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सीमा पार से हम कोई भी घुसपैठ नहीं होने देंगे : डीजी बीएसएफ

के.के शर्मा ने कहा- नक्सली डरते हैं कि कहीं हमसे मुकाबला हुआ तो मुश्किल होगी

Amitesh Amitesh Updated On: Aug 05, 2017 11:52 AM IST

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सीमा पार से हम कोई भी घुसपैठ नहीं होने देंगे : डीजी बीएसएफ

सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसफ को लगातार अंतरराष्ट्रीय सीमा पर देश के हितों की रक्षा के लिए नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान की तरफ से हो रहे आतंकी घुसपैठ को रोकने के लिए बीएसएफ को लगातार सतर्क रहना पड़ता है. वहीं ड्रग्स और दूसरे नशीले पदार्थों की हो रही तस्करी को रोकना भी बड़ी चुनौती होती है. पश्चिमी सीमा के अलावा बांग्लादेश से लगने वाली पूर्वी सीमा पर भी लगातार मवेशियों की तस्करी बड़ी समस्या बनी हुई है. इसे रोकने के लिए बीएसफ लगातार प्रयत्नशील रहता है.

लेकिन, अब बीएसएफ आतंकी घुसपैठ से लेकर तस्करी को रोकने के लिए तकनीक का सहारा लेकर चौकसी और बढ़ाने जा रहा है. नई स्वदेशी तकनीक के सहारे बीएसएफ की तरफ से वो सारी तैयारी की जा रही है जिससे घुसपैठ की कोशिश करने वाले आतंकियों को पलक झपकते ही ढेर किया जा सके.

बीएसएफ के सामने आ रही चुनौतियों और उसकी तैयारियों पर फ़र्स्टपोस्ट के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में बीएसएफ के डीजी (महानिदेशक) के.के शर्मा ने खुलकर अपनी बात रखी है. पेश है बीएसएफ के डीजी के साथ फ़र्स्टपोस्ट की खास बातचीत...

फ़र्स्टपोस्ट- मौजूदा वक्त में सीमा पर माहौल तनावपूर्ण लग रहा है. पाकिस्तान की तरफ से की जा रही घुसपैठ की कोशिश और सीमा पर हालात में क्या सुधार हुआ है ?

के.के शर्मा- यह सही है कि पहले की तुलना में हालात और खराब ही हुए हैं. पाकिस्तान की तरफ से लगातार घुसपैठ की कोशिश हो रही है, लेकिन, हमने लगातार इस तरह की घटनाओं और उनकी तरफ से हो रही कारवाई को नाकाम किया है. जब नागरोटा की घटना हुई थी तो उस वक्त वहां सेना के साथ मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए थे. ये सभी आतंकवादी एलओसी को पार कर आए थे.

लेकिन, उसी रात को तीन और आतंकवादी भी हमारी सीमा में घुस आए थे. ये तीनों आतंकवादी चमलयान इलाके में पाकिस्तान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा को पार कर सुरंग के रास्ते हमारी सीमा में दाखिल हुए थे. लेकिन, बीएसएफ ने उन्हें वहीं ढेर कर दिया.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

उनके पास से चेन आईडी, ग्रेनेड्स और तीन एके 47 राइफल और बाकी विस्फोटक बरामद किया था. पिछले कुछ महीनों में उनकी तरफ से अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बारह-तेरह बार घुसपैठ की कोशिशें हो चुकी हैं लेकिन, अबतक वो सफल नहीं हो पाए हैं.

फ़र्स्टपोस्ट- पाकिस्तान से लगी सीमा पर आतंकी घटनाओं के अलावा ड्रग्स तस्करी की घटनाएं लगातार होती रही हैं. क्या इस पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती ?

के.के शर्मा- दुश्मन की तरफ से चुनौतियां बड़ी हैं. पंजाब में नारकोटिक्स की तस्करी होती है. हमने अन्तरराष्ट्रीय बॉर्डर पर टेक्निकल सर्विलांस बढ़ा दिए हैं. लेकिन, फिर भी कुछ लोग रात के अंधेरे का फायदा उठाकर इस तरह के कामों को अंजाम दे देते हैं.

