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आईटीबीपी में आईपीएस अधिकारी आर के मिश्रा की नियुक्ति के क्या हैं मायने?

भारत-चीन ताजा सीमा विवाद के बीच मोदी सरकार के इस निर्णय को काफी अहम माना जा रहा है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jul 19, 2017 04:38 PM IST

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आईटीबीपी में आईपीएस अधिकारी आर के मिश्रा की नियुक्ति के क्या हैं मायने?

भारत सरकार ने 1986 बैच के आईपीएस अधिकारी आर के मिश्रा को आईटीबीपी का अतिरिक्त महानिदेशक नियुक्त किया है. भारत-चीन ताजा सीमा विवाद के बीच मोदी सरकार के इस निर्णय को काफी अहम माना जा रहा है.

पिछले एक महीने से दोनों देशों की सेनाओं के बीच लगातार गतिरोध के बीच इस घटनाक्रम को अर्द्धसैनिक बलों को मजबूत करने के तौर पर देखा जा रहा है.

केंद्र सरकार ने तीन साल पहले आईटीबीपी में अतिरिक्त महानिदेशक का पद समाप्त कर दिया था. आईटीबीपी को एक बार फिर से तीन साल बाद अतिरिक्त महानिदेशक मिला है.

1986 बैच के आईपीएस अधिकारी आरके मिश्रा काफी अनुभवी और तेजतर्रार अधिकारी माने जाते हैं.

भारत तीब्बत सीमा सुरक्षा पुलिस (आईटीबीपी) में पहले एडीजी का एक ही पद था. लेकिन, भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने यह पद फरवरी 2014 में नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स(एनडीआरएफ) को दे दिया था.

इसके बाद आईटीबीपी में यह अहम जिम्मेदारी इंस्पेक्टर जनरल रैंक के चार अफसरों में बांट दी गई थी.

आईटीबीपी पर बॉर्डर की निगरानी और दूसरी ड्यूटी का भी काफी बोझ

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आर के मिश्रा की नियुक्ति पर एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी का कहना है कि इसके पीछे होम मिनिस्ट्री का यह मानना था कि इस पैरामिलिट्री फोर्स पर बॉर्डर की निगरानी और दूसरी ड्यूटी का भी काफी बोझ है. डीजी लेवल से हर चीज हैंडल नहीं की जा सकती है. इसके बाद ही मिनिस्ट्री ने एडीजी की पोस्ट को फिर से बहाल करने का निर्णय लिया.

आईटीबीपी में ऑपरेशनल तौर पर एडीजी का पद काफी अहम है. देश के गृह सचिव राजीव महर्षि ने हाल ही में आईटीबीपी के कामकाज रिव्यू किया था और तय किया था कि यह पोस्ट दोबारा से बहाल की जाएगी.

आईटीबीपी का गठन भारत-तिब्बत की सीमा की सुरक्षा निगरानी के लिए 24 अक्टूबर 1962 को किया गया था. चीन के भारत पर हमले के बाद इस पैरामिलिट्री फोर्स का गठन किया गया था.

यह फोर्स काराकोरम पास से जाचेपला पास तक 3488 किलोमीटर के बॉर्डर की हिफाजत करती है. शुरू में इसकी सिर्फ चार बटालियन ही हुआ करती थी. बटालियनों की संख्या बढ़ा दी गई. अब इसमें करीब 90 हजार जवान तैनात हैं.

वर्तमान में भारत-चीन के बीच बढ़ती तनातनी का मुख्य कारण है चीन का सिक्किम सेक्टर के डोकलाम इलाके में सड़क बनाना. इस इलाके में चीन, भारत और भूटान की सीमाएं मिलती हैं.

जिस इलाके में चीन सड़क बना रहा है वह इलाका विवादित है. भूटान और चीन इस इलाके पर दावा करते हैं. भारत इस विवाद पर भूटान का साथ दे रहा है.

हम आपको बता दें कि इस इलाके का 20 किलोमीटर हिस्सा सिक्किम के पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी राज्यों के हिस्से से जोड़ता है.

इस इलाके को ‘चिकेन नेक’ भी कहा जाता है. पिछले कुछ सालों से चीन का इस इलाके में दखल बढ़ा है. भारत की चिंता है कि अगर चीन का इस इलाके में दखल ऐसे ही बढ़ता गया तो आगे आने वाले समय में चीन का भारत के पूर्वोतर राज्यों में दखल भी बढ़ जाएगा. भारत के कई इलाके चीन की तोपों की रेंज में आ जाएंगे.

सिक्किम का 16 मई 1975 को भारत में विलय हुआ था. पूर्वोत्तर से चीन की तरफ जाने वाला इकलौता रास्ता नाथू ला दर्रा सिक्किम में ही पड़ता है.

चीन पहले तो सिक्किम को भारत का हिस्सा मानने से इनकार करता था. लेकिन,  2003 में उसने सिक्किम को भारत के राज्य का दर्जा दे दिया. हालांकि, सिक्किम के कई इलाकों को वह अपना बताता है.

फोर्सेज के इरादे अडिग: आरके मिश्रा

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फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बातचीत में आईटीबीपी के नवनियुक्त अतिरिक्त महानिदेशक आर के मिश्रा ने कहा, ‘आजकल मीडिया में जो बातें सामने आ रही हैं वह अपनी जगह है. हमारी फोर्सज जहां-जहां तैनात हैं वहां-वहां पर हम इंडियन आर्मी के साथ ज्वाइंट मूवमेंट और पेट्रोलिंग कर सजग हैं. फोर्सेज के इरादे अडिग हैं. हम किसी भी ऐसे घटना को न होने देने के लिए कटिबद्ध हैं.’

आर के मिश्रा आगे कहते हैं, ‘हमारी अभी दो प्राथमिकताएं हैं. पहली प्राथमिकता अपने जवानों की समस्याएं समझ कर दूर करना है. आईटीबीपी जम्मू कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैली हुई है. हम उस जगह पर जा कर उनकी कठिनाई को देखेंगे, समझेंगे और फिर समाधान निकालने का काम करेंगे.

दूसरी प्राथमिकता है आईटीबीपी के अंदर कई अधिकारियों के प्रोमोशन कुछ वजहों से अटके पड़े हैं. हमारी प्राथमिकता होगी की उन लोगों को प्रोमोशन मिल जाए.’

आर के मिश्रा को करीब से जानने वाले अधिकारी कहते हैं कि वो प्रयोगवादी हैं. सीआईएसएफ में अतिरिक्त महानिदेशक के तौर पर जवानों की ट्रेनिंग में काफी प्रयोग किए जो सफल हुए. आने वाले कुछ दिनों में आईटीबीपी में भी नए-नए प्रयोग देखने को मिल सकते हैं.

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