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दिल्ली में सीलिंग के डर से कारोबारियों को कब तक राहत मिलेगी?

दिल्ली के तीनों नगर निगमों ने हाल ही में अपने इलाकों में चल रही फैक्ट्रियों की पहचान के लिए एक सर्वे किया था, इसके बाद ही सीलिंग की कार्रवाई की शुरुआत हुई है

Updated On: Aug 21, 2018 09:20 AM IST

Ravishankar Singh Ravishankar Singh

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दिल्ली में सीलिंग के डर से कारोबारियों को कब तक राहत मिलेगी?

पिछले साल दिसंबर महीने से ही दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में सीलिंग की शुरुआत हो गई थी. लगातार चल रही सीलिंग की कार्रवाई से कारोबारी वर्ग में हड़कंप मच हुआ है. कुछ दिनों पहले तक जहां नॉर्थ दिल्ली और सेंट्रल दिल्ली में सीलिंग का भूत कारोबारियों को परेशान कर रहा था वहीं यह परेशानी अब पूर्वी दिल्ली के कारोबारियों को भी होने लगी है.

पूर्वी नगर निगम ने लक्ष्मी नगर के बाद विश्वास नगर में बीते कुछ दिनों से जबरदस्त तरीके से सीलिंग अभियान छेड़ रखा है. सीलिंग की यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है. विश्वास नगर के रिहायशी इलाकों के घरों में चल रही फैक्ट्रियों को बड़े पैमाने पर सील किया जा रहा है.

कुछ दिनों के लिए बेहद धीमी पड़ गई थी सीलिंग

बता दें कि दिल्ली के तीनों नगर निगमों ने हाल ही में अपने इलाके के रिहायशी एरिया में चल रहीं फैक्ट्रियों की पहचान के लिए एक सर्वे किया था. इसके बाद ही सीलिंग की कार्रवाई की शुरुआत हुई है. 15 अगस्त और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के चलते सीलिंग की कार्रवाई कुछ दिनों के लिए बेहद धीमी पड़ गई थी, लेकिन सोमवार को एक बार फिर से सीलिंग की कार्रवाई तेज कर दी गई है.

सोमवार को एमसीडी के अधिकारियों ने विश्वास नगर की अलग-अलग गलियों में चल रही अवैध फैक्ट्रियों को निशाना बनाया. इन फैक्ट्रियों को निगम की तरफ से पहले ही नोटिस दिया जा चुका था. निगम का नोटिस मिलने के बाद कुछ फैक्ट्रियों को शिफ्ट भी किया गया है, लेकिन अभी भी कई फैक्ट्रियां पहले की तरह ही चल रही हैं.

DELHI SEALING

विश्वास नगर में पूर्वी नगर निगम की तरफ से दो हजार से भी ज्यादा फैक्ट्रियों को नोटिस दिया जा चुका है. सीलिंग का नोटिस मिलने के बाद व्यापारियों में हड़कंप मचा हुआ है. सीलिंग की आशंका से कई व्यापारियों ने तो नई जगह तलाशना भी शुरू कर दिया है, वहीं कई कारोबारी वकीलों से सलाह-मशविरा करने में लगे हुए हैं.

नगर निगम के अधिकारियों का दस्ता जिन-जिन इलाकों में जाता है वहां पर हड़कंप मच जाता है. विश्वास नगर की विष्णु गली, बगीचा गली, भीम रोड पर सीलिंग के डर से कारोबारी कुछ भी बोलने से डरते दिखे. भीम रोड पर कई फैक्ट्रियों के गेट पर नोटिस लगा हुआ है. कारोबारी गोदाम से अपना सामान खाली करने में लगे हैं. सीलिंग के भय से सामान बाहर निकाल कर दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने का काम पूरे विश्वास नगर में देखा जा रहा है.

