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हवाई सेवाओं की सुरक्षा को लेकर देश फिक्रमंद होना कब सीखेगा?

हवाई उड़ानों की सुरक्षा को लेकर हमारा रिकॉर्ड अच्छा नही है इसलिए हमें सुरक्षा को लेकर सबके बीच जिम्मेदारी का भाव जगाना चाहिए

Updated On: Mar 24, 2018 05:35 PM IST

Milind Deora Milind Deora

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हवाई सेवाओं की सुरक्षा को लेकर देश फिक्रमंद होना कब सीखेगा?
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मैं इंडिगो एयरलाइन का फैन हूं. इसकी सेवाएं काफी अच्छी हैं. मैं अक्सर इसमें सफर करता हूं. लेकिन हाल ही में जब इंडिगो एयरलाइन के विमानों की उड़ान पर रोक लगने और इसके बेड़े के A320 विमानों के इंजन में खराबी की खबरें आईं, तो इसने मुझे चिंता में डाल दिया.

फिलहाल इंडिगो ने अपने उन 14 विमानों को उड़ान भरने से रोक दिया है, जिनमें वो इंजन लगे हैं, जो गड़बड़ी के शिकार हैं. इसकी वजह से इंडिगो को 16 मार्च से 31 मार्च के बीच की अपनी 480 उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं. पिछले 18 महीनों में इंडिगो की 69 उड़ानों को इंजन फेल होने की दिक्कत का सामना करना पड़ा है.

A320 विमानों में खराबी का सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ा है 

हालांकि A320 विमानों के लिए प्रैट एंड व्हिटने के बनाए इंजन पूरी दुनिया में इस्तेमाल होते हैं. लेकिन इनमें खराबी का सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ा है. इसकी वजह यह है कि भारत में इस्तेमाल हो रहे कुल विमानों में से 40 फीसदी में यही इंजन लगे हैं. जब यह खराबी सामने आई, तो नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA और A320 ने तुरंत ही एक्शन लेने शुरू कर दिए. इंडिगो ने फ्लाइट कैंसिल कर दी. खराब इंजन वाले विमानों के उड़ने पर रोक लगा दी, जबकि कंपनी को इस वजह से घाटा भी उठाना पड़ा. हो सकता है कि इंडिगो को इसकी वजह से अपने कुछ रूट भी गंवाने पड़ें.

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मुझे लगता है कि इस मुसीबत को बड़े नजरिए से देखने की जरूरत है. क्योंकि मामला देश में हवाई उड़ानों की सुरक्षा से जुड़ा है. यह खास तौर से विमानों की सुरक्षा और मुसाफिरों के बर्ताव का मामला है.

रेलवे और ट्रेनों की सुरक्षा का मसला हमेशा से सियासी रहा है. साल भर पहले तक हमारा रेलवे बजट अलग होता था. संसद में बहस के दौरान सांसद रेलवे सुरक्षा को लेकर काफी सक्रिय और जागरूक रहते हैं. और इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते रहे हैं. मगर, हवाई उड़ान की सुरक्षा को लेकर संसद में ज्यादा चर्चा नहीं होती. खास तौर से रेलवे के मुकाबले तो इस पर निगाह भी कम ही रहती है. जबकि बहुत से सांसद संसद की बैठकों में शामिल होने के लिए हवाई जहाज से ही दिल्ली आते हैं.

2014 से मई, 2017 के बीच 52 हवाई हादसे दर्ज किए गए थे. इनमें से 35 ऐसे मामले थे, जब 2 विमानों की आमने-सामने से टक्कर की नौबत तक आ गई थी. इन हवाई हादसों में से ज्यादातर एटीसी यानी एयर ट्रैफिक कंट्रोल की गलती वजह थी. 2016 से 2017 के बीच निलंबित किए गए 151 पायलटों में से ज्यादातर को इसलिए सस्पेंड किया गया क्योंकि वो ब्रेथलाइजर टेस्ट यानी शराब पी है या नहीं के परीक्षण मे फेल हो गए थे. यह टेस्ट या तो उड़ान से पहले या बाद में किए गए थे. कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें पायलटों ने हवा में ही विमान उड़ाने की फिक्र छोड़कर झगड़ा शुरू कर दिया.

