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जाटों और किसानों को खुश करने के लिए जिनकी प्रतिमा का अनावरण कर रहे हैं पीएम, कौन थे वो सर छोटू राम?

जानिए, कौन हैं दीनबंधु सर छोटू राम और भारतीय इतिहास में क्या है उनकी जगह

Updated On: Oct 09, 2018 11:11 AM IST

FP Staff

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जाटों और किसानों को खुश करने के लिए जिनकी प्रतिमा का अनावरण कर रहे हैं पीएम, कौन थे वो सर छोटू राम?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को हरियाणा के रोहतक में अंग्रेजों के जमाने के जाट नेता दीनबंधु सर छोटू राम की 64 फीट की प्रतिमा का अनावरण करेंगे. ये कार्यक्रम सर छोटू राम के पैतृक गांव गढ़ी सांपला में सर छोटू राम म्यूजियम कॉम्प्लेक्स भी जाएंगे. पीएम साढ़े तीन बजे उनकी प्रतिमा का आवरण करेंगे. इसके बाद साढ़े चार बजे के आसपास प्रधानमंत्री एक रैली करेंगे. वो सोनीपत के बरही में रेल कोच कारखाने की आधारशिला भी रखेंगे.

सर छोटू राम की इस विशाल प्रतिमा का अनावरण करना बीजेपी की प्रो-जाट रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. लेकिन पहले जानिए, कौन हैं दीनबंधु सर छोटू राम और भारतीय इतिहास में क्या है उनकी जगह-

- सर छोटूराम या चौधरी छोटूराम का जन्म 24 नवंबर 1881 में रोहतक के गांव गढ़ी सांपला में हुआ था. उनका असली नाम रिछपाल था. वो घर में सबसे छोटे थे, इसलिए उनका नाम छोटू राम पड़ गया. उन्होंने अपने गांव से कुछ मील दूर मिडिल स्कूल में पढ़ाई की, इसके बाद दिल्ली के क्रिश्चियन मिशन स्कूल में दाखिला लिया. उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से ग्रेजुएशन किया. उन्होंने 1907 तक अंग्रेजी के हिंदुस्तान अखबार का संपादन किया. इसके बाद उन्होंने लॉ की डिग्री भी ली. 1912 तक वो वकालत करने लगे.

- इस बीच वो लगातार सामाजिक स्थितियों का गहन करते रहे और सामाजिक तौर पर अपनी जगह बना ली. उन्होंने जाट सभा का गठन किया. प्रथम विश्व युद्ध में उन्होंने रोहतक के 22 हजार से ज्यादा सैनिकों को सेना में भरती करवाया.

- उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काफी काम किया. उनकी कोशिश से खुला जाट आर्य-वैदिक संस्कृत हाई स्कूल अपनी अलग पहचान रखता है.

- सर छोटू राम ने एक क्रांतिकारी अखबार जाट गजट का भी संपादन किया. इस अखबार के जरिए उन्होंने किसानों पर होने वाले शोषण के खिलाफ प्रचार किया. उन्होंने किसानों की जमीन गिरवी रखने और साहुकारों द्वारा किसानों के उत्पीड़न पर भी आवाज उठाई.

- वो अपने अखबार में किसानों के पक्ष में इतने तीखे लेख लिखते थे कि एक बार उनके खिलाफ देश-निकाला का आदेश आ गया था लेकिन उनकी हैसियत इतनी ऊंची थी और उनकी गिरफ्तारी पर इतने बड़े विद्रोह की आशंका थी कि इस फैसले को वापस लेना पड़ा.

- 1916 में जब रोहतक में कांग्रेस कमेटी का गठन हुआ तो वो इसके अध्यक्ष बने. लेकिन बाद में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन से असहमत होकर इससे अलग हो गए. उनका कहना था कि इसमें किसानों का फायदा नहीं था.

- उन्होंने यूनियनिस्ट पार्टी का गठन किया और 1937 के प्रोवेंशियल असेंबली चुनावों में उनकी पार्टी को जीत मिली थी और वो विकास व राजस्व मंत्री बने.

- सर छोटूराम ने ऐसे कई सामाजिक सुधार कानून पास करवाए, जिससे किसानों को शोषण से मुक्ति मिली. 1930 में उन्हें दो महत्वपूर्ण कानून पास कराने का श्रेय दिया जाता है. ये कानून थे पंजाब रिलीफ इंडेब्टनेस, 1934 और द पंजाब डेब्टर्स प्रोटेक्शन एक्ट, 1936. इन कानूनों में कर्ज का निपटारा किए जाने, उसके ब्याज और किसानों के मूलभूत अधिकारों से जुड़े हुए प्रावधान थे. साहूकार पंजीकरण एक्ट- 1938, गिरवी जमीनों की मुफ्त वापसी एक्ट-1938, कृषि उत्पाद मंडी अधिनियम - 1938, व्यवसाय श्रमिक अधिनियम- 1940 और कर्जा माफी अधिनियम- 1934 कानून भी उल्लेखनीय हैं.

- ये भी खास बात है कि सर छोटूराम ने ही भाखड़ा बांध का प्रस्ताव रखा था.

- 9 जनवरी, 1945 को सर छोटू राम का निधन हो गया.

सर छोटूराम हरियाणा के इतिहास में काफी ऊंची हैसियत रखते हैं. किसानों की मुक्ति के लिए उनके योगदान की आज भी वहां छाप है.

(फीचर्ड इमेज- सर छोटू राम इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ की वेबसाइट से साभार)

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