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RSS की रथयात्रा का कितना होगा असर, रामलीला मैदान में धर्मसभा से बनेगा माहौल?

अयोध्या में राम मंदिर बनाने को लेकर भगवा ब्रिगेड की तरफ से माहौल को फिर से गरमाया जाने लगा है.

Updated On: Dec 03, 2018 08:34 PM IST

Amitesh Amitesh

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RSS की रथयात्रा का कितना होगा असर, रामलीला मैदान में धर्मसभा से बनेगा माहौल?

अयोध्या में राम मंदिर बनाने को लेकर भगवा ब्रिगेड की तरफ से माहौल को फिर से गरमाया जाने लगा है. राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग संघ प्रमुख मोहन भागवत ने की थी, उसके बाद साधु-संतों से लेकर विश्वहिंदू परिषद के नेताओं की तरफ से देशभर में मंदिर निर्माण को लेकर अभियान चलाया जा रहा है.

दिल्ली में भी आरएसएस के संगठन स्वदेशी जागरण मंच की तरफ से 1 दिसंबर से 9 दिसंबर तक रथ यात्रा निकाली गई है, जिसका मकसद लोगों में राम मंदिर को लेकर जागरूकता फैलाना है. संकल्थ रथ यात्रा दिल्ली के अलग-अलग भागों में जा कर लोगों से राम मंदिर निर्माण के लिए समर्थन जुटाने की कवायद है.

संकल्प रथ यात्रा का समापन 9 दिसंबर को होगा, जिस दिन दिल्ली के रामलीला मैदान में वीएचपी की तरफ से धर्म सभा का आयोजन किया गया है. वीएचपी की तरफ से धर्मसभा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देशभर से साधु-संतों के अलावा वीएचपी के भी बड़े नेता शामिल होंगे.

इसके पहले 25 नवंबर को राम की नगरी अयोध्या, पुणे और बेंगलुरु में भी धर्म सभा का आयोजन हुआ था, जिसमें सभी साधु-संतों ने एक स्वर में जल्द से जल्द राम मंदिर निर्माण करने की मांग की. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी पुणे में एक बार फिर से राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने की मांग की.

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पीटीआई फोटो

उन्होंने अब इंतजार नहीं करने और जनजागरण अभियान शुरू करने को कहा. भागवत के बयान के बाद ही देश भर में साधु-संतों के अलावा संघ के आनुषंगिक संगठनों ने मंदिर मुद्दे को लेकर फिर से अभियान तेज कर दिया है.

स्वदेशी जागरण के इस अभियान में संघ के अलावा अब वीएचपी के भी लोग भी समर्थन में उतर आए हैं. रथ यात्रा में पहले तो लोगों की भीड़ नहीं दिखी, लेकिन, वीएचपी के कार्यकर्ताओं ने संकल्प रथ यात्रा के दूसरे दिन रविवार 2 दिसंबर को राजधानी दिल्ली के अलग-अलग भागों में बाइक रैली निकालकर फिर से माहौल बनाने की पूरी कोशिश की. दिल्ली और आस-पास के इलाकों में वीएचपी के कार्यकर्ता 9 दिसंबर की धर्म सभा की तैयारियों में लगे हुए हैं.

25 नवंबर को अयोध्या की धर्मसभा में स्वामी रामभद्राचार्य ने दावा किया था कि उनकी एक बड़े मंत्री से बात हुई है जिसमें उन्होंने दावा किया था कि स्वामी राम भद्राचार्य ने दावा किया कि केंद्र सरकार 6 दिसंबर को ही कुछ करने की तैयारी में थी. लेकिन, इस वक्त चुनाव आचार संहिता होने के चलते ऐसा नहीं कर पाई.

उनका दावा था, ‘मोदी सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने उन्हें इस बात का भरोसा दिलाया है और उन्हें उम्मीद है कि 11 दिसंबर के बाद कोई बड़ा निर्णय जरूर होगा. यह निर्णय अध्यादेश भी हो सकता है.’

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11 दिसंबर की तारीख भी अब नजदीक आ रही है. उसी दिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे भी आने वाले हैं. इन चुनावों के परिणाम आने के बाद लोकसभा चुनाव की तैयारी मे सभी दल लग जाएंगे. उसके ठीक पहले 9 दिसंबर को साधु-संतों और वीएचपी के लोगों की मौजूदगी में धर्मसभा का आयोजन कर मंदिर मुद्दे को लेकर सरकार पर अध्यादेश या कानून लाने की मांग की जाएगी.

चुनाव बाद संसद का सत्र भी शुरू हो रहा है. शीतकालीन सत्र में सरकार पर मंदिर मुद्दे पर कानून बनाने को लेकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि बीजेपी के राज्यसभा सांसद राकेश सिंहा और लोकसभा सांसद दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने प्राइवेट मेंबर बिल लाने की बात कही है.

ऐसा होने से साफ है कि अगर बीजेपी सरकार सीधे कानून लाने से कतराएगी तो उनके सांसदों की तरफ से प्राइवेट मेंबर बिल लाने पर माहौल गरमा जाएगा.

लेकिन, फाइनल फैसला सरकार को करना है. सरकार क्या अध्यादेश या कानून बनाने की मांग को अमल में लाएगी या फिर महज माहौल ही गरमाया जाएगा, यह देखने वाली बात होगी. लेकिन, संघ परिवार की तरफ से कोई ऐसा कदम नहीं उठाया जाएगा जो सरकार को परेशान करने वाला होगा.

इसकी झलक मोहन भागवत के बयान से भी हो जाती है जो कानून बनाने की मांग तो करते हैं लेकिन, सरकार पर इसके लिए दबाव बनाने के बजाए जनजागरण की बात कर रहे हैं. फिलहाल, भगवा ब्रिगेड 9 दिसंबर की दिल्ली की धर्मसभा की तैयारियों में जुटा है, जिसके समर्थन में संकल्प रथ यात्रा निकाली गई है.

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