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कावेरी जल विवाद: जानिए कितने राज्य उलझे हैं जल विवाद में...

कावेरी जल विवाद के अलावा देश के कई राज्यों में हमेशा बनी रहती पानी बंटवारे को लेकर सिर फुटव्वल की स्थिति

Updated On: Feb 16, 2018 01:54 PM IST

FP Staff

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कावेरी जल विवाद: जानिए कितने राज्य उलझे हैं जल विवाद में...

कावेरी जल विवाद का मसला न केवल बहुत पुराना है बल्कि उतना ही विवादास्पद भी. इस विवाद को लेकर अक्सर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच ठनी रहती है. इस विवाद ने दोनों राज्यों में हिंसक प्रदर्शन भी कराए हैं. लेकिन कावेरी हमारे देश में अकेला जल विवाद नहीं है बल्कि कई जल विवाद हैं, जिन्हें लेकर तमाम राज्यों के बीच आपस में ठनती रहती है.

नर्मदा के पानी को लेकर कलह

नर्मदा के पानी के बंटवारे को लेकर गुजरात और मध्य प्रदेश के बीच विवाद है. दोनों राज्य ज्यादा से ज्यादा पानी का इस्तेमाल चाहते हैं. नर्मदा नदी मध्य प्रदेश में अमरकंटक से निकलती है. इसकी लम्बाई 1300 किलोमीटर तथा बेसिन क्षेत्र 98796 वर्ग किलोमीटर है. नर्मदा जल विवाद में गुजरात और मध्य प्रदेश के साथ महाराष्ट्र भी शामिल है. अंतरराज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 की धारा 4 के तहत् केंद्र सरकार ने नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया.

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न्यायमूर्ति वी. रामास्वामी को इसका अध्यक्ष बनाया गया. रामास्वामी न्यायाधिकरण ने 7 दिसंबर, 1979 को फैसला दिया. इसमें नर्मदा नदी से गुजरात को 90 लाख एकड़ फीट, मध्य प्रदेश को 182.5 लाख एकड़ फीट, महाराष्ट्र को 2.5 लाख एकड़ फीट जल उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया. नर्मदा नदी पर बनने वाला सरदार सरोवर बांध भी विवादास्पद रहा है.

यमुना जल विवाद

यमुना नदी जल के बंटवारे से संबंधित विवाद काफी पुराना है. इससे देश के पांच राज्य हरियाणा,उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश जुड़े हुए हैं. सबसे पहले यमुना जल समझौता 1954 में मात्र दो राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मध्य हुआ था, जिसके अंतर्गत यमुना जल में हरियाणा का हिस्सा 77 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश का हिस्सा 23 प्रतिशत निर्धारित किया गया था. राजस्थान, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के हिस्से का जिक्र तक नहीं आया था.इन राज्यों द्वारा भी अपने हिस्से की मांग के साथ ही विवाद गरमाने लगा.

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फरवरी 1993 में हरियाणा एवं दिल्ली के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत मुनाका से दिल्ली के लिए अतिरिक्त जल वाहक प्रणाली के निर्माण पर सहमति हुई.12 मई, 1994 को पांच राज्यों के बीच यमुना जल बंटवारे को लेकर एक समझौता हुआ. इस समझौते से दिल्ली को सबसे ज्यादा फायदा मिला तो हरियाणा को घाटा. समझौते की धारा 7(3) में कहा गया कि यदि कभी पानी की मात्रा अनुमानित मात्रा से कम हो जाती है, तो सबसे पहले दिल्ली की पेयजल संबंधी आवश्यकताओं को पूरा किया जाएगा.

दिल्ली ने अपना हिस्सा बढ़ाने की मांग इस आधार पर की कि वह प्राप्त पानी का केवल 40 प्रतिशत भाग ही पीने में उपयोग करता है. शेष आठ प्रतिशत यमुना में चला जाता है, जिससे हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश को लाभ मिलता है. इसलिए दिल्ली को ढाई गुणा ज्यादा पानी मिलना चाहिए. यह विवाद जारी है.

सोन नदी जल विवाद

सोन नदी जल विवाद तीन राज्यों-बिहार, उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के बीच है. 1973 में ही सोन और रिहन्द नदियों के जल विवाद के हल के लिए बाणसागर समझौता हुआ था.

बिहार शुरू से ही इस समझौते के सही तरीके से लागू नहीं करने का आरोप लगाता रहा है. समझौते के तहत रिहन्द नदी का पूरा पानी बिहार को आवंटित किया गया था लेकिन केंद्रीय उपक्रम एनटीपीसी और उत्तर प्रदेश सरकार रिहन्द जलाशय से बिहार के हिस्से का पानी इस्तेमाल करते रहे हैं.

कृष्णा नदी जल विवाद

कृष्णा नदी का पानी आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक के बीच कृष्णा नदी जल विवाद का एक कारण है. यह नदी महाबलेश्वर से निकलकर महाराष्ट्र के सतारा व सांगली जिलों से होकर कर्नाटक व दक्षिणी आंध्र प्रदेश में बहती है. कृष्णा नदी कर्नाटक के 60 प्रतिशत क्षेत्रों की लगभग तीस लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करती है.

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इस नदी के विवाद को निपटाने के लिए 1969 में बछावत न्यायाधिकरण का गठन हुआ, जिसने 1976 में अपना निर्णय दिया. निर्णय में कर्नाटक को 700 अरब क्यूसेक, आंध्र प्रदेश को 800 अरब क्यूसेक व महाराष्ट्र को 560 अरब क्यूसेक पानी के उपयोग की छूट दी गयी. इस मामले में कई निर्णयों के बाद भी कृष्णा नदी जल विवाद का अंत नहीं हुआ. इस जल विवाद को लेकर अगली सुनवाई वर्ष 2050 के बाद की जाएगी.

गोदावरी नदी जल विवाद

गोदावरी भारत की सबसे बड़ी नदी है. ये महाराष्ट्र के नासिक जिले से निकलती है. इसकी लंबाई 1465 किलोमीटर है. गोदावरी के जल के लिए महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडीशा व आंध्र प्रदेश के बीच काफी विवाद है. इसे सुलझाने के लिए सरकार ने अप्रैल 1969 में एक कमेटी का गठन किया गया था. इस मामले में कमेटी ने अपनी रिपोर्ट भी सौंपी थी लेकिन गोदावरी नदी जल विवाद पूरी तरह से नहीं सुलझा है.

सतलज-रावी-व्यास विवाद

संयुक्त पंजाब में नदी जल विवाद जैसी कोई बात नहीं थी. नवंबर 1966 में पंजाब के एक हिस्से को अलग कर नए राज्य हरियाणा की स्थापना की गई. सतलज, रावी और व्यास नदियों के जल बंटवारे से संबंधित विवाद पंजाब और हरियाणा के बीच रहा है. इसके बाद हरियाणा ने अपने हिस्से का पानी पंजाब से मांगा. यहीं से इन दोनों राज्यों के बीच नदी जल विवाद शुरू हुआ.

अन्य बड़े नदी जल विवाद

- माही नदी जल विवाद- गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश - कर्मनाशा नदी जल विवाद- उत्तर प्रदेश और बिहार - बराक नदी जल विवाद- असम और मणिपुर - अलियार और भिवानी नदी जल विवाद- तमिलनाडु और केरल - तुंगभद्रा नदी जल विवाद- आंध्र प्रदेश और कर्नाटक

(साभार न्यूज18)

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