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जानिए किन जानवरों का शिकार आपको जेल तक पहुंचा सकता है

ये कानून केवल जंगली जानवरों को ही नहीं, बल्कि सूची में शामिल पक्षियों और पौधों को भी संरक्षण प्रदान करता है

FP Staff Updated On: Apr 05, 2018 07:00 PM IST

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जानिए किन जानवरों का शिकार आपको जेल तक पहुंचा सकता है

1972 में भारत सरकार ने वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए वन्य जीव संरक्षण अधिनियम (वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन एक्ट)  पास किया था. इस एक्ट का मकसद  वन्य जीवों के अवैध शिकार, मांस और खाल के व्यापार पर रोक लगाना था. 2003 में इस एक्ट में संशोधन किया गया. इस दैरान इस एक्ट का नाम भारतीय वन्य जीव संरक्षण (संशोधित) अधिनियम 2002 रखा गया. संशोधन में एक्ट के तहत दंड और जुर्माना ज्यादा कठोर कर दिया गया था.

कहां लागू होता ये कानून

ये कानून केवल जंगली जानवरों को ही नहीं, बल्कि सूची में शामिल पक्षियों और पौधों को भी संरक्षण प्रदान करता है. हालांकि ये जम्मू और कश्मीर में लागू नहीं होता. वहां उनका अपना वन्य कानून है.

कानून में प्रावधान

कुल छह अनुसूचियां हैं. जो अलग-अलग तरह से वन्यजीवन को सुरक्षा प्रदान करता है. अनुसूची-1 और अनुसूची-2 - इसके द्वितीय भाग वन्य जीवन को पूरी सुरक्षा प्रदान करते हैं. इनके तहत अपराधों के लिए कड़ा दंड तय है. अनुसूची-3 और अनुसूची-4- इसके तहत भी वन्य जानवरों को संरक्षण प्रदान किया जाता है लेकिन इस सूची में आने वाले जानवरों और पक्षियों के शिकार पर दंड बहुत कम हैं. अनुसूची-5 - इस सूची में उन जानवरों को शामिल किया गया है, जिनका शिकार हो सकता है. छठी अनुसूची- इसमें दुलर्भ पौधों और पेड़ों पर खेती और रोपण पर रोक है.

क्या है दंड

अगर सूची एक और सूची दो में आने वाले जानवरों का शिकार किया गया है तो उसमें कम से कम तीन साल के जेल का प्रावधान है, हालांकि इस सजा को सात साल तक बढ़ाया जा सकता है. कम से कम दस हजार रुपए जुर्माना हो सकता है. न्यूनतम सजा - तीन साल अधिकतम सजा - सात साल न्यूनतम अार्थिक दंड - दस हजार रुपए अधिकतम जुर्माना - 25 लाख रुपए दूसरी बार अपराध करने पर भी इतनी ही सजा का प्रावधान. लेकिन कम से कम जुर्माना 25 हजार रुपए तक हो सकता है.

अगर आपके घर में हैं ये तो माना जाएगा अपराध

जानवरों की खाल या फिर गलीचा इकट्ठा करना अपराध है. जिसमें एक से लेकर 25 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

जुर्माने का नया प्रस्ताव

जंगली जानवरों के बढ़ते शिकार के कारण पर्यावरण मंत्रालय ने नया प्रस्ताव रखा है. एक रिपोर्ट के अनुसार देश में 60 फीसदी बाघ रहते हैं, जिसमें साल 2015 में 78 बाघों का शिकार हो चुका है. अब तक शिकार करने पर 25 हजार तक का जुर्माने का प्रावधान है लेकिन अब ये 50 लाख तक हो सकता है.

अनसूची एक क्या है

-अनुसूची एक में 43 वन्य जीव शामिल हैं. जिसमें धारा 2, धारा 8, धारा 9, धारा 11, धारा 40, धारा 41, धारा 43, धारा 48, धारा 51, धारा 61 और धारा 62 के तहत दंड मिल सकता है.

- इस सूची में सुअर से लेकर कई तरह के हिरण, बंदर, भालू, चिकारा, तेंदुआ, लंगूर, भेड़िया, लोमड़ी, डॉलफिन, कई तरह की जंगली बिल्लियों, बारहसिंगा, बड़ी गिलहरी, पेंगोलिन, गैंडा, ऊदबिलाव, रीछ और हिमालय पर पाए जाने वाले कई जानवरों के नाम शामिल हैं.

- अनुसूची एक के भाग दो में कई जलीय जन्तु और सरीसृप हैं.

- इस अनुसूची के चार भाग हैं

अनुसूची दो क्या है

इस अनुसूची में शामिल वन्य जंतुओं के शिकार पर धारा 2, धारा 8, धारा 9, धारा 11, धारा 40, धारा 41 धारा 43, धारा 48, धारा 51, धारा 61 और धारा 62 के तहत सजा का प्रावधान है.

- इस सूची के भाग एक में कई तरह के बंदर, लंगूर, सेही, जंगली कुत्ता, गिरगिट आदि शामिल हैं

- सूची के भाग दो में अगोनोट्रेचस एण्ड्रयूएसी, अमर फूसी, अमर एलिगनफुला, ब्रचिनस एक्ट्रिपोनिस और कई तरह के जानवर शामिल हैं.

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