पंजाब की बात करें तो वहां कुछ लोग तस्करी का पुश्तैनी काम करते हैं. कुछ किसान ऐसे हैं जो कि इस तरह की हरकतों में शामिल होते हैं. पंजाब में कई स्थानों पर फेंस के आगे भी खेती होती है. हम खेतों में जाने से पहले एक गेट बनाकर रखते हैं. खेती के लिए अंदर जाने वाले लोगों की सघन तलाशी भी ली जाती है. फिर भी ये लोग कहीं ना कहीं छिपा कर तस्करी की कोशिश करते हैं. कई बार ड्रग्स तस्कर  रात के अंधेरे में नारकोटिक्स फेंकते हैं तो कई बार छह इंच डायमिटर वाले पाइप से भी फेंसिंग होने के बावजूद इधर ड्रग्स गिरा देते हैं.

फ़र्स्टपोस्ट- आखिर इस तरह की इकॉनमिक्स कैसे काम करती है ? किस तरह से ड्रग्स की तस्करी होती है और पाकिस्तान की तरफ से इधर ड्रग्स फेंकने वाले कौन होते हैं ?

के.के शर्मा- बीएसएफ नारकोटिक्स के केस को इंवेस्टिगेट नहीं करती है. बल्कि हम इस तरह के केस को सीधे एनसीबी को दे देते हैं. अगर बड़ा केस होता है तो एनसीबी को और छोटा केस होता है तो फिर इसे स्टेट पुलिस को दे देते हैं.

फ़र्स्टपोस्ट- बीएसएफ के लोगों पर भी ड्रग्स की तस्करी में शामिल होने के आरोप लगे हैं. इससे बीएसएफ की छवि खराब नहीं होती ?

के.के शर्मा- साल भर में एकाध केस ऐसे आते रहते हैं. लेकिन, हमने अपनी इंटर्नल विजिलेंस को भी मजबूत किया है. पहले केवल फ्रंटियल लेवेल पर आई जी की एक टीम होती थी. लेकिन, अब कमांडेंट लेवेल तक विजिलेंस सेट अप पहुंचा है. बटालियन की गतिविधियों पर ये विजिलेंस टीम नजर रखती है और सीधे हेडक्वार्टर में दिल्ली रिपोर्ट करती है.

दूसरा, अब हमने तय किया है कि कोई भी व्यक्ति तीन साल तक लगातार किसी संवेदनशील जगह पर ना रहे.

इसके अलावा हमने अपने इंटेलिजेंस सेट अप को भी मजबूत किया है. वैसे तो हम ये देखते हैं कि दूसरी तरफ क्या डिप्लॉयमेंट है, आतंकवादियों की क्या मूवमेंट है, किस तरह की ट्रेनिंग हो रही है, कहां पर उनके लॉन्चिंग पैड्स हैं. लेकिन, इसके साथ-साथ हमारी तरफ से या उनकी तरफ से कौन तस्करी करता है उस पर भी उनकी नजर रहती है. उनकी जानकारी में कोई चीज आती है तो वो फिर हमें बताते हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर

तीसरी चीज है कि बीएसएफ के किसी व्यक्ति की मिलीभगत छिप नहीं सकती. अगर कोई स्मगलर पकड़ा जाता है और उससे पुलिस इंवेस्टिगेशन कर रही है तो वो तुरंत कहता है कि बीएसएफ ने ये करवाया. इसलिए बीएसएफ का कोई जवान तस्करी में शामिल होने पर अंतत: पकड़ा जाता है.

फ़र्स्टपोस्ट- ड्रग्स तस्करी के साथ-साथ बांग्लादेश से सटी सीमा पर कैटल तस्करी की समस्या काफी बड़ी है. तमाम इंतजाम के बावजूद बीएसएफ इस पर रोक लगाने में सफल नहीं रहा है. यहां तक कि बीएसएफ के जवानों पर भी इसमें शामिल होने के आरोप लगते हैं ?

के.के शर्मा- हमने काफी सख्ती की है. लेकिन, बांग्लादेश में कैटल व्यापार कानूनन वैध है. बांग्लादेश में प्रति कैटल 500 टका कानूनी तरीके से वसूलते हैं. तो उनके लिए तो ये एक आय का स्रोत है.

