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नरोदा पाटिया: जानिए आखिर क्या था 2002 का वो पूरा मामला?

गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी को दंगा भड़काने के लिए 28 साल कैद की सजा मिली है

FP Staff Updated On: Sep 18, 2017 03:08 PM IST

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नरोदा पाटिया: जानिए आखिर क्या था 2002 का वो पूरा मामला?

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह सोमवार को 2002 के नरोदा पाटिया दंगा मामले में दोषी करार माया कोडनानी की तरफ से गवाह के रूप में पेश हुए.

उन्होंने अदालत को बताया कि जिस दिन दंगे भड़के उस दिन कोडनानी नरोदा गाम में मौजूद ही नहीं थी. शाह के मुताबिक वह सोला सिविल हॉस्पिटल में थी. यह नरसंहार 28 फरवरी, 2002 को अहमदाबाद के नरोदा गाम में हुआ था, जहां 11 लोगों को मार डाला गया था.

इस इलाके के पास ही एक अन्य घटना में नरोदा पाटिया में 97 मुसलामानों को लगभग 5,000 लोगों की भीड़ ने मार डाला था. यह घटना विश्व हिंदू परिषद् द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान हुई थी.

10 घंटों तक चला नरसंहार

करीब 10 घंटों तक चले इस नरसंहार में उग्र भीड़ ने लूटपाट, चाकूबाजी, बलात्कार, हत्या और लोगों को जिंदा जलाने जैसे घिनौने कृत्य किए थे. इस घटना के बाद पूरे इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया था और सेना भी बुला ली गई थी.

बताया जाता है कि नरोदा का मामला 2002 के गुजरात दंगों का सबसे बड़ा कत्लेआम था, जिसमें सबसे अधिक लोगों की मौत हुई थी.

इस घटना के बाद का प्रभाव भी बेहद भयावह था. जनसंहार में बच गए सैकड़ों लोग बेघर हो गए, कईयों के यहां कोई कमाने वाला नहीं बचा था और कई बच्चे अनाथ हो गए. कई धार्मिक इमारतों को भी नुकसान पहुंचा और शिक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ा. वह सालाना परीक्षाओं का समय था लेकिन दंगों के बाद परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं.

Hajira Sheikh, a riot survivor holds her grandson at her residence in the rebuilt Naroda Patiya, a neighbourhood of more than 3000 families in Ahmedabad, Gujarat March 6, 2009. Sheikh's invalid mother was burnt alive by a mob during the 2002 religious riots in the western Indian state of Gujarat, in which Naroda Patiya was completely destroyed. Picture taken March 6, 2009. REUTERS/Arko Datta (INDIA CONFLICT RELIGION SOCIETY) - GM1E53G0Z0B01

दंगों के बाद राज्य पुलिस और सरकार पर कई तरह के आरोप लगाए गए. कहा गया कि सरकारी अधिकारियों और पुलिस अफसरों का भी इन दंगों में रोल था. हालांकि एक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम ने अपनी जांच में इन आरोपों को खारिज कर दिया. केस पर शुरुआती रिपोर्ट फाइल कर गुजरात पुलिस 46 लोगों को आरोपी बताया पर स्पेशल कोर्ट ने इसपर भरोसा करने से इनकार कर दिया.

कोडनानी और बाबू बजरंगी को मिली सजा

इसके बाद 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने एक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम बनाया जिसने 2009 में अपनी रिपोर्ट में 70 लोगों को आरोपी बताया जिनमें से 61 लोगों पर चार्ज लगाया गया. 2012 में स्पेशल कोर्ट ने 32 लोगों को दोषी बताते हुए 29 अन्य को बरी कर दिया.

इन 32 लोगों में पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी शामिल थे. माया को 28 साल जेल और बजरंगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.

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