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जब सुधा मूर्ति एक छात्र की ईमानदारी देखकर दंग रह गईं

इनफोसिस फाउंडेशन की अध्यक्ष सुधा मूर्ति ने एक छात्र की आर्थिक मदद की. बाद में उस छात्र ने सुधा मूर्ति को पूरा पैसा लौटाया

Bhasha Updated On: Jul 01, 2018 04:57 PM IST

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जब सुधा मूर्ति एक छात्र की ईमानदारी देखकर दंग रह गईं

समाजसेवी और लेखिका सुधा मूर्ति ने एक छात्र की पढ़ाई-लिखाई का खर्चा उठाने का फैसला किया था तब वह यह नहीं जानती थीं कि वही छात्र एक दिन उन्हें ईमानदारी पर एक अहम सीख देगा.

पढ़ाई-लिखाई में बेहद तेज छात्र हनुमनथप्पा पहली बार सुधा की नजर में तब आया जब कर्नाटक में दसवीं बोर्ड की परीक्षा में आठवीं रैंक पाने पर अखबार में उसकी तस्वीर छपी.

मूर्ति ने अपनी नई किताब ‘हेयर, देयर ऐंड एव्रीव्हेयर’ में लिखा है, ‘वह कमजोर और मुरझाया हुआ था लेकिन उसकी आंखों में एक खास चमक थी. उसके पिता एक कुली थे और पांच बच्चों में वह सबसे बड़ा था. उसके पिता केवल 40 रुपए प्रतिदिन कमाते थे.’

मूर्ति ने पढ़ाई का खर्च उठाया

उन्होंने लिखा कि आर्थिक तंगी के कारण लड़के को दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी. इसके बाद सुधा ने छात्र को बेंगलुरू के अपने दफ्तर में बुलाया और कहा कि वह जो भी पढ़ाई करना चाहता है और जब भी करना चाहता है, उसका पूरा खर्च वह उठाएंगी.

आदिवासी बच्चे के सामने ढेरों विकल्प थे लेकिन उसने चुना रामपुरा में अपने घर के नजदीक टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज को जहां का खर्च था महज 300 रुपए प्रतिमाह.

छात्र ने पैसे लौटाए

कुछ दिन बाद सुधा को एक लिफाफा मिला जिसमें कुछ रुपए थे. इसके साथ एक पत्र भी था जिसमें हनुमनथप्पा ने लिखा था, ‘मैडम मैं दो महीने से बेल्लारी में नहीं था, पहले महीने तो हमारे कॉलेज में छुट्टी थी और दूसरे महीने हड़ताल के कारण कॉलेज बंद था. इस दौरान मेरा खर्च 300 रुपए प्रतिमाह से भी कम था. मैं आपको बचे हुए 300 रुपए भेज रहा हूं’’

सुधा बच्चे की ईमानदारी से काफी प्रभावित हुईं. उन्होंने कहा, ‘मेरे काम में, 80 फीसदी से ज्यादा समय लोग धोखा देते हैं, वह पैसा लेकर भाग जाते हैं, झूठ बोलते हैं, हां कुछ अच्छी बातें भी होती हैं. मैंने अच्छी और सकारात्मक चीजों के बारे में लिखने का फैसला किया.’’

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