लेकिन, हमारी सख्ती का असर दिख रहा है. पहले 20-22 लाख कैटल्स की सालाना तस्करी होती थी जो कि अब घटकर 5-6 लाख प्रति वर्ष तक आ गई है. लेकिन, पूरी तरह से इसके रोक न लग सकने का सबसे बड़ा कारण भारत-बांग्लादेश की सीमा नदी से लगती हुई है. दोनों देशों के बीच 4096 किमी की सीमा है, जिसमें 950 किमी में नदी-नाले होने के चलते कोई फेंसिंग ही संभव नहीं है.

इधर सीमावर्ती गांवों में लोग कैटल्स को रखते हैं प्रति दिन कैटल की संख्या के हिसाब से उन्हें इसका पैसा भी मिलता है. जब रात हो जाती है तो उस वक्त ये सभी कैटल की तस्करी कर उसे सीमा के उस पार पहुंचा देते हैं. भारतीय सीमा के 20 किमी के अंदर बड़ी संख्या में कैटल्स हाट भी बने हुए हैं. हम राज्य सरकारों से अनुरोध करते हैं कि वो इसको बंद करें या इसे दूर ले जाएं तो इस पर वो कुछ नहीं करते.

इसके अलावा सीमा के दोनों तरफ जो जनसंख्या है वो खास एथिनिसिटी और एक ही धर्म की है. वो कैटल ट्रेड में पहले से ही शामिल है. चूकि ये खास समुदाय के लोग उस इलाके में ज्यादा संख्या में हैं. उनके अपने नेता कई पार्टियों में हैं जिससे इनको मदद मिलती है.

पुलिस में हम रिपोर्ट दर्ज कराते हैं, लेकिन, वहां सपोर्ट नहीं मिलता. थोड़े दिन पहले ही हमारे एक जवान को तस्करों ने जान से मार दिया.

फ़र्स्टपोस्ट- क्या दोनों देशों के रिश्ते खराब होने के डर से बीएएसएफ कड़ी कारवाई से परहेज करता है ?

के.के शर्मा- भारत-बांग्लादेश की सरकार के स्तर पर भी हमें कई तरह की चुनौतियां का सामना करना पड़ता है. इस वक्त बांग्लादेश में भारत को लेकर सकारात्मक रूख रखने वाली सरकार है. हमारे रिश्ते बांग्लादेश से इस वक्त बेहतर हैं. हम नहीं चाहते कि बांग्लादेश से रिश्ते खराब हों.

विदेश मंत्रालय की तरफ से भी इस बारे में हमलोगों को कहा गया कि सीमा पर जो आप लोग किलिंग करते हो उसके नंबर कम होने चाहिए. 2012-13 में हमने पंप एक्शन गन यानी पीएजी का इस्तेमाल करना शुरू किया. इससे छर्रे निकलते हैं उसमें डेथ की संभावना कम होती है.

लेकिन, जब हमें लगता है कि हमारे जवान का हथियार अब छीन लेंगे या उन्हें मार देंगे तो फिर हम रेगुलर कारगर हथियार का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इससे तस्करों को लगता है कि उन्हे हम मारेंगे नहीं तो वो अब अधिक बार हमारे साथ क्लैशेज शुरू कर देते हैं. हमारे सैंकड़ों जवान इसमें घायल हो जाते हैं.

लेकिन, जब तस्करों की मौत हो जाती है तो इस तरह की घटना होने के बाद लोकल एनजीओ इसमें चले आते हैं. सवाल खड़ा करते हैं. वो बीएसएफ को डिमोरलाइज करने के लिए हमारे खिलाफ एनएचआरसी में चले जाते हैं. हम उनसे लड़ते हैं. हमें एनएचआरसी में जाना पड़ता है.  ये एक कॉम्पलेक्स सीन है.

फ़र्स्टपोस्ट- सीमा पर जिस तरह से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्या वहां निगरानी के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं? अगर किए गए हैं तो क्या फर्क पड़ा है इसका ?

