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बीएचयू विवाद: सुरक्षा इंतजाम में वक्त लगेगा और तब तक...?

अखिलेश यादव के वक्त से ही बिगड़ने लगे थे बीएचयू के हालात

Amit Singh, Saurabh Sharma Updated On: Sep 25, 2017 09:53 PM IST

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बीएचयू विवाद: सुरक्षा इंतजाम में वक्त लगेगा और तब तक...?

प्रतिष्ठित बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) में बवाल जारी है. ये हंगामा 21 सितंबर को उस वक्त शुरू हुआ, जब छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न की घटनाओं से परेशान कई छात्राएं धरने पर बैठीं. बाद में इन छात्राओं के समर्थन में कई और छात्र शामिल हो गए और जबरदस्त प्रदर्शन शुरू कर दिया. लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं को रोकने के लिए पुलिस ने जिस ढंग से कार्रवाई की उससे हालात और बिगड़ गए.

नतीजतन बीएचयू में फिलहाल कर्फ्यू जैसी स्थिति है. छात्रों के रुख को देखते हुए लगता है कि, बीएचयू में हालात तबतक सामान्य नहीं होने वाले, जबतक यूनिवर्सिटी प्रशासन कैंपस में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं करेगा.

करीब 2,700 एकड़ में फैले बीएचयू परिसर में सीसीटीवी से निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है, रात होते ही कई सड़कें अंधेरे में डूब जाती हैं क्योंकि वहां रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं, सुरक्षाकर्मियों के उदासीन और लापरवाह रवैए के चलते बाहरी लोग कभी भी कैंपस में आ-जा सकते हैं. इसके अलावा बीएचयू कैंपस में आए दिन जातिगत संघर्ष की घटनाएं भी होती रहती हैं, जिनमें प्रतिद्वंद्वी गुटों के छात्र बेखौफ होकर चाकू, तलवार और अवैध बंदूकों का इस्तेमाल करते हैं. पिछले कुछ अरसे से बीएचयू में गुंडागर्दी और आगजनी की घटनाएं आम बात हो गई हैं.

3 अक्टूबर तक यूनिवर्सिटी बंद

रविवार को फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत के दौरान वाराणसी के एसपी (सिटी) दिनेश कुमार सिंह ने बताया, 'कैंपस में फिलहाल कर्फ्यू जैसी स्थिति है, हंगामे के बाद ज्यादातर छात्र अपने-अपने घर चले गए हैं.'

मौजूदा हालात के मद्देनजर बीएचयू प्रशासन ने यूनिवर्सिटी को 3 अक्टूबर तक के लिए बंद कर दिया है. लेकिन नवरात्र और दशहरा के नाम पर की गईं इन छुट्टियों से क्या यूनिवर्सिटी कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त हो जाएगी? क्या इन छुट्टियों के दौरान कैंपस की सभी खामियों को ठीक कर लिया जाएगा?

बीएचयू कैंपस की सुरक्षा के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 700 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर रखा है. लेकिन छात्राओं और महिला शिक्षकों का कहना है कि, कैंपस में कोई भी महिला सुरक्षित नहीं है.

क्या है लड़कियों की मुश्किल?

कैंपस में आए दिन छात्रों के बीच हिंसक घटनाएं होती रहती हैं. लेकिन कुछ वक्त से महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की सख्या में खासा इजाफा हुआ है, इनमें छेड़छाड़, अश्लील इशारे और यौन उत्पीड़न जैसी शिकायतें सबसे ज्यादा हैं.

बीएचयू में मौजूदा बवाल छेड़छाड़ की एक कथित घटना के बाद शुरू हुआ. विजुअल आर्ट्स की एक छात्रा का आरोप है कि, त्रिवेणी हॉस्टल के बाहर मोटरसाइकिल पर सवार दो लड़कों ने उसके साथ बदसलूकी और छेड़छाड़ की. खास बात ये है कि छात्रा के यौन उत्पीड़न की ये घटना प्रॉक्टर ऑफिस से महज कुछ मीटर की दूरी पर हुई.

पीड़ित छात्रा रीमा (बदला हुआ नाम) का ये भी आरोप है कि जिस वक्त बीएचयू कैंपस में उसके साथ छेड़छाड़ हो रही थी, उस वक्त वहां मौजूद सेक्योरिटी गार्ड मूक दर्शक बना रहा.

यूनिवर्सिटी की एक छात्रा रूपा अग्रवाल (बदला हुआ नाम) ने नाराजगी के साथ बताया, 'रीमा दी के साथ इतनी बदतमीजी हुई और वहां बैठे गार्ड आए ही नहीं. शर्म आती है ऐसे यूनिवर्सिटी प्रशासन पर. वो बेहोश हो गई थी, और अभी भी सदमे में हैं.'

टूट गया सब्र का बांध

कैंपस में हुई छेड़छाड़ की इस घटना से यूनिवर्सिटी छात्राओं के सब्र का बांध टूट गया, और उन्होंने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया. इसके बाद दर्जनों छात्राएं यूनिवर्सिटी कैंपस के मेन गेट पर धरने पर बैठ गईं. प्रदर्शनकारी छात्राओं की मांग थी कि वाइस चांसलर उनसे मिलने आएं और उनकी शिकायतें सुनें.

