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सेना पर सीएजी रिपोर्ट: मंत्री बनने के बाद सैनिकों को भूल गए वीके सिंह

आर्मी चीफ रहते हुए वीके सिंह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सेना के खराब हालात पर लेटर लिखा था

Puneet Saini Puneet Saini Updated On: Jul 23, 2017 01:44 AM IST

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सेना पर सीएजी रिपोर्ट: मंत्री बनने के बाद सैनिकों को भूल गए वीके सिंह

भारत इस समय चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा विवाद में जूझ रहा है. ऐसे में सीएजी की एक रिपोर्ट बीजेपी सरकार को आलोचना के घेरे में ले सकती है. सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक सेना के पास गोला-बारूद की बेहद कमी है. रिपोर्ट में इस बात का साफ खुलासा किया गया है कि 10 दिन युद्ध करना पड़ गया तो स्थिति बुरी हो जाएगी.

तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखा था लेटर

जैसे ही न्यूज वेबसाइटों पर सीएजी की रिपोर्ट की खबर चली तो लोगों को जनरल वीके सिंह की याद जरूर आई होगी. मंत्री बनने के बाद तो वीके सिंह अक्सर खबरों में रहते हैं लेकिन जब वे जनरल थे तो उन्हें लेकर तीन बार खूब सुर्खियां बनीं. पहली बार उनके जन्मदिन विवाद को लेकर. दूसरी बार तब जब इंडियन एक्सप्रेस ने एक खबर की थी जिसमें सेना की टुकड़ियों के दिल्ली कूच करने की खबर आई थी और तीसरी बार तब जब उन्होंने सेना के पास हथियारों की कमी का एक तफसीली खत तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम लिखा था.

उस लेटर में तत्कालीन सेना प्रमुख वीके सिंह ने सेना के हथियारों की स्थिति को लेकर सनसनीखेज खुलासे किए थे. कई दिनों तक अखबारों में इसे छापा गया और टीवी पर बड़ी बहसें हुईं. लगभग सभी लोग सरकार की आलोचना कर रहे थे और इस बात पर सहमत थे कि सरकार सेना के साथ खिलवाड़ कर रही है. अगर सेना के पास गोला बारूद ही नहीं होंगे तो आखिर किसी भी विषम परिस्थिति से निपटेगी कैसे?

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

12 मार्च 2012 को लिखे गए इस लेटर में वीके सिंह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कहा था, 'सेना को पूरे सैन्य साजोसामान उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की जानी चाहिए.'

उन्होंने ये भी लिखा था युद्ध सामग्री की स्थिति बेहद भयावह है. आर्मी टैंक रेजीमेंट की ओर इशारा करते हुए उन्होंने लिखा था कि इसकी वर्तमान स्थिति की बदौलत हम दुश्मनों के सामने खड़े भी नहीं हो पाएंगे. वहीं एयर डिफेंस की तरफ उंगली उठाते हुए उन्होंने लिखा था कि आक्रमण की स्थिति में यह मददगार साबित नहीं होंगे और 97 प्रतिशत से ज्यादा पुराने पड़ चुके हैं.

मंत्री बनने के बाद सेना को भूले वीके सिंह

इसके बाद वीके सिंह अन्ना हजारे के साथ देशभर में जनतंत्र यात्रा पर निकले और 2014 के चुनाव के ठीक पहले बीजेपी में शामिल हो गए. उन्हें वीआईपी कांस्टिटूएंसी मिली. गाजियाबाद से वो रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीते. और पहले ही मंत्रिमंडल में उन्हें जगह दी गई. इसके बाद वह विदेश राज्यमंत्री भी बन गए.

लेकिन शायद इन कुछ राजनीतिक सालों ने उन्हें सेना के जवानों को भूलने पर मजबूर कर दिया है. वो अब मंत्री बन चुके हैं. और मंत्री बन कर बेहद खुश भी हैं. मंत्री रहते हुए उन्हें तीन साल बीत चुके हैं. निश्चित रूप से सेना के गोला-बारूद का मसला उनके मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है. लेकिन क्या उन्हें कभी याद नहीं आई कि जिस बात को उन्होंने कांग्रेस सरकार के समय में उठाया था वो सैनिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

वो सैनिक जिनके वो जनरल रह चुके हैं. वो आज भी उसी स्थिति में हैं जहां वो तीन साल पहले खड़े थे. उनके पास सैन्य साजोसामान की वैसी ही कमी है जैसी वीके सिंह के जनरल रहते हुए थी. कहा जा सकता है कि केंद्र सरकार में जगह बनाने के बाद वीके सिंह अब ये भूल गए कि सैनिक अगर युद्ध जैसी स्थिति में फंस जाएं तो शायद 11वें दिन उसे लाठी-डंडे से युद्ध लड़ना पड़ जाए.

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