के.के शर्मा- बॉर्डर गार्डिंग के लिए हमने दो पायलट प्रोजेक्ट पर काम करने शुरू कर दिए हैं. ये प्रोजेक्ट जम्मू में हो रहे हैं. कंप्रिहेंसिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (सी आई बी एम एस) तकनीक के जरिए टेक्निकल इक्विपमेंट का इस्तेमाल करने की पूरी तैयारी कर रहे हैं. पहले से इस्तेमाल हो रहे उपकरण में कुछ नए उपकरण को भी शामिल किया जा रहा है. इसमें एक तो मैन पावर और दूसरा बॉर्डर पर तकनीकी रूप से और सक्षम बनाने की कोशिश पर ध्यान दिया जा रहा है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर

सी आई बी एम एस तकनीक में सीसीटीवी की तरह इनपुट दिखेगी. इतने संवेदनशीन इक्विपमेंट होंगे कि कोई भी हरकत अगर होती है तो ये तुरंत एलार्म क्रिएट करेंगे. अगर सीमा पार से घुसपैठ की कोशिश होती है तो उसे तुरंत नोटिस कर एलर्ट हो जाएंगे. फिर हमारे नाइट विजन कैमरा और थर्मल इमेजेज उससे लिंक होंगे जिससे पता चल जाएगा कि आदमी की हरकत है या जानवर की हरकत है.

दूसरा जब जरूरत होगी तभी सीमा पर लाइट जलाई जाएंगी. क्योंकि सीमा पर लाइटिंग का भी काफी खर्च आता है. लाइट को मोशन सेंसर के साथ लिंक किया जाएगा.

सीआईबीएमएस एक नई तकनीक है जो कि बॉर्डर गार्डिंग के लिए है. ये केवल सीमा पर है. अभी जम्मू में पायलट प्रोजेक्ट है आगे इस्टर्न बार्डर पर और बाकी जगहों पर भी प्लान कर रहे हैं. मार्च तक जम्मू में इसे बार्डर पर प्लेस करने का प्लान है.

इसके पहले इजरायल, यूरोपियन बार्डर और यूएस में ही इस तरह के सिस्टम हैं. लेकिन, हमारा दावा है कि हमारा सिस्टम सबसे बेहतर होगा.

फ़र्स्टपोस्ट- आंतरिक सुरक्षा के मामलों में बीएसएफ का कितना बड़ा रोल है ?

के.के शर्मा- आंतरिक सुरक्षा में हमलोग बहुत कम ही रहते हैं. इसमें सीआरपीएफ का मुख्य रोल है. हमलोगों को जो जिम्मेदारी मिलती है उसमें हमलोग यह सुनिश्चित करते हैं कि बेहतर काम हो. जैसे छत्तीसगढ़ और ओडीशा के कुछ इलाकों में हम लोग हैं. जिस इलाके में हमलोग गए हैं वहां से हमने उनलोगों (नक्सलियों) के मूवमेंट को खत्म कर दिया है. उनको लगता है कि बीएसएफ से भिड़ेंगे तो फिर मुश्किल होगी.

फ़र्स्टपोस्ट- सीमा पर रखवाली के साथ-साथ बीएसएफ के मानवीय चेहरे की भी चर्चा होती है. किस तरह बीएसएफ लोगों की भलाई के लिए अपना योगदान देता है ?

के.के शर्मा- हमारा मानवीय पक्ष अपने जवानों को लेकर भी है जिसमें हम उनके वेलफेयर के लिए काम करते हैं. इसके साथ हम आम नागरिकों के वेलफेयर के लिए काम करते हैं. हम लोगों को भरोसा दिलाना चाहते हैं कि बीएसएफ उनकी मदद के लिए सामने आने वाला है. खासतौर से सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह के काम हम करते हैं.

अगर ईस्टर्न इलाके की बात करें तो उस इलाके में मेडिकल सुविधा को लेकर लोगों को परेशानी होती है. वहां हम मेडिकल कैंप लगाते हैं. बड़ी बीमारी का पता चलने पर बड़े अस्पताल भेजने की सलाह देते हैं. हम स्कूल के बच्चों को किताब-कॉपी और डेस्कटॉप बांटते हैं. उनको सपोर्टिंग गुड्स देने का काम भी करते हैं.

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खास तौर से लड़कों को सीमावर्ती इलाके में ट्रेनिंग फॉर रिक्रूटमेंट इन पारा मिलिट्री एंड एज पुलिस सिक्यूरिटी गार्ड्स की ट्रेनिंग दी जाती है जिससे पुलिस या पारामिलिट्री में उनका चयन हो सके.

कहीं भी कुछ प्राकृतिक आपदा आती है तो हम सबसे पहले हरकत में आते हैं. बनासकांठा में अभी जिस तरह के हालात बने हैं. इस मामले में भी हमारी टीम ने त्वरित कारवाई की.

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