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भीम रोड पर बर्तन बनाने का काम करने वाले एक व्यापारी रंगलाल फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘निगम द्वारा नोटिस मिलने के बाद हमने ग्राउंड फ्लोर को पूरी तरह खाली कर दिया और निगम को जवाब भी दिया, फिर भी हमारी संपत्ति को सील कर दिया गया. खाली कराने के बाद भी सीलिंग की कार्रवाई हो रही है यह गलत है. अगर कानून इतना सख्त है तो वह दिन दूर नहीं जब लोगों के सामने रोटी-रोटी के लाले पड़ जाएंगे.’

विश्वास नगर के मनोज अग्रवाल फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘इस इलाके ने 20 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार दिया है. ये लोग पिछले 20-25 सालों से यहां पर काम करते आ रहे हैं. अगर देखा जाए तो एक लाख लोग सीधे इससे प्रभावित होंगे. निगम की तरफ से अभी तक 2 हजार से भी ज्यादा फैक्ट्रियों को सीलिंग का नोटिस दिया जा चुका है. मेरी भी पत्नी के नाम विश्वास नगर इलाके में एक किराने की दुकान है. निगम के अधिकारी मेरे पास भी सीलिंग का नोटिस लेकर आए लेकिन हमने उनको किराने की दुकान खोल कर दिखा दी. इसके बाद निगम के अधिकारियो ने मेरी दुकान सील नहीं की. मैं आपको बताना चाहता हूं कि किराने की दुकान को सील करने का ऑर्डर नहीं है.’

कारोबारियों को सता रही है रोजी-रोटी की चिंता

दूसरी तरफ सीलिंग के डर से परेशान कारोबारी उद्योग फेडरेशन की मदद से हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से सलाह-मशविरा कर रहे हैं. इन लोगों को साफ कहना है कि यह कारोबारियों  के जीने-मरने का सवाल है. किसी भी तरह सीलिंग रुक जाए इसके लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं. सभी लोगों को अपने कारोबार के साथ रोजी-रोटी की भी चिंता सता रही है.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त निगरानी समिति के सदस्य केजे राव की टीम लगातार दिल्ली के अलग-अलग इलाकों का सर्वे कर रही है. मॉनिटरिंग कमिटी का साफ कहना है कि सीलिंग की कार्रवाई वहीं होगी जहां पर फैक्ट्री मालिक मास्टर प्लान का उल्लंघन कर रहे हैं. फैक्ट्री मालिकों को नोटिस में साफ कहा गया है कि नगर निगम के अधिकारी सीलिंग के संबंध में रिपोर्ट पेश करेंगे.

फैक्ट्री फैडरेशन के अधिकारियों का साफ कहना है कि विश्वास नगर को औद्योगिक क्षेत्र घोषित किए जाने को लेकर हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन है. निगरानी समिति को हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए. विश्वास नगर में 69.4 प्रतिशत एरिया में फैक्ट्रियां चलती हैं, जबकि 70 प्रतिशत होने पर औद्योगिक क्षेत्र घोषित करने का प्रावधान है.

बता दें कि विश्वास नगर दिल्ली का ऐसा औद्योगिक इलाका है, जहां से फैक्ट्री मालिकों ने सबसे पहले आंदोलन शुरू किया था. इस आंदोलन में एक कारोबारी की मौत भी हो गई थी. शीला दीक्षित के मुख्यमंत्री रहते जब दिल्ली से फैक्ट्रियों को बाहर शिफ्ट करने की बात चल रही थी तो यहां के कारोबारियों ने इसका विरोध किया था. यहां के अधिकांश फैक्ट्री मालिकों को बवाना औद्योगिक एरिया में जमीन आवंटित की गई, लेकिन किसी कारण बवाना औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं हो सका. इस कारण कारोबारियों के सामने कई तरह की परेशानी आईं. इन परेशानियों के कारण ही कारोबारी अब दोबारा से बवाना नहीं जाना चाहते हैं. कारोबारी अब मांग कर रहे हैं कि विश्वास नगर को औद्योगिक क्षेत्र घोषित किया जाए.

