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स्वयंभू बाबा नित्यानंद कहीं देश छोड़कर तो नहीं भाग गया?

नित्यानंद बेवकूफी भरे दावों के लिए जाना जाता है. हाल ही में उन्होंने दावा किया था कि वह गायों को तमिल और संस्कृत में बोलना सीखा सकता है

Updated On: Dec 18, 2018 05:34 PM IST

FP Staff

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स्वयंभू बाबा नित्यानंद कहीं देश छोड़कर तो नहीं भाग गया?

बेंगलुरु में इस बात की अफवाह फैली हुई है कि विवादास्पद 'बाबा' स्वामी नित्यानंद भारत छोड़कर भाग गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, नित्यानंद कानून से बचने के लिए विदेश भाग गया है. कुछ लोग यह भी दावा करते हैं कि उन्होंने कैमेन द्वीपसमूह में पहले से ही राजनीतिक आश्रय की मांग कर रखी है.

बेंगलुरु के बाहरी इलाके में बने अपने आश्रम में नित्यानंद लंबे समय से अनुपस्थित है. इसी कारण से ऐसी अफवाहों को बढ़ावा मिला है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले एक महीने से किसी ने उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा है.

न्यूज़ 18 के मुताबिक उनके शिष्यों ने खुलासा किया कि उन्होंने अपने कुछ करीबी सहयोगियों से कहा था कि वह उत्तर भारत में तीर्थयात्रा पर जा सकते हैं. उनके एक शिष्य का कहना है, 'हम नहीं जानते कि वो कहां हैं. उनके करीबी सहयोगियों का दावा है कि वो उत्तर भारत में हैं और जल्द ही वापस आ जाएंगे.'

नित्यानंद के विरोधियों का मानना है कि विजय माल्या की तरह बाबा भी देश छोड़कर भाग गया है.

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एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने बाबा के भागने की खबर पर संदेह व्यक्त किया है. उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि वह भाग गया है. उनका पासपोर्ट हाल ही में एक्सपायर हो गया था. वह कानूनी रूप से विदेश यात्रा नहीं कर सकता है. मुझे बताया गया है कि वह उत्तर भारत में कहीं है. हम इसकी पुष्टि कर रहे हैं.'

आईजीपी बी दयानंद ने इस बात की पुष्टि की है कि रामनगर जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) रमेश भनोत ने कानूनी आधार पर उनके पासपोर्ट के नवीकरण के आवेदन को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा, 'चूंकि उनके खिलाफ गंभीर मामला है, इसलिए एसपी ने पासपोर्ट नवीकरण के लिए उनके अनुरोध को खारिज कर दिया था. यह हाल ही में समाप्त हो गया है.'

नित्यानंद पहली बार सुर्खियों में 2010 की शुरुआत में आया. इस समय एक अभिनेत्री के साथ उनका कथित वीडियो वायरल हुआ था. नित्यानंद भारत के बाबा बाजार में एक बेहद ही विवादास्पद व्यक्ति रहा है.

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तमिलनाडु का एक मूल निवासी 40 वर्षिय नित्यानंद का असली नाम राजशेखरन है. लगभग 20 साल पहले उसने बेंगलुरू-मैसूर राजमार्ग पर बिदादी में अपना आश्रम स्थापित किया था. यह ओशो रजनीश के दर्शन पर आधारित है. ओशो की तरह ही प्रवचन देने की कॉपी करने के कारण उसके भक्तों की संख्या अच्छी खासी हो गई.

उसके अधिकांश शिष्य युवा पेशेवर हैं और उनमें से कुछ विदेशी हैं. बाबा के उपदेशों के बाद, उसके शिष्य उसके साथ नृत्य करते हैं और कुछ तो इसके आगे भी बढ़ जाते हैं. पिछले 10 सालों में कथित तौर पर आश्रम परिसर में विभिन्न घृणास्पद गतिविधियों के लिए कुख्यात हुआ है. यहां तक की स्वामी को दो बार पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया था और जमानत पर आने से पहले उसे कुछ समय के लिए जेल में भी रहना पड़ा था.

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पुलिस ने उनके आश्रम पर छापा भी मारा था. पिछले साल अगस्त में उसके खिलाफ अपने आश्रम में शिष्या के साथ 2010 में कथित तौर पर बलात्कार का केस भी दर्ज किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय अदालत को प्राथमिकता पर मुकदमा पूरा करने का निर्देश दिया था. मुकदमा तीन महीने पहले शुरू हो गया है.

कुछ लोग यह भी आरोप लगाते हैं कि इस मामले में सजा होने के डर से विदेश भाग गया.

नित्यानंद बेवकूफी भरे दावों के लिए जाना जाता है. हाल ही में उन्होंने दावा किया था कि वह गायों को तमिल और संस्कृत में बोलना सीखा सकता है. अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत पर उनकी टिप्पणियां और पूर्व इंफोसिस एचआर निदेशक टीवी मोहनदास पाई के साथ उनकी चर्चा पिछले दो महीनों में सोशल मीडिया पर लोगों की हंसी का पात्र बन रही है.

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