छेड़छाड़ की शिकार छात्रा भी अपना सिर मुंडाकर साथियों के साथ धरने में शामिल हो गई. लेकिन वाइस चांसलर प्रोफेसर जी सी त्रिपाठी ने ये कहते हुए प्रदर्शनकारी छात्राओं से मिलने से इनकार कर दिया कि, वो गली-नुक्कड़ों पर किसी से मुलाकात नहीं करेंगे.

वहीं यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर ओ एम सिंह ने भी उनके फैसले का समर्थन किया और छात्राओं की मांग को वाइस चांसलर की गरिमा से जोड़ दिया. ओ एम सिंह ने कहा, 'कुलपति साहब की भी अपनी एक मर्यादा है, और वो सड़क पर जाकर तो छात्राओं से नहीं मिलेंगे.'

बाद में छात्राओं ने आरोप लगाया कि, शांतिपूर्ण धरने के दौरान पुलिस ने बिना वजह उनपर लाठीचार्ज किया, जिसमें कई छात्राएं घायल हो गईं. वहीं जिलाधिकारी योगेश्वर राम का कहना है कि, प्रदर्शन के दौरान कई छात्र-छात्राएं उग्र हो गए थे, जिसके चलते पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी. हालांकि पुलिस ने छात्रों के बवाल के खिलाफ सिर्फ शनिवार को ही केस दर्ज किया.

क्या हुआ था 23 की रात को

वाराणसी पुलिस ने 23 सितंबर को रात 11.30 बजे प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज का आदेश दिया था. पुलिस की दलील थी कि कुछ छात्रों ने कथित तौर पर उनपर पथराव किया. इसके अलावा यूनिवर्सिटी कैंपस में कुछ जगहों पर पेट्रोल बम भी फेंके गए, साथ ही लंका पुलिस चौकी में भी आगजनी की गई.

पुलिस के बर्बर लाठीचार्ज में कई लड़कियों को गंभीर चोटें आईं, और इलाज के लिए उन्हें बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया. छात्राओं का आरोप है कि लाठीचार्ज के वक्त पुलिस की कोई महिला कांस्टेबल मौजूद नहीं थी.

मास कम्युनिकेशन पार्ट 2 के छात्र शुभम तिवारी का कहना है कि, कुछ बाहरी तत्व कैंपस में आकर विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए थे, उन्हीं लोगों ने पुलिस पर पथराव किया और पेट्रोल बम फेंके.

एसपी (सिटी) दिनेश कुमार सिंह के मुताबिक, 'हम लोगों ने छात्राओं से बातचीत करने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी मांगे बड़ी अजीबोगरीब थीं.' दिनेश कुमार सिंह ने आगे बताया, 'रविवार को ये आदेश दिया गया कि यूनिवर्सिटी को दुर्गा पूजा के लिए 3 अक्टूबर तक बंद रखा जाए. लेकिन ये सोचना गलत है कि यूनिवर्सिटी को इसलिए बंद कराया गया ताकि छात्र-छात्राएं और धरना-प्रदर्शन न कर सकें.'

रविवार को एक प्रदर्शनकारी छात्रा ने बताया कि अब उन्होंने अपनी शिकायतें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाने का फैसला किया है. क्योंकि वाराणसी प्रधानमंत्री मोदी का संसदीय क्षेत्र है. वहीं बीएचयू की एक और छात्रा सौम्या पहवा के मुताबिक, 'मोदी जी गंगा मइया की सफाई करने आते हैं, और जो गंदगी गंगा मां की बेटियों को परेशान कर रही है उसका कुछ नहीं.... मोदी जी हमसे मिलने आओ.'

ये कैसी सुरक्षा?

सौम्या ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए आगे कहा कि, यूनिवर्सिटी में एक भी छात्रा ऐसी नहीं है जो कैंपस में छेड़छाड़ या यौन उत्पीड़न का शिकार न हुई हो. सौम्या का कहना है कि, 'हॉस्टल में आते-जाते समय हम सड़क पर सुरक्षित नहीं होते हैं, छेड़छाड़ या मुसीबत के वक्त कोई भी हमारी मदद नहीं करता है. कैंपस में तैनात गार्ड हम लोगों से हो रही छेड़छाड़ को देखकर मजे लेते हैं, यहां तक कि कोई गुंडा-मवाली शख्स हमें अनुचित रूप से छू भी ले, तब भी कोई कुछ नहीं बोलता.'

'सुरक्षा गार्ड्स की इस उदासीनता से बदमाश लड़कों के हौसले बहुत बढ़ चुके हैं, यहां तक कि कुछ लड़के तो सरेआम हमें अपने जननांग दिखाने और अश्लील इशारे करने से नहीं चूकते. वहीं कुछ वरिष्ठ छात्र और शिक्षक तो कई बार हमारे साथ डिजिटल रूप से रेप कर चुके हैं.'