हवाई सेवाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े होते हैं

इन घटनाओं से देश में हवाई सेवाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े होते हैं. बड़ा सवाल यह कि पायलटों के बीच प्रोटोकॉल तोड़ने और अनुशासनहीनता की होड़ सी क्यों लगी हुई है? ऐसे पायलटों की रोकथाम के लिए क्या इंतजाम हैं? इसी तरह एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों को किस तरह की ट्रेनिंग दी जाती है? देश मे हवाई सेवाओं का बड़ी तेजी से विस्तार हो रहा है. उड़ानों की संख्या बढ़ रही है. दो उड़ानों के बीच फासला कम हो रहा है. साफ है कि एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को उड़ानों के मैनेजमेंट के लिए बेहतर ट्रेनिंग की जरूरत है. सवाल यह भी है कि क्या हम ऐसे काबिल लोगों को तलाश पाए हैं, जो हवाई उड़ानों के बढ़ते दबाव को ठीक से संभाल सकें? क्या हम उन्हें सही ट्रेनिंग दे पा रहे हैं?

Lok Sabha

संसद में रेलवे सुरक्षा के मुद्दे उठाए जाते हैं लेकिन हवाई सुरक्षा को लेकर सांसद चर्चा नहीं करते

फिर सवाल यह भी है कि क्या एटीसी, डीजीसीए और कोस्टगार्ड के बीच अच्छा तालमेल है? मसलन, 2009 में यूएस एयरवेज की उड़ान नंबर 1594 की दुर्घटना हुई थी, जब विमान से कई परिंदों के टकराने और इंजन फेल होने के बाद पायलट ने जहाज को हडसन नदी पर उतार दिया था. उस वक्त तमाम एजेंसियों के बीच बढ़िया तालमेल देखने को मिला था. नदी में विमान उतरने के मिनटों के भीतर बचाव अभियान के लिए नावें पहुंच गई थीं. विमान में सवार सभी 155 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया था.

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कहानी का दूसरा पहलू यह है कि कई बार मुसाफिर भी फ्लाइट के लिए खतरा बन जाते हैं. मैंने खुद कई बार देखा है कि यात्री नियमों को बेशर्मी से तोड़ते हैं. जबकि वो नियम खुद उन्हीं मुसाफिरों की सुरक्षा के लिए बने हैं. लोग सीटबेल्ट नहीं बांधते. विमान के क्रू मेंबर्स को उन्हें बार-बार एहतियात के तौर पर सीट बेल्ट बांधने के लिए कहना पड़ता है.

कितने मुसाफिर होंगे, जो उड़ान भरने से पहले बताए जाने वाले सुरक्षा नियमों को ध्यान से सुनते हैं? क्या लोगों को पता है कि किसी इमरजेंसी की हालत में ऑक्सीजन मास्क का इस्तेमाल कैसे करना है? या फिर कितने लोगों को यह पता है कि जीवनरक्षक जैकेट (लाइफ जैकेट) को तभी फुलाया जा सकता है, जब विमान पानी में गिर जाए तो, लोग विमान से बाहर निकल जाएं? जो लोग इमरजेंसी गेट के पास बैठते हैं, उन्हें क्या यह पता होता है कि आफत आने पर वो इमरजेंसी गेट कैसे खोलने हैं? या फिर इमरजेंसी की सूरत में हंगामा ही होगा?

देश में हवाई सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है लेकिन इसी के साथ हादसे भी बढ़े हैं

देश में हवाई सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है लेकिन हादसे भी इस दौरान बढ़े हैं

क्या भारत के लोग अपनी सुरक्षा को लेकर संजीदा हैं?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत के लोग अपनी सुरक्षा को लेकर संजीदा हैं?

