सिविल सेवा में बेहतरीन काम के लिए उन्हें 1989 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था. 1988 से 1990 तक वो पंजाब के डीजीपी थे.

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