छात्रों का आरोप है कि बीएचयू कैंपस में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है. जबकि छात्राएं कई बार यूनिवर्सिटी प्रशासन से सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग कर चुकी हैं, लेकिन हर बार उनकी मांग ठुकरा दी जाती है.

त्रिवेणी हॉस्टल को जाने वाली सड़क पर लगीं लाइट्स काम नहीं करतीं. छात्राओं का आरोप है कि, जब भी वो वाइस चांसलर से सड़क पर रोशनी न होने की शिकायत करती हैं, तब वो, 'इंतजाम में थोड़ा वक्त लगेगा" कहकर बात को टाल जाते हैं.

छेड़छाड़ और यौन शोषण को लेकर इस साल 24 जनवरी को भी बीएचयू में जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन हुआ था. तब वाइस चांसलर के आदेश पर एक महिला सेल का गठन किया गया था. छात्राओं के लिए हेल्पलाइन नंबर 8004922000 का भी ऐलान किया गया था. महिला सेल के गठन के महज दो दिन बाद ही आईआईटी-बीएचयू की दो छात्राओं ने आरोप लगाया कि नशे में धुत एक पुलिस कांस्टेबल ने कैंपस में उनके साथ छेड़छाड़ की. लेकिन तब उस आरोपी पुलिसवाले के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी.

कैंपस में भी सुरक्षित नहीं लड़कियां

प्रॉक्टोरियल बोर्ड की सदस्य और हिंदी विभाग की प्रोफेसर श्रद्धा सिंह का भी कहना है कि बीएचयू में लड़कियां सुरक्षित नहीं.

श्रद्धा सिंह ने बताया, 'छात्राओं को छोड़िए, मेरी जैसी महिला शिक्षक तक क्लासरूम और कैंपस में सुरक्षित नहीं, यहां तक कि कार में सवार होने के बावजूद असामाजिक तत्व हमसे छेड़छाड़ करते हैं.'

एक अन्य शिक्षक प्रोफेसर महेश प्रसाद अहिरवार का कहना है कि, पिछले दो-तीन साल में यूनिवर्सिटी में हिंसक घटनाएं बढ़ गई हैं. प्रॉक्टोरियल ऑफिस के रिकॉर्ड की जांच करने पर सबकुछ सामने आ जाएगा. अहिरवार के मुताबिक, 'कभी भी कहीं से एक हजूम सा आता है, मारपीट, तोड़फोड़, आगजनी करता है और चला जाता है.'

सूत्रों के मुताबिक, 2016 की आखिरी तिमाही में बीएचयू में रेप के 3 मामले दर्ज किए गए थे. गौर करने वाली बात ये है कि बीएचयू कैंपस में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, लेकिन इसके बावजूद वहां की सुरक्षा व्यवस्था बेहद खराब है. कैंपस में पुलिस तभी प्रवेश करती है, जब यूनिवर्सिटी प्रशासन उसे बुलाता है.

बीएचयू कैंपस की सीमा के बाहर अस्सी और लंका जैसे इलाकों में एक-एक पुलिस चौकी है. केवल प्रॉक्टर और वाइस चांसलर को ही यूनिवर्सिटी कैंपस में पुलिस को बुलाने का अधिकार है.

अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर और कैंपस में बने एक मंदिर की वजह से बाहरी लोग बेरोकटोक यूनिवर्सिटी में प्रवेश कर सकते हैं. यूनिवर्सिटी कैंपस में मोटरसाइकिलें, कार और ट्रैक्टर बेधड़क इधर-उधर घूमते फिरते नजर आते हैं. छात्र शुभम तिवारी के मुताबिक, 'बीएचयू में कोई भी कहीं से भी घुस सकता है, बाहरी लोगों के प्रवेश पर कोई रोकटोक नहीं है. आमतौर पर बाहरी लोग ही आकर यहां अपराध करते हैं.'

हर सरकार में बदहाल कैंपस 

एक पुलिस अधिकारी ने दावा किया है कि, योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद बीएचयू में छात्रों का ये पहला बड़ा उपद्रव था, लेकिन यूनिवर्सिटी कैंपस के हालात तो अखिलेश यादव की सरकार के वक्त से ही बिगड़ना शुरू हो गए थे. दिलचस्प बात ये है कि मुख्यमंत्री का एंटी रोमियो स्वायड बीएचयू कैंपस में कहीं नजर नहीं आता. वैसे पुलिस को किसी भी हालत में बिना इजाजत कैंपस में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है.

दूसरी कई यूनिवर्सिटी के विपरीत बीएचयू में राजनीतिक सक्रियता ज्यादा नहीं है, वहां कोई छात्र संघ भी नहीं है. कैंपस में सभी राजनीतिक विचारधाराओं के छात्र रहते हैं. यहां तक कि बीएचयू के शिक्षकों की भी कोई संस्था नहीं है, जैसी कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षकों के पास है. लेकिन इससे कुछ छात्रों और शिक्षकों को ये कहने से नहीं रोका जा सकता है कि, बीएचयू के वाइस चांसलर 'आरएसएस के करीबी' हैं और उनकी 'नियुक्ति' मोदी की मर्जी से हुई है.

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