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चेहरा पढ़कर भविष्य बताने वाले भय्यूजी महाराज ने अपना दर्द छुपाकर रखा था

बड़े से बड़े विवाद भैय्यूजी महाराज मध्यस्थता कर सुलझा देते थे. लेकिन, परिवार के विवाद के आगे उन्होंने हार मान ली

Dinesh Gupta Updated On: Jun 12, 2018 08:09 PM IST

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राजनीति, फिल्म और आध्यात्म तीनों ही जगहों पर तालमेल बैठाने में भय्यूजी महाराज को कभी भी किसी तरह की परेशानी नहीं आई. बड़े से बड़े विवाद भैय्यूजी महाराज मध्यस्थता कर सुलझा देते थे. लेकिन, परिवार के विवाद के आगे उन्होंने हार मान ली. भैय्यूजी महाराज,अपनी दूसरी पत्नी डॉ. आयुषी और पुत्री कुहू के बीच तालमेल नहीं बैठा पाए. कुहू और आयुषी के बीच तकरार इतनी ज्यादा थी कि भैय्यूजी महाराज को दोनों के लिए अलग-अलग रहने का इंतजाम करना पड़ा था. भैय्यूजी महाराज ने पिछले साल ही अप्रैल में दूसरी शादी की थी. तीन माह पूर्व ही आयुषी ने एक पुत्री को जन्म दिया था. आज इंदौर स्थित अपने घर में उन्होंने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली.

महाराष्ट्र ने घोषित किया था राष्ट्र संत

भैय्यूजी महाराज का असली नाम उदय सिंह देशमुख था. वे मराठा थे. मध्यप्रदेश के शुजालपुर में उनका जन्म हुआ था. पिता जमींदार थे. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे विलासराव देशमुख उनके करीबी रिश्तेदार थे. भैय्यू जी महाराज के समर्थक मध्यप्रदेश से ज्यादा महाराष्ट्र में हैं. महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें राष्ट्र संत का दर्जा भी दिया था. भैय्यू जी महाराज के जहन में बचपन से ही एक संत की छाप पड़ी हुई थी. यह संत उनके गांव में आते रहते थे. पूरा गांव उनका आदर, सम्मान करता था और बात मानता था.

Bhaiyyu

भैय्यू जी महाराज भी अपने आपको रोल मॉडल के रूप में देखना चाहते थे. उनकी यह महत्वाकांक्षा पहले उन्हें मॉडलिंग की दुनिया में ले गई. वे सियाराम शूटिंग एवं शर्टिंग के पोस्टर बॉय बन गए. भैय्यू जी महाराज का रहन-सहन और पहनावा आम साधु-संतों की तरह नहीं था. वे कभी जींस, टी शर्ट में दिखाई देते थे तो कभी कुर्ता पायजामे में लोगों से मिलते थे. उनका नजरिया भी उदारवादी था. उनके भक्तों में कई नामी राजनेता और फिल्म स्टार भी शामिल थे. उनका आश्रम इंदौर में है. वे सूर्य उपासक थे.

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उनका आश्रम भी सूर्योदय आश्रम के नाम से जाना जाता है. भैय्यूजी महाराज अन्ना हजारे के काफी करीबी रहे हैं. वर्ष 2011 के अन्ना आंदोलन में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीएस सरकार ने भैय्यूजी महाराज को मध्यस्थता के लिए चुना था. भैय्यू जी महाराज ने विदर्भ में किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए भी काफी काम किया था. उनकी खासियत यह थी कि वे किसी भी व्यक्ति का चेहरा पढ़कर उसका भविष्य बता देते थे.

शिवराज सिंह सरकार ने दिया था राज्यमंत्री का दर्जा

भैय्यू जी महाराज की राजनीतिक विचारधारा पर हमेशा ही विवाद रहा है. महाराष्ट्र में उन्हें कांग्रेस के करीब माना जाता है तो मध्यप्रदेश में वे बीजेपी की विचारधारा के ज्यादा करीब दिखते थे. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत से भी उनके करीबी रिश्ते रहे हैं. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जब नर्मदा नदी के किनारे छह करोड़ पौधे लगाने के विवाद में फंसे तो उन्हें भैय्यूजी महाराज की शरण में जाना पड़ा.

दो माह पूर्व ही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिन पांच साधु-संतों को राज्य मंत्री का दर्जा दिया था,उनमें भैय्यूजी महाराज भी एक थे. लेकिन,भैय्यूजी महाराज ने राज्य मंत्री का दर्जा स्वीकार नहीं किया. शिवराज सिंह चौहान उनकी मदद नर्मदा नदी को बचाने के लिए लेना चाहते थे. राज्य मंत्री का दर्जा भी नर्मदा के लिए कमेटी बनाकर दिया गया था. भैय्यूजी महाराज ने नर्मदा नदी को बचाने के लिए एक रिपोर्ट भी सरकार को दी थी. भैय्यूजी महाराज की इच्छा थी कि वे नर्मदा नदी को बचाने के लिए सिस्टम रहकर नहीं सिस्टम के साथ रहकर काम करें.