इस बात को सोचने का दूसरा तरीका यह हो सकता है कि हम यह देखें कि हमारा अपने देश से पर्यावरण और साथी नागरिकों से कैसा रिश्ता है? इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत में गंदगी फैलाने की आदत है. गंदगी फैलाना या साफ-सफाई रखना, इन दो बातों से ही हम समझ सकते हैं कि किसी देश के नागरिकों में समाज के प्रति जिम्मेदारी का कैसा भाव है. वो लोगों से कैसा बर्ताव करते हैं. यह समाज से हमारे जुड़ाव का संकेत देता है. साफ-सफाई की आदत से ही पता चलता है कि हम अपने देश के प्रति कैसा भाव रखते हैं? मेरा मानना है कि जो लोग बेशर्मी से गंदगी फैलाते हैं, उन्हें सुरक्षा की जरा सी भी परवाह नहीं होती.

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एक देश के तौर पर हम कई बार गलत बातों को भी बढ़ावा देते हैं. हम राष्ट्रगान के लिए तो खड़े होने की जिद करते हैं. या मंदिर जाने की बात करते हैं. लेकिन हम पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने और टैक्स चोरी से गुरेज नहीं करते. अक्सर ऐसा होता है कि जब किसी महिला से बदसलूकी हो रही होती है, तो बहुत से लोग तमाशबीन बन जाते हैं. कोई हादसा होने पर उसकी मदद करने के बजाय उसका सामान लूटने की घटनाएं भी होती हैं.

हालांकि यह मामले हवाई उड़ानों की सुरक्षा से अलग हैं, लेकिन इनके बीच बुनियादी ताल्लुक है. यह एक समाज के तौर पर हमारी सोच को दिखाते हैं. यह बर्ताव बताते हैं कि हम सामाजिक रूप से एक-दूसरे का कितना सम्मान करते हैं. अगर हम किसी सड़क हादसे के शिकार शख्स की मदद नहीं करते, तो हम यह उम्मीद कैसे कर सकते हैं कि बीच हवा में कोई हादसा होने पर लोग एक-दूसरे के मददगार साबित होंगे?

Indigo Airlines

इंडिगो एयरलाइन ने इंजन में खराबी के बाद अपने 14 A320 विमानों को उड़ान भरने से फिलहाल रोक दिया है

जरूरी है कि हम भारतीय यात्रियों के बर्ताव के हिसाब से नियम बनाएं

जब तक हम अपने देश के नागरिकों को जीवन के यह मूल्य नहीं सिखा पाएंगे, तब तक सुरक्षा को लेकर भी हमारा रुख यही रहेगा. हम में संजीदगी नहीं होगी. सुरक्षा के नियमों को लेकर हमें पश्चिमी देशों के नियमों का अंधा अनुकरण करने के बजाय अपने नियम बनाने चाहिए. यह नियम-कायदे हमारी सभ्यता और संस्कृति के हिसाब से होने चाहिए. फिर चाहे एटीसी का प्रोटोकॉल और ट्रेनिंग हो, या फिर पायलट और विमान के क्रू मेंबर के लिए नियम हों. सबसे जरूरी तो यह है कि हम भारतीय यात्रियों के बर्ताव के हिसाब से नियम बनाएं.

हवाई उड़ानों की सुरक्षा को लेकर हमारा रिकॉर्ड तसल्लीबख्श नही है. ऐसे में हमें सुरक्षा को लेकर सबके बीच जिम्मेदारी का भाव जगाना चाहिए. इससे उड़ान के दौरान पायलट से लेकर मुसाफिरों तक का बर्ताव जिम्मेदारी भरा होगा. साथ ही हम पर्यावरण और दूसरे नागरिकों के प्रति भी ज्यादा संवेदनशील होंगे.

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