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बता दें कि पूरी दिल्ली में कम से कम 30 हजार फैक्ट्रियों पर गाज गिरने वाली है. मॉनिटरिंग कमिटी ने तीनों एमसीडी को फैक्ट्रियों की लिस्ट भेजी है, जिसके बाद से ही सीलिंग की कार्रवाई तेज हो गई है. मॉनिटरिंग कमिटी का साफ मानना है कि रिहायशी इलाकों में फैक्ट्रियां बंद नहीं होने की वजह से ही बवाना इंडस्ट्रियल एरिया का विकास नहीं हो पा रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए मॉनिटरिंग कमेटी ने रिहायशी इलाकों में चल रही फैक्ट्रियों को बंद करने का आदेश दिया है.

रिहायशी लोग सीलिंग के फैसलों की कर रहे हैं तारीफ

फर्स्टपोस्ट हिंदी ने सोमवार को विश्वास नगर के कई इलाकों में सीलिंग की कार्रवाई का जायजा लिया. सीलिंग की कार्रवाई में कई तरह की बातें सामने आ रही हैं. एक और जहां स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि बगैर नोटिस और कन्वर्जन चार्ज जमा कराने के बाद भी एमसीडी परेशान कर रही है. वहीं दूसरी तरफ जिनके मकानों में फैक्ट्री नहीं चलती हैं वह परिवार सीलिंग की कार्रवाई से खुश नजर आ रहे हैं.

फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए विश्वास नगर की गली नंबर 3 के राहुल कहते हैं, ‘पूरी-पूरी रात फैक्ट्रियों में चल रही मशीनों के कारण हम लोगों को नींद नहीं आती है. कई तरह के रासायनिक पदार्थ के इस्तेमाल से घर के लोग बीमार भी रहते हैं. यहां के मकान मालिक खुद तो मकान किराए पर लगा कर दूसरी जगह शिफ्ट हो गए हैं लेकिन जो फैक्ट्रियां चल रही हैं उससे आवाज और केमिकल्स से हम लोगों को सांस लेने में दिक्कत आती है. सुप्रीम कोर्ट ने जो कार्रवाई शुरू की है हम लोग पूरे मन से उसका समर्थन करते हैं और सीलिंग की कार्रवाई होनी ही चाहिए.’

DELHGI SEALING

बता दें कि सोमवार को भी एमसीडी अधिकारियों की कई टीमें सीलिंग की कार्रवाई में लगी रहीं. विश्वास नगर इलाके के गली नंबर 3 से लेकर 6 नंबर तक सीलिंग की कार्रवाई चलती रही. फर्स्टपोस्ट हिंदी ने इस इलाके में कई कारोबारियों से जब सीलिंग को लेकर बात की तो कारोबारियों का साफ कहना था,‘जब विश्वास नगर औद्योगिक क्षेत्र बस रहा था तो उस समय दिल्ली में 2001 का मास्टर प्लान बन कर तैयार हुआ था. यह मास्टर प्लान दिल्ली में 2007 को लागू हुआ. अब उसी मास्टर प्लान के आधार पर 2018 में कारोबारियों पर कार्रवाई की जा रही है. इस इलाके में 2001 के बाद से काफी बदलाव हुए हैं. अगर मास्टर प्लान लागू ही करना था तो 17 साल नगर निगम या सरकार क्या कर रही थी. अब मास्टर प्लान 2021आने वाला है तो क्यों नहीं अदालत के फैसले का इंतजार किया जाए.

कुल मिलाकर दिल्ली में सीलिंग की कार्रवाई अगले कई महीनों तक देखने को मिलेगी, क्योंकि पिछले दिनों ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) अधिनियम 2006 और उससे जुड़े कानूनी वैधता के मुद्दे पर अब अगले साल फरवरी में ही सुनवाई होगी. इस कानून के तहत ही दिल्ली में अनाधिकृत निर्माणों को नहीं तोड़ने को सुरक्षा मिली हुई है.

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