महिलाओं के लेकर उठते रहे हैं विवाद

Photo Source: Bhaiyyuji Maharaj Facebook

आकर्षक व्यक्तित्व के कारण भैय्यूजी महाराज के आसपास काफी संख्या में महिलाएं भी देखी जाती थीं. भैय्यूजी महाराज का जन्म 1968 में हुआ था. उनका विवाह महाराष्ट्र के औरगांबाद की माधवी निंबालकर से हुआ था. माधवी का तीन साल पहले ही निधन हुआ था. पुत्री कुहू की उम्र उस वक्त लगभग सोलह साल की थी. पत्नी के निधन के बाद कुहू के भविष्य को लेकर भैय्यूजी महाराज हमेशा ही चिंतित रहते थे. कूहू पूणे के कॉलेज में पढ़ती थी.

कहा जाता है कि भैय्यूजी महाराज ने दूसरी शादी भी कुहू को ध्यान में रखकर की थी. मां की देखभाल भी दूसरी शादी का एक वजह रही है. भैय्यूजी महाराज पर मल्लिका राजपूत नाम की एक्ट्रेस ने 'मोहजाल' में बांधकर रखने का आरोप लगाया था. मल्लिका ने तो यहां तक कहा था कि भैय्यूजी महाराज उन्हें दूसरे नंबरों से छुप-छुपकर फोन लगाते हैं और परेशान करते हैं.

भैय्यूजी महाराज के पीए तुषार पाटिल ने आरोपों को खारिज कर दिया था. दो साल पहले पुणे से इंदौर आते वक्त भैय्यूजी महाराज की कार पर भी कुछ अज्ञात लोगों ने हमला किया था. भैय्यूजी महाराज को घुड़सवारी और तलवारबाजी भी आती थी. उन्होंने एक ट्रस्ट भी बनाया. जिसका नाम सद्गुरु दत्त धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट है. यह ट्रस्ट मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में अनेक कार्य कर रहा है. इसका मकसद पूजा-पाठ को बढ़ावा देना नहीं बल्कि भूखे को रोटी तो रोते को हंसाने का है.

महाराष्ट्र के बुलढाना के खमगांव में जरायम पेशा जाति पारधी के बच्चों के लिए आश्रमशाला चलाई जा रही है, जहां 470 बच्चे आधुनिक शिक्षा हासिल कर रहे हैं. मध्य प्रदेश के धार में आत्महत्या करने वाले किसानों के बच्चों के लिए विद्यालय चलाया जा रहा है.

ट्रस्ट द्वारा किसानों के लिए धरती पुत्र सेवा अभियान व भूमि सुधार, जल मिट्टी व बीज परीक्षण प्रयोगशाला, बीज वितरण योजना चलाई. राष्ट्रीय भावना जागृत करने के लिए भारत माता के मंदिर बनाने व संविधान जागरण अभियान चलाया गया. भैय्यूजी महाराज किसी से उपहार या मिठाई आदि नहीं लेते हैं बल्कि ऐसे लोगों से कहते हैं कि वे उनके पास बच्चों के लिए कॉपी आदि लेकर आएं.

पारिवारिक तनाव पर पुलिस की खामोशी

BHAIYYU JI MAHARAJ

भैय्यूजी महाराज ने अपनी लायसेंसी रिवाल्वर से कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या की है. इंदौर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरीनारायण चारी ने कहा कि एक सुसायड नोट भी मिला है. इसमें आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं लिखी गई है. भैय्यूजी महाराज के करीबियों के अनुसार तनाव की वजह दूसरी पत्नी डॉ.आयुषी और पुत्री कुहू के रिश्ते रहे हैं. पिछले तीन-चार दिन से वे इन रिश्तों को लेकर बेहद तनाव में थे. तनाव में होने के बाद भी भैय्यूजी महाराज ने आज कई ट्वीट भी किए थे. इनमें एक ट्वीट केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को जन्म दिन की बधाई देने का भी था.

पुलिस महानिरीक्षक कानून एवं व्यवस्था मकरंद देउस्कर ने कहा कि पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है. आत्महत्या के वक्त कमरे का दरवाजा बंद था. आत्महत्या इंदौर के सिल्वर स्प्रिंग कॉलोनी स्थित आवास में की. इसी कॉलोनी में ही उनकी पुत्री कुहू का भी अलग घर बताया जाता है.

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