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शिमला छुट्टी मनाने जा रहे हैं तो पीने-नहाने का पानी जरूर ले जाइएगा

पानी की कमी से निपटने के लिए राज्य सरकार ने राशनिंग शुरू कर दी है. इसके तहत सरकार शहर को तीन जोन में बांटकर हर तीन दिन में एकबार 5 घंटे पानी की आपूर्ति कर रही है

FP Staff Updated On: May 30, 2018 08:05 PM IST

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शिमला छुट्टी मनाने जा रहे हैं तो पीने-नहाने का पानी जरूर ले जाइएगा

दिल्ली की गरमी से बचने के लिए अगर आप शिमला जाने की तैयारी में हैं तो मुमकिन है कि वहां आपको पीने के लिए पानी भी बमुश्किल मिले, नहाना तो दूर की बात है. पिछले दो दशक से शिमला पानी के संकट से जूझ रहा है.

पानी की कमी से जूझ रहे लोग पिछले पांच दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. लगाताक बढ़ते विरोध-प्रदर्शन देखते हुए राज्य सरकार ने पानी की राशनिंग शुरू कर दी है.

क्या निकला रास्ता?

पानी की कमी शुरू होने के करीब एक हफ्ते बाद सोमवार को सरकार ने शिमला को तीन जोन में बांटकर राशनिंग शुरू की. इसमें हर जोन में हर तीन दिन में एकबार पांच घंटे पानी की सप्लाई शुरू की गई. शहर के मशहूर मॉल रोड पर शिमलावाले वाटर टैंकर के सामने बर्तन लेकर खड़े रहते हैं.

रविवार रात को शिमलावालों ने चीफ मिनिस्टर जयराम ठाकुर के घर का घेराव किया. इनका आरोप है कि बड़े होटलों और वीआईपी के घरों पर पानी की सप्लाई पूरी है. मंगलवार को लोगों ने शिमला-कालका हाइवे भी बंद कर दिया था. इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच मामूली झड़प भी हुई थी. इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की एक डिविजनल बेंच ने वीआईपी घरों में पानी की स्पेशल सप्लाई पर रोक लगा दी है. चीफ जस्टिस संजय करोल की अगुवाई में बेंच ने यह फैसला लिया जो करोल के अपने घर पर भी लागू होगा.

जनता की फिक्र किसे?

पानी की समस्या से निपटने के लिए सीएम ने शिमला की पहली बीजेपी मेयर कुसुम सादरेत की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई. पानी की मुश्किल आसान किए बगैर कुसुम चीन चली गईं, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया. सरकार का कहना है कि सर्दी में बारिश और बर्फ कम पड़ने से जल स्रोत सूख गए हैं.

सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया, मई 2017 में शिमला नगर निगम को हर दिन 1105 मिलियन लीटर पानी मिलता था. 2016 की मई में यह 1004 मिलियन लीटर हो गया और इस साल यह सिर्फ 810 मिलियन लीटर है. लिहाजा शिमला के लोगों को हर दिन सिर्फ 29 मिलियन लीटर पानी मिल रहा है. मई 2017 में यह 35.6 मिलियन लीटर प्रतिदिन और मई 2016 में हर दिन 32.4 मिलियन लीटर था. जबकि गर्मी में खर्च 42 मिलियन लीटर का होता है.

क्यों घट रहा है पानी का लेवल?

शिमला के नागरिकों का कहना है कि शहर में तेजी से निर्माण कार्य हो रहे हैं, जिसमें पानी का बहुत इस्तेमाल होता है. कंस्ट्रक्शन के लिए जरूरी पानी की आपूर्ति के लिए पंप अवैध तरीके से पंप लगाया जा रहा है. इससे पानी का लेवल नीचे चला जा रहा है. हाईकोर्ट ने एक हफ्ते के लिए शहर के सभी निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है. इतना ही नहीं, शिमला की 2 लाख आबादी के साथ गर्मियों में 15-20 हजार सैलानी आते हैं, जिनके पानी के खर्च से शहर पर बोझ बढ़ता जा रहा है.

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