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भारतीय वायुसेना में 5 स्टार रैंक मार्शल अर्जन सिंह कौन थे... जानिए

पाकिस्तान के खिलाफ 1965 की जंग में योगदान को देखते हुए अर्जन सिंह को 2002 में एयरफोर्स का पहला और इकलौता मार्शल बनाया गया

FP Staff Updated On: Sep 16, 2017 10:49 PM IST

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भारतीय वायुसेना में 5 स्टार रैंक मार्शल अर्जन सिंह कौन थे... जानिए

इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) के मार्शल अर्जन सिंह का जन्म 15 अप्रैल, 1919 को पाकिस्तान के फैसलाबाद में हुआ था. उनके पिता ब्रिटिश सेना में लांस दफादार थे. 1939 में जब अर्जन सिंह 19 साल के थे तब उनका चयन पायलट ट्रेनिंग के लिए हुआ.

1944 में अर्जन सिंह को स्क्वॉड्रन लीडर बनाया गया. उन्होंने अराकान कैंपेन के दौरान जपानियों के खिलाफ टीम का नेतृत्व किया. आजादी के बाद 15 अगस्त, 1947 को सिंह को दिल्ली के लाल किले के ऊपर से 100 IAF एयरक्राफ्ट्स के फ्लाई-पास्ट का नेतृत्व करने का मौका मिला.

1949 में अर्जन सिंह ने एयर ऑफिसर कमांडिंग ऑफ ऑपरेशनल कमांड का जिम्मा संभाला. इसे ही बाद में वेस्टर्न एयर कमांड कहा गया. अर्जन सिंह 1964 से लेकर 1969 तक पूरे पांच साल भारतीय वायुसेना के अध्यक्ष रहे. अर्जन सिंह इकलौते ऐसे वायुसेनाध्यक्ष हैं, जिनका कार्यकाल पांच साल का रहा.

सेंकड वर्ल्ड वॉर के दौरान बर्मा के अराकान प्रांत में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए distinguished flying cross से नवाजा गया. अर्जन सिंह को 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में वायु सेना की शानदार सफलता का कर्णधार माना जाता है.

पाकिस्तान के खिलाफ 1965 की लड़ाई में पहली बार जब एयरफोर्स ने जंग हिस्सा लिया तो अर्जन सिंह उसके चीफ थे. उनके नेतृत्व में ही एयरफोर्स ने घंटे भरे के भीतर पाकिस्तानी फौज पर हमला बोला था.

अर्जन सिंह को 2002 में एयरफोर्स का पहला और इकलौता मार्शल बनाया गया. वे एयरफोर्स के पहले फाइव स्टार रैंक अधिकारी बने. 1965 की जंग में उनके योगदान के लिए भारत ने उन्हें इस सम्मान से नवाजा था.

उन्हें 1965 में ही पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया. अर्जन सिंह 1 अगस्त, 1964 से 15 जुलाई, 1969 तक चीफ ऑफ एयर स्टाफ रहे.

अर्जन सिंह ने भारतीय वायुसेना को ताकतवर बनाने में अहम भूमिका अदा की. उन्होंने अपने काबिल नेतृत्व से भारतीय वायुसेना को दुनिया की चौथी बड़ी वायुसेना बनाया.

अर्जन सिंह ने दिल्ली के पास मौजूद अपने फार्म को बेचकर 2 करोड़ रुपए ट्रस्ट को दे दिए. ये ट्रस्ट सेवानिवृत्त एयरफोर्स कर्मियों के कल्याण के लिए बनाया गया था. अर्जन सिंह दिसंबर 1989 से दिसंबर 1990 तक दिल्ली के उपराज्यपाल भी रहे थे.

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